रायपुर। छत्तीसगढ़ के प्रशासनिक गलियारों में इन दिनों वन विभाग के नए मुखिया यानी 'हॉफ' (हेड ऑफ फॉरेस्ट फोर्स) की कुर्सी को लेकर सरगर्मियां तेज हैं। वर्तमान वन बल प्रमुख वी. श्रीनिवास राव इसी महीने के अंत में सेवानिवृत्त हो रहे हैं। ऐसे में प्रदेश के हरे-भरे वनों और वन्यजीव प्रबंधन की कमान अब किसके हाथों में होगी, इसका फैसला आज मंत्रालय (महानदी भवन) में होने वाली हाई-प्रोफाइल डीपीसी (विभागीय पदोन्नति समिति) की बैठक में तय हो जाएगा। हालांकि, नया बॉस चुनना सरकार के लिए इस बार इतना सीधा नहीं है, क्योंकि मुकाबला केवल वरिष्ठता का नहीं, बल्कि 'कार्यकाल की मियाद' का है।

 

वरिष्ठता का पेंच: क्या सरकार खेलेगी 2 महीने का दांव?

 

वन विभाग के टॉप ऑर्डर (पीसीसीएफ) की बात करें तो फिलहाल सभी चार पद भरे हुए हैं। नियमों और वरिष्ठता सूची के चश्मे से देखें तो 1991 बैच के सीनियर आईएफएस अनिल साहू और 1994 बैच के प्रेम कुमार का दावा सबसे मजबूत बैठता है। लेकिन पेंच यहीं फंसा है। इन दोनों ही वरिष्ठ अधिकारियों का रिटायरमेंट इसी साल 31 जुलाई को तय है।

बड़ा सवाल यह है कि क्या राज्य सरकार महज दो महीने (60 दिन) के लिए वन विभाग जैसे भारी-भरकम और अहम महकमे का मुखिया बनाएगी? प्रशासनिक हलकों में यह चर्चा आम है कि इतने छोटे कार्यकाल में कोई भी अधिकारी विभाग के लिए कोई बड़ा विजन या दूरगामी नीतियां लागू नहीं कर सकता। ऐसे में महज 'विदाई सम्मान' के तौर पर ताजपोशी की संभावना कम ही नजर आ रही है।

 

लंबी पारी के खिलाड़ी: रेस में ये दो नाम सबसे हॉट

 

दो महीने के कार्यकाल वाले पेंच के कारण सत्ता का झुकाव उन अधिकारियों की तरफ ज्यादा है, जिनके पास विभाग को देने के लिए एक लंबा वक्त है। इसी 'लॉन्ग टर्म विजन' के समीकरण ने 1992 बैच के कौशलेंद्र कुमार और 1994 बैच के अरुण पांडेय को हॉफ की रेस में सबसे आगे ला खड़ा किया है।

सूत्रों की मानें तो वन विभाग के अगले बॉस के तौर पर इन्हीं दोनों में से किसी एक के नाम पर मुहर लगनी लगभग तय मानी जा रही है। मौजूदा प्रशासनिक समीकरणों में अरुण पांडेय का पलड़ा भारी बताया जा रहा है। उनकी कार्यशैली और प्रशासनिक पकड़ उन्हें इस रेस का फ्रंटरनर बनाती है।

 

पैनल जाएगा UPSC, 10 साल का ट्रैक रिकॉर्ड तय करेगा किस्मत

 

आज होने वाली डीपीसी कोई सामान्य औपचारिकता नहीं है। इसमें मुख्य सचिव की अध्यक्षता के साथ-साथ वन विभाग के प्रमुख सचिव, वर्तमान हॉफ और एक बाहरी राज्य (संभवतः महाराष्ट्र या मध्य प्रदेश) के पीसीसीएफ भी शामिल होंगे। यह समिति दावेदार अधिकारियों के पिछले 10 सालों के गोपनीय प्रतिवेदन (सीआर) की माइक्रो-लेवल पर स्क्रूटनी करेगी। काम का ट्रैक रिकॉर्ड, बेदाग छवि और निर्णय लेने की क्षमता ही इस कुर्सी का असली मापदंड होगी। डीपीसी में छंटनी के बाद फाइनल नामों का पैनल अंतिम मुहर के लिए यूपीएससी (UPSC) भेजा जाएगा।

जुलाई में होगा टॉप लेवल पर बदलाव, खुलेंगे प्रमोशन के रास्ते

वन महकमे में बदलाव का यह दौर केवल हॉफ की कुर्सी तक सीमित नहीं रहेगा। जुलाई में अनिल साहू और प्रेम कुमार के रिटायर होते ही पीसीसीएफ लेवल के दो पद रिक्त हो जाएंगे। इन रिक्तियों के साथ ही विभाग में रुके हुए प्रमोशन का रास्ता भी साफ होगा। इसका सीधा फायदा 1995 बैच के आईएफएस अधिकारी ओपी यादव को मिलेगा, जो वर्तमान में एपीसीसीएफ के पद पर हैं। पदों के खाली होते ही उनकी पीसीसीएफ के रूप में एंट्री पक्की है।

कुल मिलाकर, आज शाम तक यह तस्वीर काफी हद तक साफ हो जाएगी कि छत्तीसगढ़ वन विभाग का अगला खेवनहार कौन होगा।