जगदलपुर/कांकेर. स्वास्थ्य विभाग कागजों पर बस्तर को मलेरिया मुक्त बनाने के लिए अभियान का 14वां चरण चला रहा है। वहीं, जमीनी हकीकत कुछ और ही कहानी कह रही है। इलाके में संक्रमण थम नहीं रहा है और लगातार मौतें हो रही हैं। कांकेर में बीते 10 दिनों के भीतर तीन स्कूली बच्चों की जान जा चुकी है। यह स्थिति तब है, जब मलेरिया रोकने का सबसे मुख्य हथियार, मेडिकेटेड मच्छरदानी, पिछले दो साल से वहां बांटी ही नहीं गई है। हैरानी की बात यह है कि केंद्र सरकार से बजट मंजूर हुए लंबा वक्त बीत चुका है, फिर भी खरीदी की टेंडर प्रक्रिया शुरू नहीं हो पाई है।

इस साल जनवरी से लेकर अब तक संभाग में 8426 लोग मलेरिया से पीड़ित हो चुके हैं। कांकेर जिले के मर्दापोटी बालक आश्रम में पढ़ने वाले चौथी कक्षा के छात्र सुभाष कुमेटी (9) की रविवार सुबह इलाज के दौरान मौत हो गई। जिले में पिछले दो दिन में मलेरिया से दो बच्चों की जान गई है। तीनों मृतक स्कूली बच्चे हैं। सुभाष की तबीयत बिगड़ने पर परिजन पहले उसे अस्पताल ले जाने के बजाय गांव में झाड़-फूंक कराने ले गए। गंभीर हालत में दोपहर करीब 3:30 बजे उसे अस्पताल पहुंचाया गया, लेकिन तब तक काफी देर हो चुकी थी। मर्दापोटी आश्रम में 22 से 24 जुलाई के बीच हुई स्वास्थ्य जांच में 9 छात्र मलेरिया पॉजिटिव मिले थे। इनमें से तामेश्वर भास्कर (7) और विक्रम मंडावी (8) की हालत गंभीर होने पर उन्हें रायपुर रेफर किया गया। नवीन कुमेटी का इलाज एमसीएच अलबेलापारा में जारी है। लगातार हो रही मौतों के बाद सहायक आयुक्त जया मनु और जिला स्वास्थ्य अधिकारी की टीम ने आश्रम पहुंचकर बच्चों का दोबारा टेस्ट कराया है।

सरकारी सिस्टम की लेटलतीफी का आलम यह है कि मानसून के साथ जुलाई-अगस्त से दिसंबर तक बस्तर में मलेरिया का पीक सीजन रहता है। पहले संभाग में 3-3 साल के रोटेशन पर हर साल औसतन 17 लाख मेडिकेटेड मच्छरदानियां बांटी जाती थीं। हर साल किसी न किसी जिले को सप्लाई जरूर मिलती थी, लेकिन बीते दो वर्षों से यह कोटा पूरी तरह शून्य बना हुआ है। प्रकोप का सीजन आ चुका है और अब तक यह सर्वे तक नहीं हुआ कि किस गांव या जिले में कितनी मच्छरदानियों की जरूरत है। स्वास्थ्य विभाग के मलेरिया कंसल्टेंट एन. चिन्मय दास का कहना है कि इस साल सीजीएमएससी (छत्तीसगढ़ मेडिकल सर्विसेस कार्पोरेशन) के जरिए खरीदी होनी है, जिसकी कागजी प्रक्रिया चल रही है। टेंडर और खरीदी के बाद बांटने में तीन-चार महीने गुजर जाएंगे, यानी इस पूरे सीजन में मच्छरदानी नहीं बंट सकेगी।

मरीजों के प्रकार देखें तो दो परजीवियों वाले मिक्स मलेरिया (डबल अटैक) के 254 पॉजिटिव केस मिले हैं। कुल 8,426 मरीजों में 7,021 पी. फाल्सीपेरम और 1,168 पी. विवैक्स से पीड़ित हैं। जिलेवार स्थिति देखें तो बीजापुर सबसे ज्यादा प्रभावित है, जहां 3173 मरीज मिले हैं। इसके बाद सुकमा में 1686, दंतेवाड़ा में 1344, नारायणपुर में 896, बस्तर में 809, कोंडागांव में 329 और कांकेर में 189 मरीज सामने आए हैं। दंतेवाड़ा के जिला मलेरिया अधिकारी देश दीपक बताते हैं कि मलेरिया किसी भी रूप में हो, शरीर के लिए खतरनाक होता है। मिक्स मलेरिया भी गंभीर चुनौती है, हालांकि राहत की बात है कि मरीजों की संख्या में धीरे-धीरे कमी आ रही है।