
रायपुर। राज्य के 540 करोड़ रुपए के कोयला घोटाले में अब तक की जांच से एक नया सवाल खड़ा हो गया है। कांग्रेस के पूर्व कोषाध्यक्ष रामगोपाल (रामावतार) अग्रवाल पिछले ढाई वर्षों से फरार चल रहे हैं और ईओडब्ल्यू उन्हें खोज रही है। लेकिन अब यह बात सामने आई है कि उन्हें गिरफ्तार होने से बचाने के पीछे एक अलग ही खेल चल रहा है। जानकारी के अनुसार, कुछ दिन पूर्व ही पुलिस विभाग को राम अवतार अग्रवाल के धमतरी में छुपे होने की सूचना मिली थी। लोकेशन और जानकारी होने के बाद भी पुलिस की तरफ से कोई कार्रवाई नहीं हुई। इससे यह सवाल उठ रहा है कि आखिर कौन चाहता है कि रामगोपाल अग्रवाल गिरफ्तार ना हों?
बड़े नेताओं का संरक्षण और बेटी-रोटी का रिश्ता
धमतरी में पुलिस की इस अनदेखी के पीछे राजनीतिक संरक्षण की बात सामने आ रही है। सूत्रों के हवाले से जो जानकारी मिल रही है, उसके मुताबिक फरार नेता को भाजपा के दो राष्ट्रीय स्तर के नेताओं का संरक्षण प्राप्त है। बात केवल यहीं तक सीमित नहीं है, बल्कि राज्य के एक बड़े भाजपा नेता के साथ उनका बेटी-रोटी का पारिवारिक रिश्ता भी बताया जा रहा है। इसी रिश्ते और बड़े नेताओं के संरक्षण के चलते पुलिस सूचना मिलने पर भी मूकदर्शक बनी हुई है और कार्रवाई के तरीके पर चर्चा हो रही है।
डायरी खुली तो 10 जनपद तक जाएगी बात
राजनीतिक गलियारों में यह बात जोर पकड़ रही है कि रामगोपाल अग्रवाल की डायरी में पार्टी फंड और लेनदेन के ऐसे कई राज दफ्न हैं। अगर वे गिरफ्तार होते हैं और ये राज खुलते हैं, तो इसका असर केवल राज्य तक नहीं रहेगा, बल्कि जांच की आंच 10 जनपद तक पहुंचेगी। शायद यही वजह है कि उनकी गिरफ्तारी में पेंच फंसा हुआ है।
सुराग की तलाश: बेटे वैभव से आधी रात तक पूछताछ
फरार नेता तक पहुंचने की कोशिश में ईओडब्ल्यू ने अब उनके परिवार पर शिकंजा कसना शुरू किया है। मंगलवार को उनके बेटे वैभव अग्रवाल को ईओडब्ल्यू-एसीबी मुख्यालय तलब किया गया। दोपहर से शुरू हुई यह पूछताछ रात करीब 12 बजे तक चलती रही। जांच एजेंसी को घोटाले के एक आरोपी के घर से जो डायरी मिली थी, उसमें वैभव का नाम होने की बात सामने आ रही है। ईओडब्ल्यू इसी बात की पुष्टि करने और अन्य कड़ियों को मिलाने के लिए वैभव से सवाल-जवाब कर रही है। यह भी बताया जा रहा है कि वैभव के संबंध भी केवल कांग्रेस नेताओं तक सीमित नहीं हैं, बल्कि भाजपा नेताओं के साथ भी उनके अच्छे संबंध बताए जाते हैं।
विदेश जाने की आशंका या राज्य में ही पनाह?
रामगोपाल की तलाश कोई नई बात नहीं है। यह पिछली कांग्रेस सरकार के समय से ही चल रही है। ईडी ने अलग-अलग मामलों में उनके कई ठिकानों पर छापेमारी की थी। कोल, शराब और डीएमएफ मामलों में गिरफ्तार आरोपियों ने अपने बयानों में बताया था कि पार्टी फंड के नाम पर सारी रकम रामगोपाल को ही दी जाती थी। वे पिछली सरकार के कार्यकाल में ही अंडरग्राउंड हो गए थे। अब तक उनके विदेश चले जाने की आशंका जताई जा रही थी, लेकिन धमतरी वाली सूचना ने मामले को नया मोड़ दे दिया है। कोर्ट उन्हें वांटेड घोषित कर चुका है और अब ईओडब्ल्यू की टीम वैभव अग्रवाल से पूछताछ करके इस पूरे मामले की परतें खोलने का प्रयास कर रही है।