रायपुर। गरीब और जरूरतमंद मरीजों को कैशलेस इलाज उपलब्ध कराने वाली आयुष्मान भारत योजना को लेकर रायपुर जिले में निजी अस्पतालों से जुड़ी शिकायतों का आंकड़ा सामने आया है। स्वास्थ्य विभाग के अनुसार, बीते 14 महीनों के दौरान जिले के अलग-अलग अस्पतालों के खिलाफ 29 शिकायतें दर्ज हुई हैं। इनमें मरीजों से अतिरिक्त रकम मांगने, गलत पैकेज के तहत उपचार करने और इलाज से संबंधित समस्याओं के आरोप शामिल हैं। शिकायतों के बाद विभागीय टीम ने मामलों की जांच की। अधिकारियों के मुताबिक, जांच के दौरान कुछ प्रकरणों में मरीजों से ली गई अतिरिक्त राशि वापस कराई गई, जबकि कुछ मामलों में पात्र मरीजों को योजना के तहत उपचार की सुविधा दिलाई गई।

अतिरिक्त पैसे मांगने से लेकर इलाज से इनकार तक के आरोप
विभाग के पास पहुंची शिकायतों में अलग-अलग तरह की समस्याएं सामने आईं। कुछ मरीजों ने आरोप लगाया कि योजना के तहत उपचार उपलब्ध होने के बावजूद उनसे अतिरिक्त भुगतान की मांग की गई। इसके अलावा कुछ मामलों में उपचार को लेकर गलत पैकेज का इस्तेमाल किए जाने की शिकायत भी मिली। वहीं, ऐसे मामले भी सामने आए, जहां मरीजों को बताया गया कि संबंधित उपचार आयुष्मान योजना के दायरे में नहीं आता और उन्हें उपचार के बिना वापस लौटना पड़ा। हालांकि, जांच में हर शिकायत सही नहीं पाई गई। विभाग के अनुसार करीब पांच मामलों में जांच के बाद शिकायतों को निराधार पाया गया।

जांच के बाद अस्पतालों को जारी हुए नोटिस
स्वास्थ्य विभाग के मुताबिक, शिकायतों की जांच के दौरान संबंधित अस्पतालों से जवाब मांगा गया। शिकायतकर्ताओं द्वारा उपलब्ध कराए गए दस्तावेजों और अस्पताल के रिकॉर्ड का मिलान किया गया। जांच के बाद कुछ मामलों में मरीजों और अस्पताल प्रबंधन के बीच समाधान कराया गया। वहीं, कुछ प्रकरणों में अस्पताल की ओर से मरीज से ली गई राशि वापस किए जाने की जानकारी सामने आई है। कुछ पात्र मरीजों को योजना के अंतर्गत उपचार का लाभ भी दिलाया गया।

प्रदेश स्तर पर भी अस्पतालों की निगरानी
आयुष्मान योजना से जुड़ी गड़बड़ियों की जांच केवल रायपुर जिले तक सीमित नहीं है। विभागीय जानकारी के मुताबिक, राज्य स्तर पर करीब 100 अस्पतालों का परीक्षण किया जा चुका है। इनमें से 17 अस्पतालों को फिलहाल संदेह के दायरे में रखा गया है और उनके खिलाफ कार्रवाई के लिए साक्ष्य जुटाने की प्रक्रिया चल रही है। जांच पूरी होने के बाद संबंधित अस्पतालों पर नियमानुसार कार्रवाई की जा सकती है। इसमें योजना के पैनल से बाहर करने से लेकर आर्थिक दंड जैसी कार्रवाई भी संभव बताई जा रही है।

पहले भी 48 अस्पतालों पर हुई थी कार्रवाई
आयुष्मान योजना के क्रियान्वयन और अस्पतालों की निगरानी को लेकर राज्य स्तर पर पहले भी कार्रवाई की जा चुकी है। विभागीय जानकारी के अनुसार करीब दो साल पहले 48 अस्पतालों के खिलाफ कार्रवाई की गई थी। वर्तमान में भी योजना के तहत इलाज की प्रक्रिया, मरीजों से होने वाली वसूली और पैकेज के उपयोग की निगरानी की जा रही है। जिला स्तर पर प्राप्त शिकायतों को भी इसी प्रक्रिया का हिस्सा बनाया गया है।

फोन पर भी दर्ज होती हैं शिकायतें
जिला स्तर पर गठित निगरानी समिति के पास लिखित शिकायतों के अलावा फोन के माध्यम से भी मरीजों और उनके परिजनों की शिकायतें पहुंचती हैं। अधिकारियों के अनुसार, कई मामलों का प्राथमिक स्तर पर ही फोन के जरिए समाधान किया जाता है। गंभीर या दस्तावेज से संबंधित मामलों में शिकायतकर्ता से रिकॉर्ड लेकर अस्पताल के दस्तावेजों से उसका मिलान किया जाता है। इसके बाद मामले की वास्तविक स्थिति के आधार पर कार्रवाई या समाधान किया जाता है।

शिकायतों की गंभीरता से जांच जरूरी
नर्सिंग होम एक्ट के जिला नोडल अधिकारी डॉ. अविनाश चतुर्वेदी के अनुसार, आयुष्मान योजना का उद्देश्य पात्र मरीजों को उपचार की सुविधा उपलब्ध कराना है। इसलिए योजना से संबंधित शिकायतों को गंभीरता से लिया जा रहा है और निजी अस्पतालों की गतिविधियों पर निगरानी रखी जा रही है। उन्होंने कहा कि शिकायत मिलने पर उसका परीक्षण कर नियमानुसार निराकरण किया जाता है, ताकि पात्र मरीजों को योजना का वास्तविक लाभ मिल सके।

देवेंद्र प्रधान को राज्य स्तर की जिम्मेदारी
आयुष्मान भारत स्वास्थ्य सहायता योजना की निगरानी से जुड़ी स्टेट नोडल एजेंसी में स्वास्थ्य संचालनालय के उपसंचालक देवेंद्र प्रधान को प्रोजेक्ट डायरेक्टर की जिम्मेदारी दी गई है। इससे पहले वे बलरामपुर-रामानुजगंज में संयुक्त कलेक्टर के पद पर कार्यरत थे। स्वास्थ्य संचालनालय में पदस्थापना के बाद उन्हें एबीडीएम, सीआईडीएमएस और स्थापना शाखा से संबंधित जिम्मेदारियां भी सौंपी गई हैं।

क्या है बड़ा सवाल?
आयुष्मान योजना का उद्देश्य आर्थिक रूप से कमजोर और पात्र परिवारों को इलाज के खर्च से राहत देना है। ऐसे में अस्पतालों के खिलाफ अतिरिक्त वसूली या योजना के गलत इस्तेमाल की शिकायतें सामने आना निगरानी व्यवस्था के लिए चुनौती है। अब देखना होगा कि जांच के दायरे में आए 17 अस्पतालों के खिलाफ विभागीय परीक्षण के बाद क्या कार्रवाई होती है।