
बिलासपुर : अरपा पार क्षेत्र को अलग नगर निगम बनाने की मांग को लेकर नागरिक सुरक्षा मंच के संस्थापक अमित तिवारी का आमरण अनशन अब भी जारी रहा। लगातार अनशन के बीच उनकी तबीयत अचानक बिगड़ गई। उनका ब्लड प्रेशर काफी कम हो गया, जिसके बाद डॉक्टर प्रदीप शुक्ला को मौके पर बुलाकर स्वास्थ्य जांच कराई गई। डॉक्टर ने उनकी स्थिति को देखते हुए उन्हें आराम करने और ज्यादा बातचीत नहीं करने की सलाह दी। तबीयत खराब होने के बावजूद अमित तिवारी ने आंदोलन खत्म करने से साफ इनकार कर दिया। उनका कहना है कि अरपा पार क्षेत्र में रहने वाले 3 लाख से ज्यादा लोगों की मांग को लेकर शुरू किया गया यह संघर्ष तभी रुकेगा, जब सरकार इस दिशा में ठोस फैसला लेगी या लिखित आश्वासन देगी।
'आया हूं कफन बांधकर, नहीं हटूंगा पीछे'
अमित तिवारी ने कहा कि वह जनता की मांग को लेकर कफन बांधकर आंदोलन में बैठे हैं। उनका कहना है कि जब तक अरपा पार के लोगों की मांग पर सरकार गंभीरता नहीं दिखाती, तब तक वह अनशन जारी रखेंगे। स्वास्थ्य बिगड़ने के बावजूद उनके रुख में कोई बदलाव नहीं आया है।
चुनावी घोषणा पत्र में विधायक ने किया था वादा, अब तक पूरा नहीं
अमित तिवारी ने बिलासपुर विधायक अमर अग्रवाल पर भी वादाखिलाफी का आरोप लगाया है। उन्होंने कहा कि अरपा पार के लिए अलग नगर निगम बनाने की मांग को चुनावी घोषणा पत्र में जगह दी गई थी, लेकिन अब तक इस दिशा में कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया हैं। उन्होंने कहा कि एक ओर क्षेत्र के हजारों लोग अलग नगर निगम की मांग कर रहे हैं और दूसरी ओर इतने दिनों से आमरण अनशन पर बैठे होने के बावजूद विधायक या प्रशासन की ओर से उनकी सुध लेने कोई नहीं पहुंचा। तिवारी ने इसे जनभावनाओं की अनदेखी बताया।
व्यापारियों का भी मिला समर्थन
अलग नगर निगम की मांग को लेकर चल रहे आंदोलन को अब व्यापारियों का समर्थन भी मिलने लगा है। नागरिक सुरक्षा मंच के अनुसार, व्यापारी संघ सरकंडा ने आंदोलन के समर्थन में एक दिन सरकंडा क्षेत्र की दुकानें बंद रखी। व्यापारियों ने कहा कि अरपा पार क्षेत्र के विकास और अलग नगर निगम की मांग को लेकर चल रहे आंदोलन में वे अपनी भूमिका निभाएंगे। दुकानें बंद रखने की अपील को आंदोलन के प्रति व्यापारी वर्ग के समर्थन के तौर पर देखा जा रहा है।
बिगड़ती सेहत के बीच बढ़ा दबाव
आमरण अनशन के एक सप्ताह बीत जाने के साथ अमित तिवारी की सेहत को लेकर चिंता भी बढ़ गई है। बीपी कम होने के बाद डॉक्टरों की निगरानी में उनका स्वास्थ्य परीक्षण किया गया है। अब देखना होगा कि आंदोलन के बढ़ते दबाव के बीच प्रशासन या सरकार की ओर से इस मांग को लेकर कोई पहल होती है या नहीं।