देहरादून। मध्य प्रदेश के कान्हा टाइगर रिजर्व में कैनाइन डिस्टेंपर वायरस (CDV) से बाघों की मौत के बाद अब उत्तराखंड में भी वन विभाग और पशुपालन विभाग अलर्ट मोड पर आ गए हैं। राज्य सरकार ने वन्यजीवों की सुरक्षा को लेकर विशेष निगरानी अभियान शुरू कर दिया है। कार्बेट और राजाजी टाइगर रिजर्व समेत बाघों की अधिक संख्या वाले 12 वन प्रभागों में हाई अलर्ट जारी किया गया है। खास तौर पर जंगलों से सटे गांवों और आबादी क्षेत्रों में पालतू एवं आवारा कुत्तों के टीकाकरण पर जोर दिया जा रहा है ताकि संक्रमण को फैलने से रोका जा सके।

वन अधिकारियों के अनुसार, फिलहाल उत्तराखंड में किसी भी बाघ या गुलदार में सीडीवी संक्रमण की पुष्टि नहीं हुई है, लेकिन संभावित खतरे को देखते हुए एहतियाती कदम तेज कर दिए गए हैं। पिछले वन्यजीव आंकड़ों के मुताबिक राज्य में करीब 560 बाघ और 3,115 गुलदार मौजूद हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि जंगलों के आसपास घूमने वाले संक्रमित कुत्ते इस वायरस के सबसे बड़े वाहक माने जाते हैं। यदि कोई बाघ या गुलदार संक्रमित कुत्ते का शिकार करता है, तो वायरस तेजी से वन्यजीवों में फैल सकता है।

कार्बेट टाइगर रिजर्व और राजाजी टाइगर रिजर्व में फील्ड स्टाफ को विशेष निगरानी के निर्देश दिए गए हैं। वन विभाग की टीमें जंगलों के आसपास के क्षेत्रों में सर्वे कर रही हैं और पशुपालन विभाग के सहयोग से बड़े स्तर पर डॉग वैक्सीनेशन अभियान चलाने की तैयारी की जा रही है। अधिकारियों ने बताया कि किसी भी वन्यजीव की संदिग्ध मौत या असामान्य व्यवहार की स्थिति में तत्काल मेडिकल जांच और सैंपलिंग की जाएगी। इसके साथ ही वन्यजीवों की गतिविधियों पर नजर रखने के लिए अतिरिक्त पेट्रोलिंग भी बढ़ा दी गई है।

विशेषज्ञों के मुताबिक कैनाइन डिस्टेंपर वायरस बेहद घातक माना जाता है, जो जानवरों के तंत्रिका तंत्र पर सीधा हमला करता है। संक्रमित जानवरों में तेज बुखार, आंख और नाक से पानी आना, लगातार खांसी, सुस्ती, शिकार करने में असमर्थता और असामान्य व्यवहार जैसे लक्षण दिखाई देते हैं। वन्यजीव विशेषज्ञों का मानना है कि यदि समय रहते संक्रमण पर नियंत्रण नहीं पाया गया, तो यह उत्तराखंड के समृद्ध वन्यजीव तंत्र के लिए बड़ा खतरा बन सकता है। इसी वजह से राज्यभर में निगरानी, वैक्सीनेशन और रेस्क्यू प्रोटोकॉल को और सख्त कर दिया गया है।