
गुरुग्राम। हरियाणा विधानसभा चुनाव से पहले गुरुग्राम में राजनीतिक माहौल गरमा गया है। भारतीय जनता पार्टी (BJP) के जिला कार्यालय 'गुरुकमल' के बाहर कांग्रेस द्वारा सुंदरकांड पाठ आयोजित करने के ऐलान के बाद प्रशासन सतर्क हो गया है। संभावित कानून-व्यवस्था की स्थिति को देखते हुए जिला प्रशासन ने भाजपा कार्यालय के 300 मीटर के दायरे में धारा 144 लागू कर दी है। वहीं, पुलिस ने कांग्रेस के दोनों जिलाध्यक्षों को नोटिस जारी कर शांति व्यवस्था बनाए रखने की हिदायत दी है, जिसके बाद राजनीतिक बयानबाजी तेज हो गई है।
कांग्रेस ने कहा- धार्मिक कार्यक्रम रोकना लोकतांत्रिक अधिकारों का हनन
सेक्टर-40 थाना पुलिस की ओर से जारी नोटिस के बाद कांग्रेस नेताओं ने प्रशासन की कार्रवाई पर कड़ी आपत्ति जताई है। कांग्रेस के ग्रामीण जिलाध्यक्ष वर्धन राव ने सोशल मीडिया पर जारी वीडियो संदेश में कहा कि भगवान श्रीराम और हनुमान जी का स्मरण करना तथा सुंदरकांड का पाठ करना किसी भी नागरिक का अधिकार है। उनका आरोप है कि विपक्ष के कार्यक्रम को रोकने के लिए प्रशासनिक दबाव बनाया जा रहा है। उन्होंने इसे लोकतांत्रिक अधिकारों का हनन बताते हुए कहा कि तय कार्यक्रम पूर्व घोषित समय के अनुसार आयोजित करने का प्रयास किया जाएगा।
BJP का पलटवार- यह आस्था नहीं, राजनीतिक दिखावा
कांग्रेस के आरोपों पर भाजपा ने भी तीखी प्रतिक्रिया दी है। पार्टी के शहरी जिलाध्यक्ष सर्वप्रिय त्यागी ने कहा कि भाजपा कार्यालय के दरवाजे सभी के लिए खुले हैं। अगर कांग्रेस नेताओं की मंशा वास्तव में धार्मिक आयोजन की है तो वे कार्यालय परिसर के भीतर आकर सुंदरकांड पाठ कर सकते हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस धार्मिक कार्यक्रम की आड़ में राजनीतिक माहौल बनाने और मीडिया की सुर्खियां बटोरने का प्रयास कर रही है।
सुरक्षा के कड़े इंतजाम, पुलिस और प्रशासन अलर्ट
स्थिति को देखते हुए आज सुबह से भाजपा कार्यालय और आसपास के पूरे इलाके में सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी गई है। कई थानों की पुलिस फोर्स, दंगा नियंत्रण वाहन और अतिरिक्त सुरक्षा बल तैनात किए गए हैं। प्रशासन ने 300 मीटर के दायरे में किसी भी प्रकार के प्रदर्शन, जुलूस या भीड़ जुटाने पर रोक लगा दी है। इसके साथ ही खुफिया एजेंसियां और पुलिस दोनों दलों की गतिविधियों तथा सोशल मीडिया पर प्रसारित हो रही सूचनाओं पर भी लगातार नजर बनाए हुए हैं। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि चुनावी माहौल में यह मुद्दा सियासी बहस को और तेज कर सकता है। फिलहाल, प्रशासन की प्राथमिकता कानून-व्यवस्था बनाए रखना है, जबकि दोनों प्रमुख दल अपने-अपने रुख पर कायम नजर आ रहे हैं।