अयोध्या। राम मंदिर में चढ़ावे की कथित चोरी का मामला सामने आने के बाद लगातार नए खुलासे हो रहे हैं। अब जानकारी सामने आई है कि इस पूरे प्रकरण का पहला सुराग मंदिर परिसर के शौचालय में पड़े नोटों से मिला था। इसके बाद शुरू हुई आंतरिक पड़ताल और पुलिस कार्रवाई में महज 17 घंटे के भीतर विभिन्न स्थानों से 81 लाख 19 हजार रुपये नकद बरामद किए गए। हालांकि, यह अब भी स्पष्ट नहीं हो सका है कि मंदिर के चढ़ावे में कथित हेराफेरी कब से चल रही थी और कुल कितनी राशि का गबन हुआ।

उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा गठित विशेष जांच दल (एसआईटी) अब इस पूरे मामले की गहन जांच कर रही है। माना जा रहा है कि आरोपियों से पूछताछ, इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्यों और वित्तीय रिकॉर्ड की जांच के बाद ही पूरे नेटवर्क और कथित गबन की वास्तविक तस्वीर सामने आ सकेगी।

टॉयलेट में मिले नोटों से खुली चोरी की परत
सूत्रों के अनुसार, सबसे पहले मंदिर परिसर के शौचालय में करीब 40 हजार रुपये पड़े मिले थे। गेट पर तैनात कर्मचारी की नजर जब इन नोटों पर पड़ी तो उसने तत्काल इसकी सूचना तत्कालीन ट्रस्ट महासचिव चंपत राय को दी। सूचना मिलते ही चंपत राय मंदिर पहुंचे और ट्रस्ट पदाधिकारियों तथा सुरक्षा अधिकारियों को पूरे मामले से अवगत कराया। इसके बाद आंतरिक स्तर पर जांच शुरू हुई और मामला पुलिस तक पहुंचा।

4 जून को सामने आया मामला, फिर शुरू हुई कार्रवाई
बताया जाता है कि 4 जून 2026 को मामला औपचारिक रूप से संज्ञान में आया। शुरुआती जांच के दौरान संदिग्ध कर्मचारियों की सभी की मौजूदगी में तलाशी ली गई। इसी कार्रवाई के बाद चोरी की रकम की बरामदगी का सिलसिला शुरू हुआ और जांच तेजी से आगे बढ़ी।

17 घंटे में कई जिलों से बरामद हुई नकदी
उच्च पदस्थ सूत्रों के अनुसार, ट्रस्ट और पुलिस के समन्वय से सिर्फ 17 घंटे के भीतर आरोपियों और उनके परिचितों के ठिकानों पर कार्रवाई की गई। अयोध्या के अलावा बहराइच के नानपारा, प्रतापगढ़ के कुंडा तथा अन्य स्थानों से नकदी बरामद की गई। जांच के दौरान आरोपी रमाशंकर मिश्रा, अविनाश शुक्ला, अनुकल्प मिश्रा, उसके संबंधी लवकुश तथा नाका निवासी करुणेश की निशानदेही पर अलग-अलग स्थानों से कुल 81 लाख 19 हजार रुपये बरामद किए गए। सूत्रों का दावा है कि प्रारंभिक रिकवरी अभियान में ट्रस्ट के वरिष्ठ पदाधिकारी और पुलिस अधिकारी लगातार सक्रिय रहे।

21 सदस्यीय टीम ने संभाला मोर्चा
बताया जाता है कि शुरुआती जांच और धनराशि की बरामदगी के लिए करीब 21 सदस्यीय टीम बनाई गई थी। ट्रस्ट के पदाधिकारियों, प्रशासनिक अधिकारियों और पुलिस ने मिलकर पूरे घटनाक्रम की निगरानी की। घटना की जानकारी मिलने के बाद तत्कालीन महासचिव चंपत राय लंबे समय तक मंदिर परिसर में मौजूद रहे और कथित तौर पर रिकवरी अभियान की निगरानी करते रहे। सूत्रों का यह भी दावा है कि जब जांच का दायरा बढ़ा और आरोपियों पर दबाव बढ़ा तो कुछ आरोपियों के परिजन स्वयं चोरी की गई कथित रकम लेकर मंदिर पहुंचे और उसे ट्रस्ट के सुपुर्द कर दिया। हालांकि, इस संबंध में ट्रस्ट या पुलिस की ओर से कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई है।

एसआईटी जांच से खुल सकते हैं कई राज
फिलहाल, एसआईटी पूरे मामले की जांच कर रही है। चूंकि मंदिर परिसर के सीसीटीवी कैमरों का रिकॉर्ड केवल 45 दिनों तक ही उपलब्ध रहता है, इसलिए उससे पहले की गतिविधियों की पुष्टि करना चुनौतीपूर्ण माना जा रहा है। ऐसे में जांच एजेंसियों की नजर आरोपियों के बयान, बैंक लेनदेन, डिजिटल साक्ष्यों और अन्य दस्तावेजी प्रमाणों पर है। अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि कथित चढ़ावा चोरी कब से चल रही थी, इसमें कितने लोग शामिल थे और कुल कितनी राशि का गबन हुआ। इन सभी सवालों के जवाब एसआईटी की अंतिम जांच रिपोर्ट और पुलिस विवेचना के बाद ही स्पष्ट हो सकेंगे।