
रायपुर। सोचिए, बड़े अफसर सस्पेंड हैं। मुख्यालय में आराम से बैठे हैं। सरकार उनको 75 फीसदी पगार भी दे रही है। उनका काम सिर्फ इतना है कि दफ्तर आओ, हाजिरी लगाओ और चलते बनो। और उधर फील्ड का हाल क्या है? पूरा का पूरा आबकारी विभाग जूनियरों के हाथ में सौंप दिया गया है। नतीजा आपके सामने है। धड़ल्ले से नकली शराब, फर्जी होलोग्राम और दूसरे राज्यों से माल की सप्लाई का खेल चल रहा है। कार्रवाई पुलिस कर रही है, और आबकारी महकमा चैन की नींद सो रहा है। बिलासपुर-रायपुर में तो घोटाला छिपाने के चक्कर में शराब की दुकान तक फूंक दी गई।
आखिर दिक्कत कहां है?
नियम कहता है कि बड़े जिलों की कमान उपायुक्त (डिप्टी कमिश्नर) के हाथ में होनी चाहिए और छोटे जिलों में सहायक आयुक्त बैठने चाहिए। पर जमीनी हकीकत कुछ और है। विभाग के पास इस वक्त सिर्फ एक उपायुक्त और एक सहायक आयुक्त ही काम करने के लिए बचे हैं। बाकी बड़े साहब सस्पेंड चल रहे हैं। करीब 21 निलंबित अफसर मुख्यालय में अटैच हैं।
अब कुर्सी खाली तो रहेगी नहीं। इसलिए हाल ही में नियुक्ति पाने वाले जिला आबकारी अधिकारियों को जिलों का जिम्मा दे दिया गया। पुराना तजुर्बा है नहीं, ऐसे में माफियाओं की भनक इन तक पहुंच ही नहीं पाती।
मसलन, रायपुर जैसा भारी-भरकम जिला हमेशा उपायुक्त के पास रहता था। पहली बार ऐसा हुआ है कि यहां सहायक आयुक्त को प्रभार मिला है। दुर्ग, राजनांदगांव, बिलासपुर, रायगढ़, जांजगीर और कोरबा जैसे जिलों का बॉस सहायक आयुक्त होना चाहिए। पर इन सभी जगहों पर जिला आबकारी अधिकारी से काम लिया जा रहा है। बेमेतरा, कवर्धा, महासमुंद, सुकमा, जीपीएम और मनेंद्रगढ़ में जिला आबकारी अधिकारी की जगह सहायक जिला आबकारी अधिकारी जिले चला रहे हैं।
एक महीने में 4 बड़े मामले, पुलिस ने पकड़े
कांकेर: भानुप्रतापपुर में पुलिस और आबकारी की फ्लाइंग स्क्वाड ने छापा मारा। मौके से 4,409 खाली बोतलें, पौवे, 3,380 नकली ढक्कन और 105 होलोग्राम स्टीकर मिले। इस मामले में एक सहायक जिला आबकारी अधिकारी और एक सब-इंस्पेक्टर नपे।
महासमुंद: सरायपाली में पुलिस ने बड़े सिंडिकेट का भंडाफोड़ किया। एक कार से अवैध शराब पकड़ी, फिर जांच में पूरा कंटेनर ट्रक हाथ लग गया। इसमें 3,229 लीटर अंग्रेजी शराब, नकली होलोग्राम और फर्जी छत्तीसगढ़ स्टेट लेबल मिले। 7 लोग धरे गए।
सूरजपुर: कुमदा बस्ती में तो घर के भीतर ही मिलावट का सेंटर चल रहा था। 2,500 नकली ढक्कन, 200 रैपर और खाली बोतलों का ढेर मिला। मैकडॉवल नंबर वन, रॉयल स्टैग और गोवा जैसे ब्रांड्स की नकली पैकिंग हो रही थी।
राजनांदगांव: डोंगरगढ़ इलाके में पुलिस ने बाकायदा एक डिजिटल प्रिंटिंग यूनिट पकड़ ली। कंप्यूटर और प्रिंटर से नकली लेबल और होलोग्राम छप रहे थे। 3,000 फर्जी लेबल और 3,000 होलोग्राम मिले। जम्मू व्हिस्की के नाम पर फर्जीवाड़ा चल रहा था। 3 लोग गिरफ्तार हुए।
अफसरों की भारी कमी
विभाग का सेटअप देखें तो उपायुक्त के 10 पद हैं, 5 खाली हैं, 4 सस्पेंड हैं, काम सिर्फ 1 कर रहा है। सहायक आयुक्त के 15 पद में 4 खाली, 10 निलंबित हैं, बचा सिर्फ 1। जिला आबकारी अधिकारी के 49 पद हैं, जिनमें 42 काम कर रहे हैं (3 निलंबित)। सहायक जिला आबकारी अधिकारी के 81 पदों में 70 लोग फील्ड में हैं।
कुल मिलाकर, सीनियर अफसर बिना काम के मुख्यालय में तगड़ी पगार उठा रहे हैं और फील्ड पर जूनियरों के राज में नकली शराब का नेटवर्क अपना काम कर रहा है।