मोहला। मोहला-मानपुर-अंबागढ़ चौकी जिले में पंचायत प्रतिनिधियों का गुस्सा मंगलवार को खुलकर सामने आ गया। अपनी लंबित मांगों और प्रशासनिक कार्यप्रणाली से नाराज जिले के तीनों विकासखंडों के सरपंच बड़ी संख्या में जिला मुख्यालय पहुंचे और कलेक्टर कार्यालय के बाहर धरने पर बैठ गए। जनप्रतिनिधियों का आरोप है कि पंचायतों की समस्याओं को लगातार नजरअंदाज किया जा रहा है, जबकि गांवों में शासन की अधिकांश योजनाओं का क्रियान्वयन उन्हीं के माध्यम से होता है।

सरपंच संघ के पदाधिकारियों ने बताया कि वे सबसे पहले जिला पंचायत कार्यालय पहुंचे थे, जहां अधिकारियों से चर्चा के दौरान उन्हें अपेक्षित जवाब नहीं मिला। इसके बाद सभी सरपंच कलेक्टर कार्यालय पहुंचे और सीधे कलेक्टर से मुलाकात की मांग करने लगे। लेकिन घंटों इंतजार के बावजूद मुलाकात नहीं होने से उनका आक्रोश और बढ़ गया।

कड़ी धूप में इंतजार, फिर भी नहीं हुई सुनवाई
दूर-दराज गांवों से पहुंचे सरपंच दोपहर तक कलेक्टर कार्यालय परिसर में बैठे रहे। उनका कहना था कि वे अपनी समस्याओं को लेकर गंभीरता से चर्चा करना चाहते थे, लेकिन प्रशासन ने उनकी भावनाओं को महत्व नहीं दिया। प्रदर्शन में शामिल कई जनप्रतिनिधियों ने आरोप लगाया कि लंबे इंतजार के दौरान उन्हें बुनियादी सुविधाएं तक उपलब्ध नहीं कराई गईं।

मनरेगा भुगतान और भ्रष्टाचार के आरोप
सरपंचों ने मनरेगा और अन्य विकास कार्यों की प्रक्रिया को लेकर भी सवाल उठाए। उनका आरोप है कि कार्य पूरा होने और सत्यापन के बाद भी भुगतान में महीनों की देरी होती है। कई मामलों में फाइलों को बार-बार आपत्तियों के नाम पर रोका जाता है, जिससे पंचायतों का काम प्रभावित होता है। कुछ सरपंचों ने प्रशासनिक स्तर पर कथित कमीशनखोरी और अनावश्यक प्रक्रिया का भी मुद्दा उठाया।

"काम हमारा, सम्मान किसी और का"
प्रदर्शन के दौरान सरपंचों ने कहा कि गांवों में सड़क, पानी, आवास, मनरेगा और शासन की अधिकांश योजनाओं का जिम्मा पंचायतों पर होता है, लेकिन निर्णय लेने की प्रक्रिया में उन्हें उचित महत्व नहीं दिया जाता। उन्होंने मानदेय बढ़ाने और पंचायत प्रतिनिधियों के साथ सम्मानजनक व्यवहार सुनिश्चित करने की मांग की है।

सुशासन तिहार पर भी उठे सवाल
सरपंचों ने राज्य सरकार के "सुशासन तिहार" कार्यक्रम की कार्यप्रणाली पर भी नाराजगी जताई। उनका कहना है कि जनता की कई पुरानी शिकायतें अब तक लंबित हैं, लेकिन पंचायतों पर लगातार अतिरिक्त जिम्मेदारियां डाली जा रही हैं। उन्होंने दावा किया कि जमीनी स्तर पर समस्याओं के समाधान की रफ्तार उम्मीद के मुताबिक नहीं है।

प्रतिनिधिमंडल बुलाने पर भड़के सरपंच
विवाद तब और बढ़ गया जब प्रशासन की ओर से सभी सरपंचों के बजाय सीमित प्रतिनिधिमंडल को चर्चा के लिए बुलाने का प्रस्ताव दिया गया। सरपंचों ने इसे पूरे जिले के जनप्रतिनिधियों की अनदेखी बताया और विरोधस्वरूप बिना ज्ञापन सौंपे ही लौटने का फैसला किया। जिला सरपंच संघ के अध्यक्ष पुष्पेंद्र भुआर्य ने कहा कि यदि पंचायत प्रतिनिधियों की मांगों पर जल्द पहल नहीं हुई तो आंदोलन को जिलेभर में विस्तार दिया जाएगा। उन्होंने ग्राम सभाओं के बहिष्कार, पंचायतों के प्रशासनिक कार्य रोकने और सामूहिक इस्तीफे जैसे कदम उठाने की चेतावनी दी।