वॉशिंगटन। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की नई टैरिफ नीति को लेकर अमेरिका में बड़ा कानूनी विवाद खड़ा हो गया है। ट्रंप प्रशासन द्वारा 1974 के ट्रेड एक्ट की धारा 301 के तहत कई देशों से होने वाले आयात पर नया शुल्क (टैरिफ) लागू किए जाने के खिलाफ 25 अमेरिकी राज्यों ने अमेरिकी अंतरराष्ट्रीय व्यापार न्यायालय (U.S. Court of International Trade) का दरवाजा खटखटाया है। राज्यों का आरोप है कि सरकार सुप्रीम कोर्ट के पहले के फैसले की भावना को दरकिनार कर नए तरीके से आयात पर अतिरिक्त कर थोप रही है।

सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद बदला कानूनी रास्ता
इससे पहले ट्रंप प्रशासन ने International Emergency Economic Powers Act (IEEPA) के तहत कई देशों से आयात होने वाले सामान पर व्यापक टैरिफ लगाए थे। हालांकि, अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट ने उस व्यवस्था पर सवाल उठाते हुए सरकार को आयातकों से वसूले गए शुल्क लौटाने का आदेश दिया था। इसके बाद अस्थायी 10% टैरिफ की अवधि समाप्त होने पर प्रशासन ने Trade Act, 1974 की Section 301 के तहत नई टैरिफ व्यवस्था लागू कर दी।

भारत समेत कई देशों पर लागू हुआ नया टैरिफ
नई नीति के तहत भारत, यूरोपीय संघ (EU) सहित लगभग 60 देशों से आयात होने वाले उत्पादों पर 10% से 12.5% तक अतिरिक्त टैरिफ लगाया गया है।विशेषज्ञों का मानना है कि इसका असर वैश्विक व्यापार, आयात लागत और कई उद्योगों पर पड़ सकता है।

25 राज्यों ने क्यों दायर की याचिका?
मुकदमे का नेतृत्व कर रहीं न्यूयॉर्क की अटॉर्नी जनरल लेटिशिया जेम्स ने आरोप लगाया कि ट्रंप प्रशासन सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बावजूद नए कानूनी प्रावधान का इस्तेमाल कर अमेरिकी उपभोक्ताओं और कारोबारियों पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ डाल रहा है। राज्यों का कहना है कि राष्ट्रपति के पास बिना स्पष्ट संसदीय अनुमति के व्यापक स्तर पर टैरिफ लागू करने का संवैधानिक अधिकार नहीं है।

99% आयात पर पड़ सकता है असर
याचिका में दावा किया गया है कि नया टैरिफ उन देशों पर लागू किया गया है, जिनसे अमेरिका का करीब 99 प्रतिशत आयात होता है। राज्यों का आरोप है कि Section 301 का उद्देश्य विशिष्ट अनुचित व्यापारिक गतिविधियों पर कार्रवाई करना है, न कि व्यापक रूप से सभी आयातित वस्तुओं पर शुल्क लगाना।

व्हाइट हाउस ने किया फैसला का बचाव
विवाद के बीच व्हाइट हाउस ने सरकार के फैसले को पूरी तरह कानूनी बताया है। व्हाइट हाउस के प्रवक्ता कुश देसाई ने कहा कि कई देश बंधुआ मजदूरी (Forced Labour) से बने उत्पादों के व्यापार पर प्रभावी कार्रवाई नहीं कर रहे हैं। ऐसे में अमेरिकी उद्योगों और श्रमिकों के हितों की रक्षा के लिए यह कदम जरूरी है। प्रशासन का दावा है कि Trade Act की Section 301 के तहत लगाया गया नया टैरिफ पूरी तरह कानून के अनुरूप है।