
उज्जैन। मध्य प्रदेश के उज्जैन शहर में प्रसिद्ध खड़े हनुमान मंदिर का मामला एक बार फिर सुर्खियों में आ गया है। मंदिर का मुख्य ढांचा हटाए जाने के करीब डेढ़ महीने बाद प्रशासनिक अधिकारियों और भोपाल से पहुंची तकनीकी विशेषज्ञों की टीम ने मंगलवार देर रात मंदिर में स्थापित प्रतिमा और उसके बेस की जांच की। इस दौरान आधुनिक इलेक्ट्रॉनिक मशीनों से प्रतिमा की स्कैनिंग कर उसकी गहराई और संरचनात्मक स्थिति का पता लगाने का प्रयास किया गया। हालांकि, जांच के दौरान मशीनों में तकनीकी खराबी आने की जानकारी सामने आई है। इसके बाद सोशल मीडिया पर तरह-तरह की चर्चाएं शुरू हो गईं।
आधी रात को मंदिर पहुंची प्रशासनिक टीम
जानकारी के मुताबिक, सोमवार और मंगलवार की दरमियानी रात करीब 12:30 बजे एसडीएम लक्ष्मीनारायण गर्ग के नेतृत्व में प्रशासनिक टीम मंदिर पहुंची। इस टीम में उज्जैन नगर निगम, पुलिस प्रशासन के अधिकारी और भोपाल से आई आठ सदस्यीय तकनीकी विशेषज्ञों की टीम शामिल थी।
विशेषज्ञों ने मंदिर में स्थापित खड़े हनुमान जी की प्रतिमा और उसके आधार यानी बेस की आधुनिक उपकरणों से स्कैनिंग की। जांच का मुख्य उद्देश्य प्रतिमा के नीचे बने आधार की वास्तविक गहराई और उसकी संरचनात्मक स्थिति का पता लगाना बताया जा रहा है।
जांच के दौरान मशीनों में आई तकनीकी खराबी
प्रतिमा की गहराई मापने के लिए विशेष इलेक्ट्रॉनिक मशीनों और तकनीकी उपकरणों का इस्तेमाल किया गया। बताया जा रहा है कि जांच प्रक्रिया के दौरान मशीन में खराबी आ गई और कुछ उपकरणों ने काम करना बंद कर दिया। इससे जांच प्रभावित हुई।
हालांकि, मशीनों में खराबी आने की वास्तविक वजह क्या थी, इसे लेकर प्रशासन या तकनीकी विशेषज्ञों की ओर से कोई आधिकारिक स्पष्टीकरण सामने नहीं आया है। सोशल मीडिया पर इस घटना को लेकर कुछ लोग इसे चमत्कार से जोड़कर चर्चा कर रहे हैं। हालांकि, तकनीकी खराबी को चमत्कार बताने की पुष्टि नहीं हुई है।
डेढ़ महीने पहले हटाया गया था मंदिर का मुख्य ढांचा
दरअसल, उज्जैन में कंठाल चौराहे से गोपाल मंदिर तक सड़क चौड़ीकरण का काम किया जा रहा है। इस परियोजना की जद में 172 मकान-दुकान और करीब 10 धार्मिक स्थल आए थे। नगर निगम प्रशासन ने चौड़ीकरण के लिए संबंधित निर्माणों को हटाने और शिफ्ट करने की कार्रवाई की थी।
इसी कार्रवाई के तहत करीब डेढ़ महीने पहले प्रसिद्ध खड़े हनुमान मंदिर का मुख्य ढांचा भी हटा दिया गया था। हालांकि, मंदिर में स्थापित प्रतिमा को नहीं हटाया जा सका था। इसके बाद से ही प्रतिमा के आधार और उसकी स्थिति को लेकर सवाल उठते रहे हैं।
आधी रात को जांच कराने पर हिंदू संगठनों की आपत्ति
मंगलवार देर रात हुई जांच का वीडियो और तस्वीरें सोशल मीडिया पर सामने आने के बाद स्थानीय स्तर पर भी नाराजगी देखने को मिली। विश्व हिंदू परिषद-बजरंग दल के जिला अध्यक्ष राजेश आंजना ने आधी रात को जांच किए जाने पर आपत्ति जताई। वहीं भाजपा पार्षद शिवेंद्र तिवारी ने भी कार्रवाई के समय पर सवाल उठाए।
उनका कहना है कि धार्मिक स्थल पर इस तरह की तकनीकी जांच दिन के समय भी कराई जा सकती थी। ऐसे में प्रशासन को आधी रात का समय चुनने की जरूरत क्यों पड़ी, यह स्पष्ट किया जाना चाहिए।
तकनीकी रिपोर्ट के बाद स्पष्ट होगी स्थिति
फिलहाल प्रतिमा की गहराई, उसके बेस की संरचनात्मक स्थिति और मशीनों में आई खराबी को लेकर आधिकारिक रिपोर्ट सामने नहीं आई है। प्रशासन ने भी जांच के उद्देश्य और उसके निष्कर्षों को लेकर विस्तृत जानकारी सार्वजनिक नहीं की है।
अब सभी की नजर तकनीकी विशेषज्ञों की रिपोर्ट और प्रशासन के अगले कदम पर टिकी है। जांच के नतीजे सामने आने के बाद ही स्पष्ट हो सकेगा कि प्रतिमा का आधार कितना गहरा है और सड़क चौड़ीकरण के बीच मंदिर की प्रतिमा को लेकर आगे क्या निर्णय लिया जाएगा।