बिलासपुर।  शहर में प्रशासनिक और विभागीय लापरवाही लगातार सामने आ रही है। काम में देरी और सुस्ती का आलम यह है कि इससे पहले 6 एमएलडी और 10 एमएलडी एसटीपी (सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट) प्रोजेक्ट्स के अधूरे काम पर क्रमश: 26 लाख और 41 लाख रुपए की पेनाल्टी लगाई जा चुकी है। प्रशासन की इस चेतावनी के बाद भी स्वास्थ्य जैसी गंभीर सुविधाओं में बड़ी लापरवाही देखने को मिल रही है। अब कोनी में बना 200 करोड़ का मल्टी सुपर स्पेशियलिटी अस्पताल राजनीति और लापरवाही का नया केंद्र बन गया है।
लगभग डेढ़ साल पहले (29 अक्टूबर 2024 को) जिस 220 बिस्तर वाले बड़े अस्पताल का लोकार्पण खुद पीएम नरेंद्र मोदी ने किया था, वह आज तक मरीजों को पूरी सुविधाएं नहीं दे पा रहा है। अब कांग्रेस ने इस मुद्दे पर राज्य सरकार को घेरते हुए बड़ा आरोप लगाया है। कांग्रेस का कहना है कि जानबूझकर इस अस्पताल में व्यवस्थाएं अधूरी रखी जा रही हैं, ताकि आगे चलकर इसे निजी हाथों में सौंपा जा सके।


मरीजों को राहत नहीं, सिम्स किया जा रहा रेफर

शनिवार को कांग्रेस के पूर्व जिलाध्यक्ष और बेलतरा से प्रत्याशी रहे विजय केशरवानी ने प्रेस कांफ्रेंस कर सरकार पर  सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि 200 करोड़ रुपए खर्च होने और पीएम के शुभारंभ के बावजूद यह सिर्फ एक रेफरल सेंटर बनकर रह गया है। सीएम के निरीक्षण के बाद भी यहां सुविधाएं नहीं बढ़ीं।
अस्पताल का निर्माण 2018 में शुरू हुआ था, जिसे 2020 में पूरा होना था, लेकिन यह 5 साल की देरी से तैयार हुआ। बड़े दावों के बावजूद आज तक यहां ना तो कैथ लैब बन पाया है और ना ही ऑक्सीजन प्लांट लगा है। आईपीडी (IPD) की सेवा शुरू नहीं हो सकी है। 24 घंटे इमरजेंसी सेवा, पूर्ण विकसित आईसीयू, विशेषज्ञ डॉक्टर, और पर्याप्त नर्सिंग स्टाफ का भारी टोटा है। मरीजों के लिए अत्याधुनिक एंबुलेंस, भोजन और परिजनों के विश्राम जैसी मूलभूत व्यवस्थाएं भी अधूरी हैं। हार्ट, किडनी और ब्रेन जैसी गंभीर बीमारियों के इलाज की उम्मीद में आने वाले मरीजों को बिना पूरा इलाज दिए सीधे सिम्स या दूसरे बड़े अस्पतालों में रेफर किया जा रहा है।

विधायक क्या अस्पताल बचाने जनता का साथ देंगे?


इस सियासी खींचतान के बीच कांग्रेस ने बेलतरा विधायक सुशांत शुक्ला पर भी निशाना साधा है। केशरवानी ने कहा कि विधायक के आग्रह पर अस्पताल का नाम स्व. दिलीप सिंह जूदेव के नाम पर रख दिया गया, जो एक अच्छी बात है। लेकिन अगर सरकार इस अस्पताल का निजीकरण करती है, तो उस समय विधायक की क्या भूमिका रहेगी? क्या वे जनता की भावनाओं का सम्मान करते हुए अस्पताल को बचाने के लिए जनता के साथ खड़े होंगे? कांग्रेस ने मांग की है कि सरकार स्पष्ट घोषणा करे कि इस अस्पताल का निजीकरण नहीं किया जाएगा।

कांग्रेस ने दी चरणबद्ध आंदोलन की चेतावनी
अस्पताल की इस बदहाली को लेकर कांग्रेस ने अब आर-पार की लड़ाई का मन बना लिया है। केशरवानी ने साफ चेतावनी दी है कि जब भवन पूरी तरह तैयार है, तो चिकित्सा सुविधाएं शुरू करने में इतनी देरी क्यों हो रही है? अगर सरकार ने जल्द ही अस्पताल में विशेषज्ञ डॉक्टरों की भर्ती कर कैथ लैब, ऑक्सीजन प्लांट, और आईसीयू जैसी सभी जीवनरक्षक सुविधाएं पूर्ण क्षमता से शुरू नहीं की, तो कांग्रेस चुप नहीं बैठेगी। निजीकरण पर स्थिति स्पष्ट न होने पर चरणबद्ध आंदोलन किया जाएगा, जिसकी शुरुआत जिला प्रशासन के घेराव से होगी।