
Acidity Problem: पेट में जलन, खट्टी डकार या खाने के बाद बेचैनी जैसी समस्या कभी-कभार हो तो इसे आमतौर पर सामान्य माना जाता है। लेकिन अगर ये परेशानी बार-बार होने लगे या लंबे समय तक बनी रहे, तो इसे नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। खानपान, खाने का समय, ज्यादा मसालेदार या तला हुआ भोजन और कुछ लोगों में चाय-कॉफी जैसी चीजें एसिडिटी के लक्षणों को बढ़ा सकती हैं।
ऐसे में केवल बार-बार दवा लेने के बजाय अपनी रोजमर्रा की आदतों पर भी ध्यान देना जरूरी है। सेलिब्रिटी न्यूट्रिशनिस्ट श्वेता शाह ने एसिडिटी से परेशान लोगों के लिए कुछ आसान आदतें सुझाई हैं। हालांकि, इन उपायों का असर हर व्यक्ति में अलग हो सकता है और लगातार लक्षण रहने पर डॉक्टर से सलाह लेना जरूरी है।
आखिर क्यों होती है एसिडिटी?
जब पेट का एसिड ऊपर की ओर भोजन नली में आने लगता है, तो सीने में जलन और खट्टी डकार जैसी परेशानी हो सकती है। इसे एसिड रिफ्लक्स कहा जाता है। इसके साथ मुंह में खट्टा या खराब स्वाद, पेट में भारीपन और कभी-कभी मतली जैसे लक्षण भी महसूस हो सकते हैं। बहुत ज्यादा या देर रात खाना, तला-भुना भोजन, मसालेदार चीजें, अधिक वजन और खाने के तुरंत बाद लेटने जैसी आदतें कुछ लोगों में समस्या बढ़ा सकती हैं।
सुबह भीगे मुनक्के से करें दिन की शुरुआत
न्यूट्रिशनिस्ट की सलाह में सुबह भीगे हुए मुनक्के लेने का सुझाव शामिल है। मुनक्का फाइबर समेत कुछ पोषक तत्वों का स्रोत है और इसे संतुलित डाइट का हिस्सा बनाया जा सकता है। हालांकि, मुनक्का एसिडिटी का निश्चित इलाज नहीं है। अगर इसे खाने के बाद जलन या परेशानी बढ़ती है, तो इसका सेवन बंद कर दें।
खाने के बाद सौंफ लेना हो सकता है मददगार
सौंफ का इस्तेमाल लंबे समय से भोजन के बाद पाचन से जुड़ी परेशानी में किया जाता रहा है। खाने के बाद थोड़ी मात्रा में सौंफ चबाने की आदत कुछ लोगों को पेट फूलने या भारीपन से राहत देने में मदद कर सकती है। लेकिन अगर आपको लगातार एसिड रिफ्लक्स रहता है, तो सिर्फ सौंफ पर निर्भर रहने के बजाय इसके मूल कारण की जांच कराना ज्यादा जरूरी है।
शीतली या शीतकारी प्राणायाम
न्यूट्रिशनिस्ट ने एसिडिटी से परेशान लोगों को शीतली या शीतकारी प्राणायाम जैसे ब्रीदिंग एक्सरसाइज करने की सलाह भी दी है। इसे आरामदायक तरीके से और सही तकनीक सीखकर करना बेहतर है। अगर प्राणायाम करते समय चक्कर, सांस लेने में परेशानी या किसी तरह की असहजता महसूस हो तो तुरंत रोक दें।
खाना खाने के बाद 10 मिनट टहलें
एसिडिटी को कंट्रोल करने के लिए सबसे आसान आदतों में से एक है खाना खाने के बाद कुछ देर हल्की वॉक करना। भोजन के तुरंत बाद बिस्तर पर लेटने से बचें। रात के खाने और सोने के बीच पर्याप्त अंतर रखना भी कई लोगों के लिए फायदेमंद हो सकता है। कुछ लोग भोजन के बाद थोड़ी देर वज्रासन में बैठना भी पसंद करते हैं। हालांकि, अगर घुटनों या किसी अन्य समस्या के कारण यह मुद्रा असहज लगे तो इसे न करें।
सिर्फ घरेलू नुस्खों पर निर्भर न रहें
अगर एसिडिटी कभी-कभार होती है तो खानपान और लाइफस्टाइल में बदलाव मदद कर सकते हैं। लेकिन लगातार या बार-बार होने वाली एसिडिटी को सिर्फ घरेलू उपायों से दबाते रहना सही नहीं है। अगर सीने में बार-बार जलन, निगलने में परेशानी, लगातार उल्टी, बिना वजह वजन कम होना, खून की उल्टी या काले रंग का मल जैसे लक्षण दिखाई दें, तो जल्द डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए।