जशपुर। छत्तीसगढ़ के जशपुर जिले में शिक्षा विभाग को लेकर जिला प्रशासन ने सख्त रुख अपनाया है। फरसाबहार विकासखंड में शिक्षकों की ओर से की गई शिकायतों के बाद प्रशासन ने विभाग के तीन अधिकारियों पर कार्रवाई की है। इसमें BRC देवेंद्र सिंह को निलंबित किया गया है, जबकि BEO दुर्गेश देवांगन और ABEO रविंद्र साय पैंकरा को उनके वर्तमान कार्यालय से हटाकर दूसरे कार्यालयों में अटैच किया गया है। एक ही विकासखंड से जुड़े तीन अधिकारियों पर हुई कार्रवाई के बाद शिक्षा विभाग में हलचल तेज हो गई है।

शिकायतों में लगाए गए थे गंभीर आरोप
जानकारी के मुताबिक, फरसाबहार विकासखंड के शिक्षकों ने जिला प्रशासन के समक्ष अधिकारियों के कामकाज को लेकर शिकायतें रखी थीं। शिकायतों में कथित आर्थिक शोषण, मानसिक प्रताड़ना, पद के दुरुपयोग और भ्रष्टाचार जैसे गंभीर आरोप लगाए गए थे। शिकायतों की गंभीरता को देखते हुए जिला प्रशासन ने मामले को संज्ञान में लिया और अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की प्रक्रिया आगे बढ़ाई। हालांकि, शिकायतों में लगाए गए आरोपों की पूरी स्थिति जांच और संबंधित प्रशासनिक प्रक्रिया के बाद ही स्पष्ट होगी। प्रशासन की ओर से की गई कार्रवाई को शिकायतों के आधार पर उठाया गया कदम बताया जा रहा है।school

schoolschoolकिस अधिकारी को कहां भेजा गया?
प्रशासनिक आदेश के तहत फरसाबहार के विकासखंड शिक्षा अधिकारी दुर्गेश देवांगन को जिला पंचायत कार्यालय में अटैच किया गया है। वहीं सहायक विकासखंड शिक्षा अधिकारी रविंद्र साय पैंकरा को जिला शिक्षा अधिकारी कार्यालय से संबद्ध किया गया है। इसी कार्रवाई के तहत बीआरसी देवेंद्र सिंह को निलंबित कर दिया गया है। निलंबन अवधि में उनका मुख्यालय विकासखंड शिक्षा अधिकारी कार्यालय, पत्थलगांव निर्धारित किया गया है।

कलेक्टर के निर्देश के बाद कार्रवाई
बताया गया है कि शिक्षकों की शिकायतों के बाद जिला प्रशासन ने मामले को गंभीरता से लिया। कलेक्टर रोहित व्यास के निर्देश पर तीनों अधिकारियों के संबंध में प्रशासनिक कार्रवाई की गई। कार्रवाई के बाद अब शिक्षा विभाग से जुड़े कामकाज और शिकायतों को लेकर आगे की प्रक्रिया पर भी नजर बनी हुई है।

एक ही ब्लॉक के तीन अधिकारियों पर कार्रवाई से मचा हड़कंप
फरसाबहार विकासखंड में शिक्षा विभाग से जुड़े एक साथ तीन अधिकारियों पर कार्रवाई होने से विभागीय स्तर पर चर्चाएं तेज हो गई हैं। खास तौर पर BRC के निलंबन और BEO-ABEO को कार्यालय से हटाकर अटैच किए जाने को प्रशासन की सख्ती के तौर पर देखा जा रहा है। अब आगे की जांच में शिकायतों में लगाए गए आरोपों की वास्तविकता और अधिकारियों की भूमिका को लेकर स्थिति और स्पष्ट होने की उम्मीद है।