अंबिकापुर। छत्तीसगढ़ के अंबिकापुर में चौपाटी के पास संचालित DHT केयर हॉस्पिटल को लेकर विवाद गहराता जा रहा है। अस्पताल की व्यवस्थाओं और करीब 65 लाख रुपये के कथित लेन-देन को लेकर अब अस्पताल से जुड़े दो पक्ष आमने-सामने हैं। एक ओर डॉक्टर ने पुलिस में शिकायत देकर गंभीर आरोप लगाए हैं, तो दूसरी ओर अस्पताल से जुड़े लोगों ने इन आरोपों को खारिज करते हुए पूरे मामले की निष्पक्ष जांच की मांग की है। मामले में अस्पताल की व्यवस्थाओं को लेकर जिला प्रशासन की ओर से पहले नोटिस जारी किए जाने की बात भी सामने आई है। ऐसे में विवाद सिर्फ पैसों तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि अस्पताल के संचालन और प्रशासनिक कमियों को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं।

डॉक्टर ने थाने में दी शिकायत
अस्पताल के डॉक्टर अशोक टोप्पो ने कोतवाली थाने में फार्मासिस्ट और मैनेजिंग डायरेक्टर सुशील राय के खिलाफ शिकायत दर्ज कराई है। शिकायत में आरोप लगाया गया है कि अस्पताल से संबंधित करीब 65 लाख रुपये की राशि निजी खाते में ली गई। डॉक्टर ने इस लेन-देन की जांच कराने और मामले में उचित कार्रवाई की मांग की है। हालांकि, शिकायत में लगाए गए आरोपों की अभी जांच होनी बाकी है। पुलिस की जांच के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि रकम किस खाते में गई, उसका स्रोत क्या था और उसका इस्तेमाल किस उद्देश्य से किया गया।

अस्पताल की व्यवस्थाओं पर भी उठे सवाल
विवाद के बीच अस्पताल की व्यवस्थाओं को लेकर प्रशासनिक कार्रवाई का मुद्दा भी सामने आया है। अस्पताल से जुड़े लोगों के मुताबिक, निरीक्षण के दौरान कई कमियां पाई गई थीं और इन्हें लेकर जिला प्रशासन की ओर से नोटिस जारी किया गया था। इन कमियों में क्या-क्या शामिल था और उनका वर्तमान में क्या समाधान हुआ है, यह भी जांच का हिस्सा बन सकता है।

सुशील राय ने आरोपों को बताया गलत
दूसरी तरफ, फार्मासिस्ट और मैनेजिंग डायरेक्टर सुशील राय ने डॉक्टर की ओर से लगाए गए आरोपों को गलत बताया है। उनका कहना है कि अस्पताल की कुछ व्यवस्थाओं को लेकर प्रशासनिक स्तर पर आपत्तियां जरूर सामने आई थीं, लेकिन 65 लाख रुपये के लेन-देन को लेकर लगाए जा रहे आरोप तथ्यों पर आधारित नहीं हैं। सुशील राय ने अपने पक्ष में दस्तावेज और अन्य कागजात प्रस्तुत किए हैं। उनका कहना है कि पूरे मामले की निष्पक्ष तरीके से जांच होनी चाहिए, ताकि वास्तविक स्थिति सामने आ सके।

अब दस्तावेज बताएंगे 65 लाख की असली कहानी
मामले में सबसे बड़ा सवाल करीब 65 लाख रुपये की रकम को लेकर है। पुलिस जांच में बैंक ट्रांजेक्शन, अस्पताल के अकाउंट, भुगतान रिकॉर्ड और संबंधित दस्तावेजों की पड़ताल अहम साबित हो सकती है। जांचकर्ताओं के सामने यह स्पष्ट करना होगा कि रकम किस स्रोत से आई, किस खाते में गई, किस उद्देश्य से उसका लेन-देन हुआ और क्या इस प्रक्रिया में किसी नियम का उल्लंघन हुआ।

दोनों पक्षों के दावों के बीच जांच अहम
इस पूरे मामले में दोनों पक्षों के अपने-अपने दावे हैं। डॉक्टर की शिकायत में गंभीर वित्तीय आरोप लगाए गए हैं, जबकि अस्पताल प्रबंधन से जुड़े पक्ष ने इन्हें सिरे से खारिज किया है। ऐसे में अब पुलिस और जिला प्रशासन की जांच पर सभी की नजरें टिकी हैं। दस्तावेजों और वित्तीय रिकॉर्ड की जांच के बाद ही यह तय हो सकेगा कि 65 लाख रुपये के लेन-देन में वास्तव में कोई अनियमितता हुई थी या मामला आपसी विवाद का है। फिलहाल, किसी भी आरोप को जांच पूरी होने से पहले अंतिम सत्य नहीं माना जा सकता।