रायपुर। महादेव ऑनलाइन सट्टा ऐप मामले में केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) ने बड़ी कार्रवाई करते हुए मामले के प्रमुख आरोपी और ऐप के प्रमोटर सौरभ चंद्राकर को ओमान से भारत लाने के बाद अब रायपुर पहुंचा दिया है। बुधवार, 4 नवंबर को सौरभ चंद्राकर को रायपुर स्थित CBI की विशेष अदालत में पेश किया जाएगा। उसकी पेशी के साथ ही महादेव ऑनलाइन सट्टेबाजी मामले में आगे की कानूनी कार्रवाई तेज होने की उम्मीद है।

जानकारी के मुताबिक, ओमान से प्रत्यर्पण के बाद सौरभ चंद्राकर को पहले दिल्ली लाया गया था। यहां दिल्ली की राउज एवेन्यू कोर्ट से CBI ने दो दिन की ट्रांजिट रिमांड हासिल की। इसके बाद मंगलवार शाम CBI की टीम उसे लेकर रायपुर पहुंची। बताया गया है कि सुरक्षा कारणों से रायपुर एयरपोर्ट पर उसे मुख्य गेट के बजाय दूसरे गेट से बाहर निकाला गया और सीधे माना स्थित CBI कार्यालय ले जाया गया।

आज CBI की विशेष अदालत में होगी पेशी

सौरभ चंद्राकर को बुधवार को रायपुर की विशेष CBI अदालत में पेश किया जाना है। अदालत में पेशी के दौरान जांच एजेंसी उसकी आगे की हिरासत और पूछताछ के लिए रिमांड की मांग कर सकती है। हालांकि, इस संबंध में अंतिम फैसला अदालत की सुनवाई और कानूनी प्रक्रिया के आधार पर होगा।

CBI की जांच में महादेव ऑनलाइन बुक को एक बड़े अवैध ऑनलाइन सट्टेबाजी नेटवर्क के रूप में बताया गया है। जांच एजेंसी का आरोप है कि इस नेटवर्क का संचालन विदेश से किया जाता था और भारत के अलग-अलग राज्यों में पैनल तथा ब्रांच के माध्यम से सट्टेबाजी का कारोबार चलाया जाता था।

6000 करोड़ रुपये के कथित सट्टा घोटाले की जांच

महादेव ऑनलाइन सट्टा ऐप मामला करीब 6000 करोड़ रुपये के कथित घोटाले से जुड़ा हुआ है। जांच एजेंसियों के अनुसार, इस नेटवर्क के जरिए क्रिकेट, फुटबॉल और अन्य खेलों सहित अलग-अलग गतिविधियों पर ऑनलाइन सट्टा लगाया जाता था।

CBI का आरोप है कि सट्टेबाजी से प्राप्त रकम को कई बैंक खातों के माध्यम से अलग-अलग लेनदेन में घुमाया जाता था। इसके बाद हवाला नेटवर्क के जरिए रकम विदेश भेजे जाने की आशंका भी जांच में सामने आई है।

जांच एजेंसी ने यह भी आरोप लगाया है कि नेटवर्क को बिना किसी बाधा के संचालित करने के लिए कुछ लोक सेवकों को कथित तौर पर संरक्षण राशि दी जाती थी। इन सभी आरोपों की जांच जारी है और मामले में न्यायिक प्रक्रिया के तहत तथ्यों की पुष्टि होनी बाकी है।

ओमान से प्रत्यर्पण के बाद बढ़ी जांच की रफ्तार

सौरभ चंद्राकर को इंटरपोल के रेड कॉर्नर नोटिस के आधार पर ओमान में हिरासत में लिया गया था। इसके बाद भारतीय जांच एजेंसियों ने ओमान के अधिकारियों के साथ समन्वय कर उसके प्रत्यर्पण की प्रक्रिया पूरी की। 1 नवंबर 2026 को उसे भारत लाया गया।

CBI ने महादेव ऑनलाइन बुक मामले में दो अलग-अलग मामलों में आरोपपत्र दाखिल किए हैं। वहीं प्रवर्तन निदेशालय (ED) भी मनी लॉन्ड्रिंग के पहलू से जांच कर रहा है।

प्रत्यर्पण की शर्तों को लेकर भी उठे कानूनी सवाल

सौरभ चंद्राकर की दिल्ली अदालत में पेशी के दौरान बचाव पक्ष ने प्रत्यर्पण की शर्तों को लेकर आपत्ति जताई थी। बचाव पक्ष का तर्क था कि ओमान से प्रत्यर्पण की मंजूरी ED के मनी लॉन्ड्रिंग मामले के संदर्भ में मिली थी, इसलिए CBI मामलों में हिरासत की कानूनी सीमा पर सवाल उठते हैं।

वहीं CBI ने दोनों जांचों को आपस में जुड़ा हुआ बताते हुए अपना पक्ष रखा। अब इस मामले में रायपुर की विशेष अदालत में होने वाली सुनवाई महत्वपूर्ण मानी जा रही है।

पूछताछ में सामने आ सकते हैं कई अहम तथ्य

सौरभ चंद्राकर की रायपुर अदालत में पेशी के बाद जांच एजेंसियां उससे महादेव सट्टा नेटवर्क, कथित आर्थिक लेनदेन, विदेशों में संचालित गतिविधियों और नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों के बारे में पूछताछ कर सकती हैं।

जांच एजेंसियों की नजर इस बात पर भी रहेगी कि कथित सट्टेबाजी नेटवर्क का संचालन किन लोगों के माध्यम से होता था और इसमें रकम के लेनदेन की पूरी व्यवस्था क्या थी।

फिलहाल सभी की निगाहें रायपुर की CBI विशेष अदालत पर टिकी हैं। आज की सुनवाई और उसके बाद होने वाली कानूनी कार्रवाई से महादेव ऑनलाइन सट्टा ऐप मामले की जांच को नई दिशा मिलने की संभावना है।