रायपुर:जल संसाधन विभाग के निविदा आवंटन में एक चौंकाने वाला खुलासा हुआ है। करोड़ों रुपये के टेंडर हथियाने के लिए एक बड़ा सिंडिकेट काम कर रहा है। आरोप है कि विभाग में चल रहे 65 बड़े कार्यों का ठेका जिन 6 अलग अलग कंपनियों को मिला है वे सभी वास्तव में एक ही नियंत्रण समूह द्वारा संचालित हैं। इस पूरे सिंडिकेट का संचालन कथित तौर पर समीर तुर्क नामक व्यक्ति द्वारा किया जा रहा है और प्रतिस्पर्धा को कृत्रिम रूप से प्रभावित कर टेंडर प्रक्रिया को पूरी तरह से हाईजैक कर लिया गया है।

जांच की मांग कर रहे दस्तावेजों में यह स्पष्ट उल्लेख है कि अलीया इंफ्रास्ट्रक्चर नानक इंफ्रास्ट्रक्चर वैदेही इंफ्रास्ट्रक्चर गंगरेल इंफ्रास्ट्रक्चर बस्तर इंफ्रास्ट्रक्चर और अर्शी इंफ्रास्ट्रक्चर वास्तव में एक ही कार्यालय और एक ही समूह से जुड़ी हुई हैं। सबसे गंभीर बात यह है कि ई टेंडरिंग प्रक्रिया में एक ही कंप्यूटर और एक ही आईपी एड्रेस से निविदाएं दाखिल की गई हैं। जल संसाधन विभाग स्वयं पूर्व में एक ही सिस्टम से निविदा दाखिल करने को आपत्तिजनक मान चुका है इसके बावजूद इस बहु फर्म भागीदारी को कैसे स्वीकृति दी गई यह अधिकारियों की भूमिका पर बड़ा सवाल खड़े करता है।

यह कॉल्यूसिव बिडिंग यानी मिलीभगत से निविदा प्रक्रिया को प्रभावित करने का एक क्लासिक मामला प्रतीत होता है। यदि इन छह कंपनियों के एमसीए रिकॉर्ड जीएसटी पंजीकरण पैन कार्ड बैंक खाते ई मेल आईडी और अधिकृत हस्ताक्षरकर्ताओं की सूक्ष्म जांच की जाए तो इस पूरे सिंडिकेट की सच्चाई सामने आ सकती है। टेंडर अपलोड इतिहास और आईपी लॉग की फॉरेंसिक जांच से यह साबित हो सकता है कि कैसे अलग अलग नाम से फर्जी प्रतिस्पर्धा खड़ी की गई और विभाग के करोड़ों रुपये के टेंडर एक ही व्यक्ति के खाते में पहुंचा दिए गए। इस सुनियोजित सिंडिकेट को तोड़ने के लिए अब कंपनियों के बैंकिंग ट्रेल और जीईएम पोर्टल लॉग की तत्काल जांच की मांग तेज हो गई है।