रायपुर (NJVDesk) छत्तीसगढ़ के वन महकमे में इन दिनों हरा सोना (तेंदूपत्ता) राख हो रहा है और अफसरों की कुर्सियां हिल रही हैं। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय की सख्ती के बाद वन मंत्री केदार कश्यप ने बड़ा एक्शन लेते हुए बीजापुर के डीएफओ (IFS) रमेश कुमार जांगड़े को तत्काल प्रभाव से हटा दिया है। उन्हें पीसीसीएफ दफ्तर, रायपुर अटैच कर आईएफएस जाधव सागर रामचंद्र को बीजापुर की कमान सौंपी गई है।

लेकिन, इस प्रशासनिक सख्ती के बीच वन विभाग के सिस्टम का बड़ा फेल्योर सामने आया है। इधर राजधानी से बीजापुर डीएफओ पर कार्रवाई का आदेश निकला, और उधर जगदलपुर के सरगीपाल सरकारी डिपो में लापरवाही की नई आग भड़क उठी।

 

बीजापुर: डीएफओ पर गिरी गाज, लेकिन इन 4 'जिम्मेदारों' पर मेहरबानी क्यों?

 

बीजापुर के इटपाल में 25 मई को निजी गोदाम में आग लगने से 10 करोड़ रुपए का तेंदूपत्ता जल गया था। मीडिया में खबरें आने के बाद सरकार ने जिले के वन मुखिया (DFO) को तो हटा दिया, लेकिन विभागीय गलियारों में सवाल गूंज रहा है कि ग्राउंड जीरो पर तैनात वो 4 अफसर कैसे बच गए, जिनकी ये सीधी जिम्मेदारी थी?

  •  1. दीक्षा बर्मन (रेंजर, सामान्य) गोदाम की मुख्य नियंत्रणकर्ता। पत्तों को सुरक्षित रखना और लोडिंग इन्हीं का काम था।
  •  2. सुभान्स मांझी (रेंजर, बफर जोन): दीक्षा के साथ संयुक्त रूप से गोदाम नियंत्रण की सीधी जवाबदेही।
  •  3. दीनानाथ गोसाई (गोदाम प्रभारी): अग्निशमन यंत्रों के रखरखाव और पत्तों को नुकसान से बचाने का मुख्य जिम्मा।
  •  4. डमरू धर बघेल (डिप्टी रेंजर): गोदाम की पल-पल की निगरानी और सुरक्षा का जिम्मा।

   आखिर करोड़ों के राजस्व वाले गोदाम को रामभरोसे छोड़ने वाले इन मैदानी अफसरों पर विभाग का डंडा कब चलेगा?

एक्शन के बीच जगदलपुर में भी स्वाहा हो गया सालभर पुराना स्टॉक

बीजापुर की राख अभी ठंडी भी नहीं हुई थी कि बुधवार को बस्तर मुख्यालय से सटे सरगीपाल डिपो में भीषण आग लग गई। यहां सुकमा से लाया गया एक साल पुराना करीब 1000 बोरा तेंदूपत्ता जलकर खाक हो गया। यह स्टॉक राजनांदगांव के बड़े ठेकेदार विजय कोठारी और रमेश पटेल का बताया जा रहा है।

बस्तर डीएफओ उत्तम गुप्ता का कहना है कि आग अंदर से ही भड़की है, जो प्रथम दृष्टया वहां मौजूद लोगों की घोर लापरवाही का नतीजा है। एएसपी माहेश्वर नाग के अनुसार पुलिस ने आगजनी की रिपोर्ट दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।

साजिश या महज हादसा?

वन मंत्री केदार कश्यप ने दो टूक कहा है कि तेंदूपत्ता हजारों आदिवासी परिवारों की आजीविका का आधार है, इससे खिलवाड़ बर्दाश्त नहीं होगा। लेकिन बैक-टू-बैक हो रही इन घटनाओं ने कई सुलगते सवाल खड़े कर दिए हैं। क्या बीमा क्लेम या किसी गहरी साजिश के तहत तेंदूपत्ते को निशाना बनाया जा रहा है? बड़ा सवाल यह है कि क्या बीजापुर के मैदानी अमले और बस्तर के जिम्मेदार अफसरों पर भी अब गाज गिरेगी या मामला ठंडे बस्ते में डाल दिया जाएगा?