
बिलासपुर। बिलासपुर वन मंडल में जंगल और जमीन दोनों राम भरोसे हैं। वन माफिया बेखौफ होकर हरे भरे जंगलों को साफ कर रहे हैं। वन विभाग और जिला प्रशासन के अफसर गहरी नींद में सो रहे हैं। अरपा भैंसाझार और बेलगहना क्षेत्र के जंगलों में कीमती पेड़ों की जमकर कटाई चल रही है। बेलगहना में माफिया ने 500 से ज्यादा पेड़ काट दिए। अरपा भैंसाझार में भी 23 बड़े और कीमती पेड़ काट डाले गए। ग्रामीणों ने अफसरों को लगातार शिकायतें दीं लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई। बेलगहना में कुछ दबाव पड़ा तो विभाग ने 12 लोगों को गिरफ्तार कर जेल भेजा। दूसरी तरफ तखतपुर में माफिया ने 22 एकड़ सरकारी जमीन पर तार फेंसिंग शुरू कर दी। इस बड़ी घटना की भनक तक अफसरों को नहीं लगी।

भैंसाझार बैराज के पास मुख्य मार्ग से लगा हुआ जंगल है। यहां माफिया इतने निडर हैं कि दिन के उजाले में पेड़ काट रहे हैं। रात के अंधेरे में इन लकड़ियों को गाड़ियों में भरकर सप्लाई किया जाता है। पिछले 15 दिनों में यहां सागौन शीशम और तेंदू जैसे 23 कीमती पेड़ काट दिए गए। इन पेड़ों की कीमत लाखों में है। जंगल लगातार मैदान बनते जा रहे हैं। हरियाली खत्म हो रही है। ग्रामीणों ने वन विभाग के अधिकारियों को कई बार इसकी जानकारी दी। इसके बावजूद वन विभाग का कोई भी कर्मचारी मौके पर नहीं पहुंचा। यह अफसरों की सीधी लापरवाही और मिलीभगत की ओर इशारा करता है।
बेलगहना वन परिक्षेत्र का हाल तो और भी बुरा है। भेलवाटिकरी के कक्ष क्रमांक 2252 में माफिया ने जंगल के भीतर ही अपनी पक्की छावनी बना ली थी। वहां रहकर 500 से ज्यादा पेड़ों की कटाई की गई। काटे गए पेड़ों की गोलाई 20 सेंटीमीटर से कम थी। छोटी लकड़ियों का उपयोग चूल्हा जलाने और बड़ी लकड़ियों का इस्तेमाल घर बनाने में किया जा रहा था। कटी हुई लकड़ियों को ट्रैक्टर से खुलेआम गांव में ले जाया जा रहा था। यह सारा खेल वन विभाग की नाक के नीचे चल रहा था। जब मामला ज्यादा बढ़ गया तब जाकर वन विभाग की नींद टूटी। अमले ने मौके पर पहुंचकर 12 आरोपियों को पकड़ा। पकड़े गए लोगों में सावित्री बाई यशोदा बाई माखन पटेल सुकलाल लखन सिंह बालाराम निराशा बाई रुखमणि बाई सुनीता बाई और मोहन लाल शामिल हैं। इन सभी को न्यायिक हिरासत में सेंट्रल जेल भेज दिया गया है।
पेड़ों की कटाई के साथ सरकारी जमीन हड़पने का खेल भी जोरों पर है। तखतपुर विकासखंड के बेलमुंडी और अमसेना के बीच नेशनल हाईवे के किनारे कीमती सरकारी जमीन है। राजस्व रिकॉर्ड के पटवारी हल्का नंबर 38 में खसरा नंबर 863 की यह जमीन 22 एकड़ है। इसे छोटे झाड़ के जंगल के रूप में दर्ज किया गया है। पिछले 50 सालों से यह वन विभाग के संरक्षण में है। कुछ बाहरी लोग यहां अचानक पहुंचे और खंभे गाड़कर तार से घेराबंदी शुरू कर दी। गांव वालों ने जब उन्हें रोका तो वे 14 एकड़ जमीन खरीदने का दावा करने लगे। लेकिन वे कोई भी सरकारी दस्तावेज नहीं दिखा सके। ग्रामीणों ने कड़ा विरोध किया तो कब्जा करने वाले लोग मौके से भाग गए। इतनी बड़ी जमीन पर कब्जा होने लगा और प्रशासन के मुखबिर सोते रहे। ग्रामीणों ने अब प्रशासन से जांच और सख्त कार्रवाई की मांग की है।
इस पूरे मामले पर बिलासपुर वन मंडल के सीसीएफ मनोज पांडे ने हमेशा की तरह रटा रटाया बयान दिया है। उनका कहना है कि अवैध कटाई के दोनों मामलों की जांच कराई जाएगी। लापरवाह अफसरों पर भी सख्त कार्रवाई होगी। तखतपुर में जमीन घेरने के मामले में उन्होंने साफ कह दिया कि उन्हें अभी कोई जानकारी नहीं है। टीम भेजकर मामले की जांच कराई जाएगी। कुल मिलाकर पूरा महकमा भगवान भरोसे चल रहा है और जंगल माफिया इसका पूरा फायदा उठा रहे हैं।




