बिलासपुर।गर्मी की छुट्टियां खत्म होने को हैं। बच्चे अपने बस्ते झाड़-पोंछ कर 16 जून से स्कूल जाने की तैयारी कर रहे हैं। लेकिन जरा सोचिए, जब ये बच्चे पहले दिन स्कूल पहुंचेंगे, तो क्या पढ़ेंगे? यह सवाल इसलिए है क्योंकि बिलासपुर जिले में शिक्षा व्यवस्था का एक बड़ा 'लूपहोल' सामने आया है। नया शिक्षा सत्र शुरू होने में गिनती के छह दिन (लगभग 144 घंटे) बचे हैं और जिले के 124 संकुलों (Clusters) तक अभी तक सरकारी पाठ्यपुस्तकें ही नहीं पहुंची हैं। ऐसे में यह एक 'रेस अगेंस्ट टाइम' बन गया है कि जो काम महीनों पहले शुरू होकर खत्म हो जाना था, क्या विभाग का अमला उसे 6 दिन में पूरा कर पाएगा?

कछुआ चाल: 202 में से सिर्फ 74 संकुलों तक पहुंची किताबें

आंकड़े खुद विभागीय लेटलतीफी की गवाही दे रहे हैं। बिलासपुर जिले में कुल 1597 प्राइमरी और मिडिल स्कूल हैं, जिन्हें 202 संकुलों के जरिए किताबें बांटी जानी हैं। लेकिन पाठ्य पुस्तक निगम के डिपो से अब तक केवल 74 संकुलों तक ही किताबें पहुंच सकी हैं। बचे हुए 124 संकुलों और फिर वहां से सैकड़ों स्कूलों के बच्चों तक इन किताबों को पहुंचाना किसी 'मिशन इम्पॉसिबल' से कम नहीं है।

हाईस्कूल में किताबें तो मिलीं, पर स्कैनिंग में सिस्टम फेल

हाईस्कूल और हायर सेकेंडरी का हाल थोड़ा अलग है, लेकिन परेशानी वहां भी कम नहीं है। बिलासपुर, जीपीएम, मुंगेली, जांजगीर-चांपा सहित संभाग के 781 स्कूलों में 9वीं और 10वीं की किताबें तो पहुंचा दी गई हैं, क्योंकि स्कूलों को खुद डिपो से किताबें उठानी थीं। लेकिन यहां 'स्कैनिंग' के काम ने दम तोड़ दिया है। 8 जून को रायपुर में हुई राज्य स्तरीय समीक्षा बैठक में बिलासपुर जिले की इस सुस्ती पर आला अफसरों ने जमकर नाराजगी जताई। इसके बाद डीईओ (DEO) की नींद टूटी और उन्होंने 15 जून तक हर हाल में स्कैनिंग पूरी करने का सख्त अल्टीमेटम थमाया है।

रोज सिर्फ 2-3 गाड़ियों का सहारा, कैसे होगा बेड़ा पार?

पाठ्य पुस्तक निगम, बिलासपुर के प्रभारी शेखर सिंह ठाकुर का कहना है कि डिपो से हर दिन 2 से 3 गाड़ियों के माध्यम से किताबें भेजी जा रही हैं और 15 जून तक लक्ष्य पूरा कर लिया जाएगा।