
बिलासपुर : होटल खरीदने के दावे, किरायेदारी से इनकार और स्वामित्व को लेकर लंबे समय से चल रही कानूनी खींचतान के बाद आखिरकार मंगला स्थित तीन मंजिला व्यवसायिक होटल 'हरी चटनी' के विवाद में न्यायालय भाड़ा नियंत्रण प्राधिकारी ने भवन मालिक के पक्ष में फैसला सुनाया है। प्राधिकारी ने शक्ति सिंह ठाकुर का 99 लाख रुपए में होटल खरीदने का दावा खारिज करते हुए 30 दिनों के भीतर पूरा होटल परिसर खाली कर भवन मालिक मोतीलाल दयालानी को कब्जा सौंपने का आदेश दिया है। इतना ही नहीं, अगस्त 2025 से परिसर खाली करने तक तीन लाख रुपए प्रतिमाह (जीएसटी सहित) की दर से बकाया किराया और बिजली बिल का भुगतान करने के भी निर्देश दिए हैं।
99 लाख में खरीदी का दावा, लेकिन रजिस्ट्री का दस्तावेज नहीं
विवाद मंगला स्थित खसरा नंबर 1592/8, 1592/9 और 1592/10 की कुल 2554.5 वर्गफुट जमीन पर बने तीन मंजिला होटल से जुड़ा है। भवन मालिक मोतीलाल दयालानी के अनुसार उन्होंने 16 दिसंबर 2024 को होटल परिसर 11 महीने के लिए तीन लाख रुपए मासिक किराए पर शक्ति सिंह ठाकुर को दिया था। जनवरी 2025 में किराया भुगतान के बाद आगे की रकम देना बंद कर दिया गया। दूसरी ओर, शक्ति सिंह ने खुद को किरायेदार मानने से इनकार करते हुए दावा किया कि उसने 17 अक्टूबर 2024 को 99 लाख रुपए में संपत्ति खरीदने का सौदा किया था। उसने स्वामित्व विवाद का मामला सिविल कोर्ट में लंबित होने का हवाला भी दिया। हालांकि, न्यायालय में इस दावे के समर्थन में वह कोई वैध रजिस्ट्री अथवा स्वामित्व साबित करने वाला दस्तावेज पेश नहीं कर सका।
राजस्व रिकॉर्ड में नहीं मिला स्वामित्व का दस्तावेज
सुनवाई के दौरान न्यायालय ने राजस्व अभिलेखों, बी-1, किस्तबंदी और खसरा पंचसाला जैसे दस्तावेजों का परीक्षण किया। इनके आधार पर मोतीलाल दयालानी का स्वामित्व स्वीकार किया गया। वहीं, 99 लाख रुपए में संपत्ति खरीदने के दावे को प्रमाणित करने के लिए आवश्यक दस्तावेज नहीं मिलने पर शक्ति सिंह का पक्ष स्वीकार नहीं किया गया।
अनुबंध को कोर्ट में बताया फर्जी, जीएसटी के लिए उसी का इस्तेमाल!
इस पूरे विवाद में न्यायालय ने एक अहम विरोधाभास भी पकड़ा। शक्ति सिंह ठाकुर ने अदालत में 16 दिसंबर 2024 के किरायेदारी अनुबंध को कूटरचित बताया था, लेकिन इसी अनुबंध का इस्तेमाल उसने जीएसटी पंजीयन कराने के लिए किया था। न्यायालय ने इस विरोधाभास को महत्वपूर्ण मानते हुए मामले के तथ्यों और दस्तावेजों का परीक्षण किया।
30 दिन की मोहलत, किराया और बिजली बिल भी देना होगा
प्राधिकारी ने स्पष्ट आदेश दिया है कि शक्ति सिंह ठाकुर 30 दिनों के भीतर होटल का पूरा परिसर खाली कर भवन मालिक को शांतिपूर्ण कब्जा सौंपे। इसके अलावा अगस्त 2025 से परिसर खाली करने तक तीन लाख रुपए प्रतिमाह जीएसटी सहित की दर से बकाया किराया और बिजली बिल का भुगतान करना होगा। इस फैसले के साथ ही मंगला के चर्चित होटल 'हरी चटनी' के स्वामित्व और किरायेदारी विवाद में भवन मालिक को बड़ी कानूनी राहत मिली है।