रायपुर। छत्तीसगढ़ सरकार ने राज्य में माइक्रो ब्रुअरी खोलने की अनुमति देकर नई आबकारी नीति के तहत बड़ा फैसला लिया है। अब राज्य में अलग-अलग फ्लेवर की फ्रेश (क्राफ्ट) बीयर तैयार और परोसी जा सकेगी। हालांकि, इस कारोबार में उतरने वाले निवेशकों के लिए सरकार ने सख्त नियम भी तय किए हैं। लाइसेंस, सुरक्षा मानकों, उत्पादन सीमा और निगरानी को लेकर स्पष्ट शर्तें लागू की गई हैं।

10 लाख रुपये सालाना लाइसेंस, 4 हजार वर्गफीट परिसर अनिवार्य
नई नीति के तहत माइक्रो ब्रुअरी स्थापित करने के लिए हर वर्ष 10 लाख रुपये की लाइसेंस फीस देनी होगी। साथ ही लाइसेंस जारी होने से पहले फीस का 25 प्रतिशत सुरक्षा राशि के रूप में जमा करना अनिवार्य होगा। इसके अलावा ब्रुअरी और उससे जुड़े रेस्तरां का कुल क्षेत्रफल कम से कम 4,000 वर्गफीट होना चाहिए। भवन में अग्नि सुरक्षा, मशीनरी सुरक्षा और अन्य सभी वैधानिक मानकों का पालन भी अनिवार्य रहेगा।

उत्पादन की सीमा तय, हर गतिविधि पर रहेगी निगरानी
सरकार ने प्रत्येक माइक्रो ब्रुअरी के लिए प्रतिदिन अधिकतम 1,000 बल्क लीटर और सालाना 3.65 लाख बल्क लीटर उत्पादन की सीमा निर्धारित की है।आबकारी विभाग के अनुसार उत्पादन, बिक्री और कर भुगतान की नियमित निगरानी की जाएगी। यदि कोई संचालक नियमों का उल्लंघन करता है, तो उसके खिलाफ आबकारी अधिनियम के तहत कार्रवाई की जा सकती है।

क्या होती है क्राफ्ट बीयर?
क्राफ्ट बीयर सामान्य फैक्ट्री में बनने वाली बीयर से अलग होती है। इसे छोटे बैच में तैयार किया जाता है, जिससे इसकी ताजगी, स्वाद और गुणवत्ता पर विशेष ध्यान दिया जाता है। इसमें उच्च गुणवत्ता वाले माल्ट, हॉप्स और अन्य प्राकृतिक सामग्री का उपयोग किया जाता है। माइक्रो ब्रुअरी में तैयार होने वाली बीयर आमतौर पर उसी परिसर में ग्राहकों को परोसी जाती है और इसमें व्हीट, मैंगो, एप्पल, चॉकलेट जैसे विभिन्न फ्लेवर उपलब्ध हो सकते हैं।

एक गिलास की कीमत 250 से 300 रुपये तक
सरकार ने क्राफ्ट बीयर पर 60 रुपये प्रति बल्क लीटर उत्पाद शुल्क निर्धारित किया है। शुरुआती अनुमान के अनुसार, एक गिलास क्राफ्ट बीयर की कीमत 250 से 300 रुपये के बीच हो सकती है।

सरकार को राजस्व, पर्यटन और निवेश की उम्मीद
सरकार का मानना है कि माइक्रो ब्रुअरी नीति से होटल, रेस्तरां और पर्यटन उद्योग को बढ़ावा मिलेगा। इससे निजी निवेश आकर्षित होगा, रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे और राज्य को लाइसेंस शुल्क तथा उत्पाद शुल्क के रूप में अतिरिक्त राजस्व प्राप्त होगा। हालांकि, सरकार ने स्पष्ट किया है कि कारोबार शुरू करने की अनुमति मिलने का अर्थ नियमों में ढील नहीं है। नई व्यवस्था में लाइसेंसधारकों की गतिविधियों पर पहले से अधिक निगरानी रखी जाएगी और नियमों के उल्लंघन पर सख्त कार्रवाई की जाएगी।