गूगल ने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस का कथित तौर पर गलत इस्तेमाल कर बड़े पैमाने पर ऑनलाइन ठगी करने वाले एक साइबर अपराध नेटवर्क के खिलाफ कानूनी कार्रवाई शुरू की है। कंपनी का आरोप है कि चीन से संचालित एक नेटवर्क ने गूगल के AI प्लेटफॉर्म जेमिनी की मदद से हजारों फर्जी वेबसाइट और लाखों स्कैम संदेश तैयार किए। इनका इस्तेमाल लोगों को भरोसेमंद कंपनियों और सरकारी सेवाओं के नाम पर धोखा देने के लिए किया गया, जिससे बड़ी संख्या में इंटरनेट और स्मार्टफोन यूजर्स प्रभावित हुए।

अमेरिकी अदालत में दायर मुकदमे के अनुसार, ‘आउटसाइडर एंटरप्राइज’ नामक नेटवर्क ने कथित तौर पर 131 फिशिंग किट विकसित किए, जिनकी मदद से नकली वेबसाइट और फर्जी संदेश तैयार किए गए। इन वेबसाइटों और संदेशों को इस तरह डिजाइन किया गया था कि वे लोकप्रिय डिजिटल सेवाओं और सरकारी प्लेटफॉर्म के आधिकारिक संदेशों जैसे दिखाई दें। आरोप है कि इसके जरिए लोगों से बैंकिंग जानकारी, पासवर्ड और अन्य संवेदनशील डेटा हासिल करने की कोशिश की गई।

गूगल के मुताबिक इस नेटवर्क ने एक मिलियन से अधिक संदिग्ध इंटरनेट एड्रेस तैयार किए और करीब 9,000 फर्जी वेबसाइट संचालित कीं। कंपनी का दावा है कि केवल दो सप्ताह के भीतर एंड्रॉयड यूजर्स को 25 लाख से ज्यादा संदिग्ध टेक्स्ट मैसेज भेजे गए। हालांकि नुकसान की सटीक राशि सार्वजनिक नहीं की गई है, लेकिन मामले को बड़े स्तर की साइबर धोखाधड़ी से जोड़कर देखा जा रहा है। गूगल ने इस दौरान हजारों संदिग्ध संदेशों की पहचान कर यूजर्स को सतर्क भी किया।

कंपनी का कहना है कि वह इस मामले में अमेरिकी जांच एजेंसी एफबीआई और प्रमुख टेलीकॉम कंपनियों के साथ मिलकर काम कर रही है। गूगल के अनुसार, AI तकनीक के बढ़ते उपयोग के साथ साइबर अपराध भी अधिक जटिल होते जा रहे हैं। ऐसे में तकनीकी कंपनियों, सुरक्षा एजेंसियों और दूरसंचार सेवा प्रदाताओं के बीच सहयोग ऑनलाइन ठगी और डिजिटल अपराधों को रोकने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।