बिलासपुर : खरसिया रेलवे स्टेशन पर शनिवार सुबह हुए दर्दनाक हादसे में लोको पायलट दिलीप कुमार यादव (40) की मौत हो गई। करीब 15 घंटे की ड्यूटी पूरी करने के बाद वे बिलासपुर स्थित अपने घर लौटने के लिए ट्रेन पकड़ने स्टेशन पहुंचे थे। इसी दौरान वे रेलवे ट्रैक पर गिर गए। हादसे में उनके दोनों पैर गंभीर रूप से कट गए। उन्हें तत्काल रायगढ़ के जिंदल फोर्टिस अस्पताल ले जाया गया, जहां इलाज के दौरान उनकी मौत हो गई। हादसा किन परिस्थितियों में हुआ और इसके पीछे क्या कारण रहे, इसका खुलासा रेलवे की जांच रिपोर्ट आने के बाद ही हो सकेगा।

ड्यूटी खत्म कर घर लौटने निकले थे दिलीप

2013 बैच के लोको पायलट दिलीप कुमार यादव का परिवार बिलासपुर में रहता है, जबकि उनकी पोस्टिंग खरसिया में थी। शनिवार सुबह करीब 6 बजे ड्यूटी समाप्त करने के बाद वे बिलासपुर लौटने के लिए हावड़ा-पोरबंदर एक्सप्रेस पकड़ने खरसिया स्टेशन पहुंचे थे। वे स्टेशन की लाइन नंबर-2 पर थे, तभी हादसा हो गया। गंभीर चोटों के कारण उनके दोनों पैर कट गए। अस्पताल में इलाज के दौरान उनकी मौत हो गई।

छह महीने पहले हुआ था तबादला, फिर भी नहीं मिली रिलीविंग

इस मामले में एक और अहम पहलू सामने आया है। दिलीप कुमार यादव के तबादले का आदेश 13 अप्रैल 2026 को सीनियर डीओपी की ओर से जारी किया गया था। इसके बावजूद करीब छह महीने बीतने के बाद भी उन्हें रिलीव नहीं किया गया था। आखिर आदेश जारी होने के बाद भी उन्हें पुरानी पोस्टिंग पर क्यों रखा गया, यह भी जांच का विषय है। रेलवे अब हादसे की परिस्थितियों के साथ रिलीविंग में हुई देरी के कारणों की भी पड़ताल कर रहा है।

बिलासपुर मंडल में 1051 पद खाली, काम कर रहे कर्मचारियों पर बढ़ रहा दबाव

बिलासपुर रेल मंडल में लोको पायलटों के कुल 3262 पदों की जरूरत है, लेकिन वर्तमान में केवल 2211 लोको पायलट ही कार्यरत हैं। इस तरह 1051 पद खाली हैं। स्टाफ की कमी के कारण परिचालन से जुड़े कर्मचारियों पर अतिरिक्त काम का दबाव पड़ने की बात सामने आती रही है। नियमों के अनुसार, 14 दिनों में 104 घंटे से कम परिचालन होने पर ओवरटाइम नहीं मिलता। हालांकि, दिलीप के मामले में वास्तविक ड्यूटी अवधि, अतिरिक्त काम और विश्राम की स्थिति रिकॉर्ड की जांच के बाद ही स्पष्ट हो सकेगी।

ड्यूटी के घंटे और आराम का रिकॉर्ड होगा अहम

रेलवे ने 8 अगस्त 2025 को राज्यसभा में दिए जवाब में लोको पायलटों की ड्यूटी के लिए प्रतिदिन औसतन नौ घंटे का मानक बताया था। साथ ही कर्मचारियों को निर्धारित आराम देने के प्रावधान भी हैं। ऐसे में दिलीप यादव की मौत के मामले में हादसे से पहले की ड्यूटी का पूरा ब्योरा महत्वपूर्ण होगा। उन्होंने किस समय साइन-ऑन किया, कब साइन-ऑफ हुआ, लगातार कितने घंटे काम किया और पिछली ड्यूटी के बाद कितना विश्राम मिला, इन सभी बिंदुओं की जांच से ही वास्तविक स्थिति सामने आएगी। थकान या नींद के कारण ट्रैक पर गिरने की आशंका जताई जा रही है, लेकिन इसे अभी हादसे का प्रमाणित कारण नहीं माना जा सकता।

जांच रिपोर्ट के बाद होगी आगे की कार्रवाई

सीनियर डीसीएम अनुराग सिंह के अनुसार, लोको पायलट की मौत किन परिस्थितियों में हुई और तबादला आदेश के बावजूद उन्हें रिलीव क्यों नहीं किया गया, इसकी जांच कमर्शियल विभाग कर रहा है। जांच रिपोर्ट सामने आने के बाद आगे की कार्रवाई तय की जाएगी। दिलीप यादव की मौत ने रेलवे में कर्मचारियों की कमी, ड्यूटी के घंटों और पर्याप्त विश्राम की व्यवस्था पर गंभीर आरोप लग रहे हैं। जांच में यह स्पष्ट होगा कि यह महज एक दुर्घटना थी या ड्यूटी और विश्राम से जुड़ी किसी चूक ने लोको पायलट की जान ले ली।