
खाद्य विभाग का डिजिटल दावा फेल, राशन कार्ड बनवाने दफ्तरों के चक्कर काटने को मजबूर हितग्राही
रायपुर। राजधानी रायपुर में राशन वितरण व्यवस्था को हाईटेक, डिजिटल और पारदर्शी बनाने के नाम पर लॉन्च किया गया खाद्य विभाग का 'स्मार्ट पीडीएस 2.0' पोर्टल खुद ही विभागीय सुस्ती का शिकार हो गया है। विभाग ने बड़े जोर-शोर से दावा किया था कि नई व्यवस्था के तहत नए राशन कार्ड बनाने, पुराने कार्ड के नवीनीकरण और परिवार के सदस्यों के नाम जोड़ने-घटाने जैसे काम अब झटपट होंगे। लेकिन जमीनी हकीकत इन तमाम दावों की पोल खोल रही है। वर्तमान स्थिति यह है कि शहर में 50 से अधिक आवेदन पिछले कई दिनों से संबंधित अधिकारियों के लॉगिन में अटके पड़े हैं। आवेदकों ने सभी जरूरी दस्तावेज च्वाइस सेंटरों के माध्यम से ऑनलाइन जमा कर दिए हैं, इसके बावजूद 30 दिन की अनिवार्य समय-सीमा बीत जाने के बाद भी उन्हें कार्ड नसीब नहीं हुआ है।
पोर्टल पर सिर्फ 'अंडर प्रोसेस' बता रहा सिस्टम
छत्तीसगढ़ में नए राशन कार्ड के आवेदनों के निराकरण के लिए अधिकतम 30 दिन की डेडलाइन तय है। नियम के तहत इस अवधि में दस्तावेजों का सत्यापन और स्वीकृति की प्रक्रिया पूरी हो जानी चाहिए। लेकिन ऑनलाइन व्यवस्था के भरोसे बैठे हितग्राहियों को केवल मायूसी हाथ लग रही है। आवेदक जब अपना ऑनलाइन स्टेटस चेक करते हैं, तो उन्हें सिर्फ 'प्रक्रिया जारी है' (अंडर प्रोसेस) का एक ही रटा-रटाया मैसेज स्क्रीन पर नजर आता है। इस लेटलतीफी का सीधा खामियाजा शहर के उन गरीब और मध्यमवर्गीय परिवारों को भुगतना पड़ रहा है, जिन्हें हर महीने मिलने वाले सरकारी राशन की सख्त दरकार है। कार्ड न होने के कारण उन्हें बाजार से महंगे दामों पर अनाज खरीदना पड़ रहा है।
लापरवाही की हद, रिश्ते के कॉलम में बेटे को बना दिया पोता
विभागीय लापरवाही का स्तर यह है कि डेटा एंट्री में भारी गड़बड़ियां की जा रही हैं। एक ताजा मामले में आवेदक के राशन कार्ड में माता-पिता के नाम के साथ रिश्ते वाले कॉलम में 'बेटे' की जगह 'पोता' दर्ज कर दिया गया है। इस त्रुटि को सुधारने के लिए युवक ने ऑनलाइन आवेदन लगाया था। हफ्तों बीत जाने के बाद भी पोर्टल पर कोई संशोधन नहीं हुआ। इस एक छोटी सी गलती के कारण वह युवक अब श्रम कार्ड से जुड़ी दूसरी सरकारी योजना का फॉर्म नहीं भर पा रहा है। अपनी ही पहचान साबित करने के लिए वह रोजाना अफसरों के केबिन के बाहर खड़ा रहने को मजबूर है।
ज्वाइस सेंटर से लेकर विभाग तक भटक रहे लोग
खाद्य विभाग के दफ्तरों में रोजाना ऐसे दर्जनों लोग पहुंच रहे हैं, जिन्होंने पोर्टल के दावों पर भरोसा कर लिया था। कन्या शहीद भगत सिंह वार्ड (वार्ड नंबर 2) की निवासी अवतार कौर का मामला भी इसी सिस्टम की पोल खोलता है। अवतार कौर ने बताया कि उन्होंने च्वाइस सेंटर के माध्यम से अपने नए राशन कार्ड के लिए आवेदन किया था। उन्हें उम्मीद थी कि नई ऑनलाइन व्यवस्था से काम जल्दी होगा और राशन मिलने लगेगा। आज 30 दिन से ज्यादा का वक्त गुजर चुका है, सारे दस्तावेज सही होने के बावजूद उनका राशन कार्ड अब तक जनरेट नहीं हुआ है। ऑनलाइन आवेदन करने के बाद भी उन्हें दफ्तरों के चक्कर काटने पड़ रहे हैं।
क्या है नियम और क्या है हकीकत?
- योजना: स्मार्ट पीडीएस 2.0 (राशन कार्ड अपडेशन, सुधार और निर्माण)।
- विभागीय दावा: आवेदन के तुरंत बाद डिजिटल तरीके से सत्यापन और त्वरित स्वीकृति।
- सरकारी नियम: अधिकतम 30 दिनों के भीतर आवेदन का निराकरण करना अनिवार्य।
शहर भर में 50 से ज्यादा फॉर्म अधिकारियों की आईडी में पेंडिंग। महीनों से सिर्फ 'प्रक्रिया जारी है' का मैसेज।
"पोर्टल अभी शुरू हो गया है। हमारे पास जो भी ऑनलाइन आवेदन प्राप्त हो रहे हैं, उनकी नियमित रूप से समीक्षा की जा रही है। आवेदनों में जो भी तकनीकी समस्याएं सामने आ रही हैं, उनका निराकरण किया जा रहा है।"
भूपेंद्र मिश्रा, खाद्य नियंत्रक अधिकारी, रायपुर