NJV डेस्क, बिलासपुर।

छत्तीसगढ़ के बहुचर्चित और रोंगटे खड़े कर देने वाले विराट अपहरण कांड में न्याय की बड़ी जीत हुई है। मासूम की जान दांव पर लगाकर 6 करोड़ रुपये की भारी-भरकम फिरौती मांगने वाली सगी ताई (बड़ी मां) और उसके चार अन्य साथियों की अपील को बिलासपुर हाई कोर्ट ने सिरे से खारिज कर दिया है। चीफ जस्टिस रमेश सिन्हा और जस्टिस रविंद्र कुमार अग्रवाल की डिवीजन बेंच ने निचली अदालत (सत्र न्यायालय) के फैसले पर अपनी सख्त मुहर लगाते हुए सभी पांचों दोषियों की आजीवन कारावास (उम्रकैद) की सजा को बरकरार रखा है।

हाई कोर्ट की सख्त टिप्पणी: यह गहरी आपराधिक साजिश

मामले की सुनवाई के दौरान हाई कोर्ट ने बेहद सख्त रुख अपनाते हुए गंभीर टिप्पणी की। डिवीजन बेंच ने कहा कि मासूम बच्चों का पैसों के लिए अपहरण करना एक बेहद संगीन और जघन्य अपराध है। अदालत ने माना कि ऐसे कृत्य न केवल पीड़ित परिवार को जीवन भर का गहरा मानसिक आघात पहुंचाते हैं, बल्कि पूरे समाज में डर, दहशत और असुरक्षा का माहौल भी पैदा करते हैं। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि अभियोजन पक्ष ने कॉल डिटेल रिकॉर्ड (सीडीआर) और तकनीकी साक्ष्यों के जरिए यह पूरी तरह साबित किया है कि यह कोई अचानक हुई घटना नहीं थी, बल्कि 6 करोड़ वसूलने के लिए रची गई एक सोची-समझी आपराधिक साजिश थी।

दौलत के लालच में अंधी ताई ही निकली थी मास्टरमाइंड

गौरतलब है कि 20 अप्रैल को बिलासपुर के नामी कपड़ा व्यवसायी विवेक सराफ के छह साल के बेटे विराट का दिनदहाड़े अपहरण कर लिया गया था। इस कांड ने पूरे प्रदेश को हिलाकर रख दिया था। सबसे बड़ा झटका तब लगा जब खुलासा हुआ कि इस घिनौनी साजिश की मास्टरमाइंड कोई और नहीं, बल्कि मासूम की सगी बड़ी मां नीता सराफ ही थी। दौलत के लालच में नीता ने अपने गुर्गों के साथ मिलकर विराट को अगवा करवाया था। दहशत फैलाने के लिए आरोपितों ने बच्चे की रोती हुई आवाज में 6 करोड़ की फिरौती मांगने का एक ऑडियो रिकॉर्ड कर पिता को भेजा था।

फॉरेंसिक और तकनीकी साक्ष्यों से ऐसे कसे गए थे पेंच

इस हाई-प्रोफाइल मामले में घटना के सातवें दिन ही पुलिस की स्पेशल टीम ने तकनीकी साक्ष्यों और अचूक रणनीति के दम पर मासूम विराट को सकुशल बरामद कर नीता सराफ समेत सभी आरोपितों को गिरफ्तार कर लिया था। जांच में पता चला कि फिरौती मांगने वाले नंबर की लोकेशन यूपी, बिहार और बिलासपुर के बीच ट्रेस हो रही थी। सीडीआर जांच से यह साफ हो गया कि पांचों आरोपित लगातार एक-दूसरे के संपर्क में थे। इसके बाद, ट्रायल के दौरान अदालत में मल्टी-स्पीच सॉफ्टवेयर और फॉरेंसिक एनालिसिस के जरिए यह वैज्ञानिक रूप से प्रमाणित किया गया कि फिरौती वाले कॉल में आवाज आरोपित की ही थी।