अंबिकापुर। अंबिकापुर में सरकारी उपयोग से जुड़ी रिंग बांध की जमीन को कथित फर्जी दस्तावेजों के सहारे निजी नाम पर दर्ज कराने का मामला सामने आया है। प्रतीक्षा बस स्टैंड के पास स्थित इस जमीन के नामांतरण में गड़बड़ी की शिकायत के बाद प्रशासन ने जांच कराई। मामला गंभीर पाए जाने पर सरगुजा कलेक्टर ने जमीन खरीदने वाले आजाद इराकी और जमीन बेचने से जुड़े लोगों के खिलाफ FIR दर्ज कराने के निर्देश दिए हैं। प्रशासनिक जांच में कथित फर्जी मृत्यु प्रमाण पत्र के जरिए जमीन के रिकॉर्ड में बदलाव किए जाने का मामला सामने आया है। अब पुलिस कार्रवाई के जरिए दस्तावेजों की सत्यता और इस पूरे प्रकरण में शामिल लोगों की भूमिका की जांच की जाएगी।

फर्जी मृत्यु प्रमाण पत्र के सहारे जमीन हड़पने का आरोप
जानकारी के अनुसार, रिंग बांध की जमीन पहले एक आदिवासी व्यक्ति के नाम पर दर्ज थी। आरोप है कि जमीन के मूल मालिक का फर्जी मृत्यु प्रमाण पत्र तैयार कराया गया। इसी दस्तावेज के आधार पर राजस्व रिकॉर्ड में बदलाव कर जमीन आजाद इराकी के नाम दर्ज करा दी गई। यदि जांच में आरोपों की पुष्टि होती है, तो यह मामला दस्तावेजों में हेराफेरी और जमीन के कथित अवैध हस्तांतरण से जुड़ा गंभीर प्रकरण बन सकता है।

SDM की जांच में दस्तावेजों की गड़बड़ी आई सामने
शिकायत मिलने के बाद प्रशासन ने मामले की जांच कराई। SDM स्तर पर हुई जांच में जमीन से जुड़े दस्तावेजों में अनियमितता और कथित फर्जी दस्तावेजों के इस्तेमाल की बात सामने आई। जांच रिपोर्ट के आधार पर प्रशासन ने आगे आपराधिक कार्रवाई की प्रक्रिया शुरू करने के निर्देश दिए हैं।

कलेक्टर ने SP को पत्र लिखकर FIR के दिए निर्देश
जांच के निष्कर्षों के बाद सरगुजा कलेक्टर ने पुलिस अधीक्षक को पत्र भेजा है। इसमें जमीन खरीदने वाले आजाद इराकी और जमीन बेचने वाले संबंधित लोगों के खिलाफ FIR दर्ज करने के निर्देश दिए गए हैं। अब पुलिस की जांच में जमीन के दस्तावेजों, नामांतरण की प्रक्रिया और संबंधित लोगों की भूमिका की पड़ताल की जाएगी।

तत्कालीन सरपंच-सचिव की भूमिका भी जांच के दायरे में
इस कथित जमीन फर्जीवाड़े में तत्कालीन सरपंच और सचिव की भूमिका पर भी सवाल उठे हैं। प्रशासनिक जांच के दौरान उनकी भूमिका संदेह के घेरे में बताई गई है। पुलिस जांच में यह स्पष्ट होना बाकी है कि दस्तावेज तैयार करने और जमीन के रिकॉर्ड में बदलाव कराने की प्रक्रिया में किसकी क्या भूमिका थी। फिलहाल, FIR दर्ज करने के निर्देश के बाद मामले में पुलिस की कार्रवाई अहम होगी। जांच पूरी होने और दस्तावेजों की पुष्टि के बाद ही कथित फर्जीवाड़े की पूरी तस्वीर साफ हो सकेगी।