सागर। मध्य प्रदेश के सागर जिले में संदिग्ध जहरीली शराब से हुई मौतों का मामला लगातार गंभीर होता जा रहा है। बंडा और शाहगढ़ क्षेत्र के कई गांव इस त्रासदी की चपेट में आए हैं। अलग-अलग रिपोर्टों में मृतकों की संख्या 31 तक पहुंचने का दावा किया जा रहा है, हालांकि सरकारी रिकॉर्ड में मौतों की संख्या इससे कम बताई गई है। ऐसे में वास्तविक मृतक संख्या को लेकर भी स्थिति पूरी तरह स्पष्ट नहीं है। मामले की गंभीरता को देखते हुए मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने अब पूरे घटनाक्रम की न्यायिक जांच कराने का फैसला किया है।

न्यायिक जांच की जिम्मेदारी मध्य प्रदेश हाईकोर्ट के रिटायर्ड जस्टिस विष्णु प्रताप सिंह चौहान को सौंपी गई है। जांच के दायरे में केवल जहरीली शराब बनाने और बेचने वाले लोग ही नहीं, बल्कि इस नेटवर्क को संरक्षण या मदद मिलने और सरकारी स्तर पर संभावित लापरवाही जैसे पहलुओं को भी देखा जा सकता है।

5 सितंबर की रात से शुरू हुआ मौतों का सिलसिला
मामले की शुरुआत 5 सितंबर की रात हुई, जब बंडा और शाहगढ़ इलाके के कई गांवों में संदिग्ध शराब पीने के बाद बड़ी संख्या में लोगों की तबीयत बिगड़ने लगी। उल्टी, घबराहट, बेचैनी और अन्य गंभीर लक्षण सामने आने के बाद मरीजों को अलग-अलग अस्पतालों में भर्ती कराया गया। इसके बाद इलाज के दौरान लगातार मौतों की खबरें सामने आती रहीं। कई मरीजों को बुंदेलखंड मेडिकल कॉलेज पहुंचाया गया। गंभीर मरीजों का आईसीयू में इलाज किया जा रहा है। घटना ने प्रभावित गांवों में कई परिवारों को गहरे सदमे में डाल दिया है।

CM मोहन यादव पहुंचे सागर, न्यायिक जांच का आदेश
मामले के तूल पकड़ने के बाद मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव सागर पहुंचे और अस्पताल में भर्ती मरीजों तथा पीड़ित परिवारों से मुलाकात की। इसके बाद उन्होंने घटना की न्यायिक जांच कराने के निर्देश दिए। सरकार ने संकेत दिया है कि जांच में यदि किसी अधिकारी या कर्मचारी की लापरवाही सामने आती है तो उसकी भी जिम्मेदारी तय की जाएगी। इससे पहले जिला प्रशासन की ओर से मजिस्ट्रियल जांच की प्रक्रिया शुरू की जा चुकी थी।

खेत में तैयार होती थी नकली शराब? जांच में चौंकाने वाला दावा
पुलिस जांच में संदिग्ध शराब तैयार करने के तरीके को लेकर भी कई अहम जानकारियां सामने आ रही हैं। आरोप है कि खेत में ही नकली शराब तैयार करने और उसकी पैकिंग का इंतजाम किया गया था। कथित तौर पर इसे ‘सागर गोल्ड’ नाम देकर बाजार में उतारा गया और पैकिंग ऐसी रखी गई, जिससे सामान्य खरीदार को आसानी से शक न हो। पुलिस अब यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि संदिग्ध शराब की कितनी खेप तैयार हुई, इसे कहां-कहां भेजा गया और इसके निर्माण से लेकर बिक्री तक की पूरी चेन में कौन-कौन शामिल था।

तीन नामों पर जांच का फोकस
मामले की जांच में रवि लखेरा, मनीष लोधी और चंदू राजा के नाम प्रमुख रूप से सामने आने का दावा किया गया है। पुलिस इनके कथित नेटवर्क, शराब तैयार करने में भूमिका और सामग्री की सप्लाई से जुड़े पहलुओं की पड़ताल कर रही है। जांच में सामने आए आरोपों के मुताबिक, शराब तैयार करने के लिए स्पिरिट, बोतल, लेबल और दूसरी सामग्री जुटाई गई थी। हालांकि किस आरोपी की भूमिका कितनी थी और कौन-से आरोप प्रमाणित होते हैं, इसका अंतिम निष्कर्ष पुलिस जांच और न्यायिक प्रक्रिया के बाद ही सामने आएगा।

शराब दुकान के लाइसेंस में ‘दो पहचान’ का सवाल
इस पूरे मामले में शराब दुकान के लाइसेंस से जुड़ा एक और पेचीदा पहलू जांच के घेरे में है। पुलिस कथित तौर पर इस दावे की जांच कर रही है कि यशवंत सिंह और मनीष लोधी एक ही व्यक्ति हैं या नहीं और क्या लाइसेंस हासिल करने के लिए अलग पहचान का इस्तेमाल किया गया था। अब दस्तावेजों, पुलिस सत्यापन और आबकारी विभाग के रिकॉर्ड के जरिए इस दावे की सच्चाई खंगाली जा रही है। यदि आरोप सही पाए जाते हैं तो सवाल यह भी उठेगा कि लाइसेंस जारी करने और सत्यापन की प्रक्रिया में यह मामला पकड़ में क्यों नहीं आया।

सिर्फ आरोपी नहीं, सिस्टम की भूमिका भी जांच के घेरे में
जहरीली शराब से हुई मौतों के बाद मामला अब केवल शराब बनाने और बेचने वालों तक सीमित नहीं रहा है। सवाल आबकारी और प्रशासनिक निगरानी पर भी उठ रहे हैं। इतनी बड़ी मात्रा में संदिग्ध शराब ग्रामीण इलाकों तक कैसे पहुंची और संबंधित एजेंसियों को इसकी भनक समय रहते क्यों नहीं लगी, न्यायिक जांच में इन सवालों के जवाब महत्वपूर्ण होंगे। सरकार ने स्पष्ट किया है कि किसी स्तर पर लापरवाही साबित होने पर संबंधित अधिकारी-कर्मचारी के खिलाफ भी कार्रवाई की जाएगी।

सागर के प्रशासनिक-पुलिस महकमे में भी बदलाव
घटना के बाद सागर संभाग में प्रशासनिक स्तर पर बदलाव भी सामने आए हैं। दिलीप कुमार को नया संभागायुक्त बनाया गया है। वहीं सागर आईजी की जिम्मेदारी इरशाद वली को दी गई है। अब पुलिस जांच के साथ न्यायिक जांच भी इस त्रासदी की परतें खोलेगी। सबसे बड़ा सवाल यही है कि कथित जहरीली शराब का नेटवर्क कितने समय से चल रहा था, इसके पीछे कौन लोग थे और क्या सिस्टम की किसी चूक ने इसे फैलने का मौका दिया ? इन सवालों के जवाब जांच रिपोर्ट आने के बाद ही पूरी तरह साफ हो सकेंगे।