विजयवाड़ा। पुलिस हिरासत में एक युवक की मौत, परिवार को लंबे समय तक जवाब न मिलना और जांच के दौरान सामने आए कई अनसुलझे सवाल… गाडे साईं कृष्णा का मामला अब सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में पहुंच गया है। युवक की मौत से जुड़े घटनाक्रम पर सुनवाई करते हुए शीर्ष अदालत ने आंध्र प्रदेश पुलिस से जवाब मांगा है। अदालत की चिंता सिर्फ युवक की मौत तक सीमित नहीं रही, बल्कि यह भी जानना चाहा कि हिरासत के दौरान तय कानूनी प्रक्रियाओं का पालन हुआ या नहीं और मामले से जुड़े अहम साक्ष्य सुरक्षित क्यों नहीं रहे।

हिरासत में युवक, लेकिन मजिस्ट्रेट के सामने पेशी क्यों नहीं?
सुप्रीम कोर्ट ने सुनवाई के दौरान पुलिस की कार्रवाई से जुड़े कई अहम बिंदुओं पर सवाल उठाए। अदालत ने पूछा कि साईं कृष्णा के मामले में FIR दर्ज करने में इतनी देर क्यों हुई और हिरासत में लिए जाने के बाद उसे मजिस्ट्रेट के समक्ष पेश क्यों नहीं किया गया। CCTV फुटेज से जुड़ा मुद्दा भी सुनवाई के केंद्र में रहा। तीन जजों की पीठ ने आंध्र प्रदेश हाई कोर्ट में चल रही इस मामले से संबंधित कार्यवाही पर रोक लगा दी है। साथ ही, 30 सितंबर तक केस से जुड़े रिकॉर्ड सीलबंद लिफाफे में जमा करने का निर्देश दिया गया है। मामले में CBI को भी पक्षकार बनाया गया है। अब अगली सुनवाई 12 अक्टूबर को होगी।

जांच में निचले स्तर के कर्मचारियों तक ही सीमित रही कार्रवाई?
सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने जांच की दिशा को लेकर भी सवाल उठाए। अदालत ने यह जानना चाहा कि मामले में कार्रवाई केवल निचले स्तर के कर्मचारियों तक सीमित तो नहीं रह गई और वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों की भूमिका की भी जांच की गई या नहीं। यह मामला YSR कांग्रेस पार्टी के सांसद मड्डिला गुरुमूर्ति की याचिका के जरिए शीर्ष अदालत पहुंचा है। याचिका में वरिष्ठ अधिकारियों की भूमिका की जांच कराने की मांग की गई थी। अब सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के बाद जांच से जुड़े रिकॉर्ड और पुलिस की कार्रवाई पर आगे की सुनवाई में चर्चा होगी।

वारंट पर हिरासत में लिया गया था साईं कृष्णा
मई 2026 में गाडे साईं कृष्णा को गैर-जमानती वारंट के आधार पर टास्क फोर्स के कर्मचारियों ने हिरासत में लिया था। इसके बाद उसे विजयवाड़ा के कृष्णालंका पुलिस स्टेशन ले जाया गया। आरोप है कि हिरासत के दौरान उसके साथ मारपीट की गई और बाद में उसे एक सुनसान इमारत में ले जाया गया, जहां उसकी मौत हो गई। जांच में शव को जलाए जाने और मामले से जुड़े साक्ष्य मिटाने के आरोप भी सामने आए हैं। CCTV फुटेज का उपलब्ध नहीं होना भी जांच का अहम पहलू बना हुआ है। इन आरोपों और घटनाक्रम की न्यायिक प्रक्रिया के तहत जांच जारी है।

CBI जांच की मांग के बीच बढ़ा राजनीतिक विवाद
साईं कृष्णा मामले को लेकर YSR कांग्रेस पार्टी के अध्यक्ष और पूर्व मुख्यमंत्री वाईएस जगन मोहन रेड्डी ने पुलिस के वरिष्ठ अधिकारियों की जवाबदेही तय करने की मांग की है। उन्होंने मामले की CBI जांच कराने की मांग भी उठाई है। सुप्रीम कोर्ट के हस्तक्षेप के बाद YSR कांग्रेस के नेताओं ने इसे चंद्रबाबू नायडू सरकार के लिए झटका बताया है। दूसरी ओर, इस मामले को लेकर TDP के नेतृत्व वाले सत्ताधारी गठबंधन और विपक्षी YSR कांग्रेस के बीच आरोप-प्रत्यारोप का दौर जारी है। अब सबकी नजर 12 अक्टूबर को होने वाली सुनवाई पर है, जहां मामले से जुड़े आगे के घटनाक्रम पर अदालत में सुनवाई होगी।