
बिलासपुर : नगर निगम की सामान्य सभा शुरू होते ही सदन में हंगामा मच गया। कांग्रेस की महिला पार्षदों ने नए एल्डरमैन पर गलत टिप्पणी करने का आरोप लगाते हुए माफी की मांग की। विरोध इतना बढ़ा कि महिला पार्षदों ने माफी नहीं मांगने पर सदन के बहिष्कार की चेतावनी दे दी। हंगामे के चलते प्रश्नकाल भी स्थगित करना पड़ा। इसके बाद स्मार्ट सिटी के अधूरे कामों और निर्माण की गुणवत्ता को लेकर भाजपा और कांग्रेस पार्षदों के बीच तीखी बहस छिड़ गई। सदन में एक ओर महिला पार्षदों के सम्मान का मुद्दा गरमाया, तो दूसरी ओर शहर के विकास कार्यो में देरी और खर्च को लेकर सत्ता पक्ष और विपक्ष आमने-सामने आ गए।
चुनाव जीतकर आए पार्षदों को ही बोलने नहीं दिया जा रहा: रीता कश्यप
सामान्य सभा की शुरुआत में ही कांग्रेस की महिला पार्षदों ने नए एल्डरमैन की टिप्पणी पर आपत्ति जताई। महिला पार्षदों का कहना था कि एल्डरमैन को अपनी भाषा और व्यवहार का ध्यान रखना चाहिए। उन्होंने संबंधित टिप्पणी पर माफी मांगने की मांग की। महिला पार्षद रीता कश्यप ने आरोप लगाया कि चुनाव जीतकर सदन में आए पार्षदों को बिना चुनाव जीते सामान्य सभा में पहुंचे एल्डरमैन बोलने नहीं दे रहे हैं। उन्होंने कहा कि निर्वाचित पार्षदों को सदन में अपनी बात रखने का पूरा अवसर मिलना चाहिए। महिला पार्षद अपनी मांग पर अड़ी रहीं। काफी देर तक चले हंगामे के बीच सदन की कार्यवाही प्रभावित हुई। स्थिति को देखते हुए अध्यक्ष ने प्रश्नकाल स्थगित कर दिया। महिला पार्षदों ने साफ चेतावनी दी कि जब तक टिप्पणी पर माफी नहीं मांगी जाती, उनका विरोध जारी रहेगा।
स्मार्ट सिटी के कामों पर भाजपा-कांग्रेस आमने-सामने
महिला पार्षदों के विरोध के बाद सदन में स्मार्ट सिटी के कामों को लेकर बहस शुरू हो गई। शहर में चल रहे विकास कार्यो की गुणवत्ता, खर्च और उनकी मौजूदा स्थिति को लेकर सवाल उठाए गए। विपक्ष ने अधूरे प्रोजेक्ट और कामों में हो रही देरी पर निगम से जवाब मांगा। बहस के दौरान महापौर पूजा विधानी ने स्मार्ट सिटी के कार्यों में हुई गड़बड़ियों के लिए पिछली कांग्रेस सरकार को जिम्मेदार ठहराया। उन्होंने कहा कि शहर में जिन कामों को लेकर सवाल कर रहे हैं, उनमें गड़बड़ी कांग्रेस सरकार के समय हुई थी।
वहीं, भाजपा पार्षद कार्तिक यादव ने अपने वार्ड में सड़क और नाली निर्माण का मुद्दा उठाया। उन्होंने आरोप लगाया कि इन कार्यों में कांग्रेस से जुड़े लोगों ने बंदरबांट की है। इस आरोप के बाद सदन में सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच फिर बहस शुरू हो गई।
43 विकास कार्यों में सिर्फ 2 पूरे, बाकी अब भी अधूरे
सामान्य सभा में शहर के विकास कार्यों की धीमी रफ्तार भी बड़ा मुद्दा है। वित्तीय वर्ष 2025-26 में नगर निगम क्षेत्र में 16 करोड़ रुपये से अधिक के 43 विकास कार्य स्वीकृत किए गए थे। इनमें अब तक सिर्फ दो काम पूरे हुए हैं। बाकी कार्य टेंडर, वर्क ऑर्डर या निर्माण की प्रक्रिया में बताए जा रहे हैं। विपक्ष इन कार्यों की मौजूदा स्थिति, देरी की वजह और खर्च का हिसाब मांग रहा है। स्वीकृति के बाद भी कई विकास कार्य समय पर पूरे क्यों नहीं हो पा रहे हैं और इनके लिए तय समयसीमा क्या है।
68 करोड़ की योजना के कामों की रफ्तार भी पड़ी धीमी
मुख्यमंत्री नगरोत्थान योजना के तहत करीब 68 करोड़ रुपये के विकास कार्य भी कई जगह धीमी गति से चल रहे हैं। कुछ परियोजनाओं को शुरू हुए छह से सात महीने बीत चुके हैं, लेकिन उनकी प्रगति करीब 15 से 50 प्रतिशत के बीच बताई जा रही है। रिवर फ्रंट, एसटीपी, सड़क, पार्किंग और कॉम्प्लेक्स सहित कई अधूरे प्रोजेक्ट सामान्य सभा के एजेंडे में हैं। विपक्ष इन कार्यों की वर्तमान स्थिति, देरी की वजह, अब तक हुए खर्च और नई समयसीमा को लेकर निगम से जवाब मांग रहा है। देखना हैं कि निगम इन अधूरे प्रोजेक्ट को पूरा करने के लिए क्या समयसीमा तय करता है और विकास कार्यों में हो रही देरी को लेकर क्या जवाब देता है।
