AI Regulation in India: आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस यानी AI का इस्तेमाल तेजी से बढ़ रहा है। इसके साथ ही डीपफेक, गलत जानकारी और AI से तैयार किए गए कंटेंट के दुरुपयोग को लेकर चिंताएं भी बढ़ी हैं। इसी बीच भारत में AI के इस्तेमाल और उससे जुड़े जोखिमों को लेकर रेगुलेशन की दिशा में सरकार का फोकस लगातार बढ़ रहा है। केंद्रीय इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्री अश्विनी वैष्णव पहले भी AI गवर्नेंस के लिए टेक्निकल और कानूनी, दोनों पहलुओं को साथ लेकर चलने की जरूरत पर जोर दे चुके हैं। सरकार की मौजूदा नीति में AI को सुरक्षित, भरोसेमंद और जवाबदेह तरीके से विकसित करने पर जोर दिया जा रहा है।

AI रेगुलेशन में किन मुद्दों पर है फोकस?
AI को लेकर प्रस्तावित रेगुलेटरी ढांचे में सबसे अहम मुद्दों में AI Safety, डीपफेक, गलत सूचना, जवाबदेही और मानव-केंद्रित तकनीकी विकास शामिल हैं।सरकार का जोर ऐसे सिस्टम तैयार करने पर है, जिनसे AI के कारण होने वाले संभावित नुकसान को तकनीकी उपायों के जरिए कम किया जा सके। वैष्णव ने AI गवर्नेंस के लिए “टेक्नो-लीगल” अप्रोच की जरूरत बताई है, यानी सिर्फ कानून बनाना पर्याप्त नहीं होगा बल्कि तकनीकी सुरक्षा उपाय भी जरूरी होंगे।

डीपफेक क्यों बना बड़ी चुनौती?
AI की मदद से बनाए गए नकली वीडियो, तस्वीर और ऑडियो पहले के मुकाबले ज्यादा वास्तविक दिखाई दे सकते हैं। यही वजह है कि किसी कंटेंट को असली या AI-generated समझना कई बार मुश्किल हो जाता है। भारत सरकार ने 2026 में Synthetically Generated Information (SGI) से होने वाले नुकसान को लेकर IT Rules के तहत रेगुलेटरी फ्रेमवर्क मजबूत किया है। इसमें AI-generated और deepfake कंटेंट की पहचान, लेबलिंग, ट्रेसबिलिटी और प्लेटफॉर्म की जवाबदेही जैसे प्रावधान शामिल किए गए हैं।

AI कंटेंट की पहचान पर भी जोर
सरकार AI-generated कंटेंट की पहचान के लिए तकनीकी समाधान विकसित करने पर भी काम कर रही है। केंद्रीय मंत्री ने पहले कहा है कि डीपफेक डिटेक्शन सिस्टम की सटीकता इतनी मजबूत होनी चाहिए कि उसके परिणाम कानूनी प्रक्रिया में भी जांचे जा सकें। इसके अलावा AI सिस्टम में bias यानी पूर्वाग्रह को कम करने और मॉडल को सुरक्षित तरीके से इस्तेमाल करने जैसे मुद्दों पर भी काम किया जा रहा है।

इंसानों को केंद्र में रखने की जरूरत
AI के बढ़ते इस्तेमाल के बीच सरकार का एक बड़ा फोकस यह भी है कि तकनीक का विकास लोगों और समाज के हितों को ध्यान में रखकर किया जाए। AI से रोजगार, शिक्षा, डिजिटल सेवाओं और कारोबार में बड़े बदलाव हो सकते हैं, इसलिए इसके फायदे आम लोगों तक पहुंचाने के साथ संभावित जोखिमों को कम करना भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। सरकार की AI नीति में Safe, Trusted और Responsible AI पर जोर दिया गया है। साथ ही बड़े स्तर पर AI स्किलिंग को भी बढ़ावा दिया जा रहा है, ताकि तकनीकी बदलाव के साथ लोगों की क्षमता भी विकसित हो सके।

भारत में AI को लेकर पहले ही मजबूत हुआ है नियमों का ढांचा
AI रेगुलेशन को लेकर यह पहली पहल नहीं है। सरकार ने फरवरी 2026 में IT Rules में बदलाव करके synthetically generated information, जिसमें deepfake और AI-generated content शामिल हैं, से होने वाले नुकसान को रोकने के लिए प्लेटफॉर्म की जिम्मेदारियां बढ़ाई थीं। नए प्रावधानों में कुछ AI-generated कंटेंट की स्पष्ट लेबलिंग, मेटाडेटा की ट्रेसबिलिटी और गैरकानूनी कंटेंट के खिलाफ प्लेटफॉर्म की कार्रवाई जैसे पहलू शामिल हैं। आने वाले समय में AI से जुड़े रेगुलेशन को लेकर सरकार और ज्यादा स्पष्ट दिशा तय कर सकती है। हालांकि, इसका उद्देश्य सिर्फ AI के इस्तेमाल पर रोक लगाना नहीं, बल्कि इनोवेशन और सुरक्षा के बीच संतुलन कायम करना भी है।