रायपुर। छत्तीसगढ़ की बहुचर्चित 2524 करोड़ रुपये की सिकासार-कोडार जल परियोजना को लेकर चल रहा कानूनी विवाद एक नए मोड़ पर पहुंच गया है। टेंडर प्रक्रिया को चुनौती देने वाली याचिका को छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने खारिज कर दिया है। हालांकि अदालत की सुनवाई के दौरान यह भी स्पष्ट किया गया कि याचिकाकर्ता जिन अन्य मुद्दों को उठाना चाहता है, उन्हें मौजूदा याचिका के साथ नहीं जोड़ा जा सकता है। ऐसे मामलों के लिए अलग से जनहित याचिका (PIL) दायर करनी होगी।

हाईकोर्ट के इस निर्देश के बाद अब याचिकाकर्ता नई जनहित याचिका (PIL) दाखिल करने की तैयारी में जुट गया है। सूत्रों के अनुसार, नई PIL में टेंडर प्रक्रिया से जुड़े उन बिंदुओं को शामिल किया जाएगा, जिन पर वर्तमान याचिका में विस्तार से सुनवाई नहीं हो सकी।

अदालत ने क्या कहा?
सुनवाई के दौरान अदालत ने स्पष्ट किया कि अलग-अलग प्रकृति के विवादों और अलग-अलग प्रकार की राहतों को एक ही याचिका में शामिल नहीं किया जा सकता है। अगर किसी पक्ष को अतिरिक्त या स्वतंत्र मुद्दों पर न्यायिक परीक्षण कराना है, तो उसके लिए अलग कानूनी प्रक्रिया अपनानी होगी और स्वतंत्र जनहित याचिका दाखिल करनी होगी। इसी कारण वर्तमान याचिका के दायरे से बाहर के मुद्दों पर अदालत ने कोई टिप्पणी नहीं की और याचिकाकर्ता को आवश्यक होने पर अलग PIL दाखिल करने की स्वतंत्रता दी।

फिलहाल परियोजना पर कोई कानूनी रोक नहीं
मौजूदा याचिका खारिज होने के बाद फिलहाल सिकासार-कोडार जल परियोजना के क्रियान्वयन पर कोई न्यायिक रोक नहीं है। इससे संबंधित विभाग अब निर्माण कार्य, अनुबंधीय प्रक्रियाओं और अन्य प्रशासनिक औपचारिकताओं को आगे बढ़ा सकता है। यह परियोजना लगभग 2524 करोड़ रुपये की लागत से प्रस्तावित है और इसे प्रदेश की महत्वपूर्ण सिंचाई एवं जल संसाधन योजनाओं में शामिल किया गया है। सरकार का दावा है कि परियोजना पूरी होने के बाद क्षेत्र में सिंचाई क्षमता बढ़ेगी, जल प्रबंधन मजबूत होगा और किसानों को व्यापक लाभ मिलेगा।

नई PIL पर रहेंगी निगाहें
हालांकि वर्तमान कानूनी चुनौती समाप्त हो गई है, लेकिन मामला पूरी तरह खत्म नहीं माना जा रहा है। अब सभी की निगाहें याचिकाकर्ता द्वारा प्रस्तावित नई जनहित याचिका पर रहेंगी। यदि नई PIL दायर होती है, तो उसमें उठाए गए मुद्दों पर हाईकोर्ट स्वतंत्र रूप से विचार करेगा। ऐसे में सिकासार-कोडार परियोजना से जुड़ा कानूनी विवाद एक नए चरण में प्रवेश कर सकता है, लेकिन फिलहाल हाईकोर्ट के मौजूदा आदेश से परियोजना के आगे बढ़ने का मार्ग प्रशस्त हो गया है।