बिलासपुर। बात जब जुगाड़ और सेटिंग की आती है, तो बिलासपुर के आबकारी विभाग के इस दागी बाबू बेदू ( बदला हुआ नाम) के आगे सिस्टम भी पानी भरता नजर आता है। भई, रसूख हो तो ऐसा हो कि एंटी करप्शन ब्यूरो (ACB) जैसी एजेंसी का छापा भी आपका बाल बांका न कर सके! जिस बाबू के ठिकानों पर एसीबी ने दबिश देकर कार्रवाई की, उसी बाबू ने अपने तगड़े जुगाड़ से पूरे मामले का ही 'खात्मा' करा लिया। हालांकि, बीच में तत्कालीन विधि विभाग के सहायक सचिव ने थोड़ा पेंच फंसाया, खात्मे की रिपोर्ट खारिज कर दी और कार्रवाई के लिए लिख दिया। लेकिन हमारे बाबू जी कहां रुकने वाले थे? उन्होंने ऐसी सेटिंग भिड़ाई कि सीधे न्यायालय से ही मामले का खात्मा मंजूर करा लिया।

अब एक बार फिर इस बाबू की मुश्किलें बढ़ाने के लिए किसी ने 150 पन्नों की मोटी-तगड़ी शिकायत कर दी है। लेकिन बाबू के पावर के आगे ये 150 पन्ने बेचारी रद्दी की तरह होकर रह गए हैं। सूत्रों की मानें तो रायपुर कमिश्नर कार्यालय ने इस शिकायत की फाइल को ऐसे दबा कर रख दिया है, जैसे उसमें कोई गहरा राज दफ्न हो। सच ही है, इतने पावरफुल आबकारी बाबू के खिलाफ कार्रवाई करने की मजाल आखिर है किसकी?

बाबू के जलवे और प्रभाव का असली ट्रेलर तो दो दिन पहले उनके भतीजे की शादी में देखने को मिला। शादी भतीजे की थी, लेकिन पूरा 'सिस्टम' चाचा के रुतबे को सलाम ठोक रहा था। सूत्रों से मिली पक्की जानकारी के अनुसार, इस शादी में रायपुर से दो-दो एडिशनल कमिश्नर पहुंचे थे। इतना ही नहीं, बिलासपुर के एक पूर्व मंत्री और वर्तमान विधायक के साथ-साथ जूडिशियल के लगभग 6 से 7 एडिशनल जज भी मेहमानवाजी का लुत्फ उठाते नजर आए। अब आप खुद ही सोचिए, जिस बाबू की महफिल में ऐसे-ऐसे वीवीआईपी और जज साहब लोग हाजिरी लगाते हों, उसका कोई कैसे और क्या बिगाड़ सकता है?

और हां, इस बाबू के लिए ट्रांसफर तो जैसे कोई मजाक या वीकेंड ट्रिप है। जब भी कभी दिखावे के लिए या दबाव में इनका ट्रांसफर बिलासपुर से कहीं और किया जाता है, तो ये भाई साहब एक हफ्ते से लेकर एक महीने के अंदर फिर से वापस बिलासपुर में अपनी उसी मनपसंद कुर्सी पर आ धमकते हैं। जैसे ट्रांसफर न हुआ हो, बस कुछ दिन हवा-पानी बदलने बाहर गए हों।

सूत्रों का तो यह भी कहना है कि आबकारी विभाग की इस 'मलाईदार' नौकरी और रसूख का ही कमाल है कि बाबू के बच्चे आराम से बाहर के शहरों में पढ़ाई कर रहे हैं। कुल मिलाकर, यह बाबू सिस्टम के मुंह पर एक करारा तमाचा और इस बात का जीता-जागता सबूत है कि अगर आपकी सेटिंग में दम है, तो हर नियम-कानून आपकी जेब में है। जब तक ऊपर वालों का ऐसा 'आशीर्वाद' है, तब तक 150 पन्नों की शिकायतें बस रायपुर के ऑफिस में धूल ही फांकेंगी!