सूबे के न्यायिक और पुलिस महकमे के गलियारों में इन दिनों एक बेहद दिलचस्प वाकया चर्चा का विषय बना हुआ है। कहावत है ना, जो दूसरों के लिए गड्ढा खोदता है, वह उसमें खुद ही गिर जाता है। यह कहावत इन दिनों सूबे के एक बड़े संभाग में आईजी रैंक के अधिकारी पर बिल्कुल सटीक बैठ रही है। अपने ही मातहतों को नीचा दिखाने की धुन में साहब एक ऐसी गलती कर बैठे कि अब सिर पकड़े बैठे हैं।

 

अति-आत्मविश्वास में लिख दिया ईमेल

 

किस्सा एक जिले के जिला एवं सत्र न्यायाधीश और इन आईजी महोदय के बीच हुई एक वर्चस्व की खींचतान से जुड़ा है। सूत्रों की मानें तो पुलिस और न्यायपालिका के बीच समन तामीली को लेकर अक्सर होने वाली रूटीन चर्चाओं के बीच आईजी साहब कुछ ज्यादा ही अति-आत्मविश्वास (ओवर-कॉन्फिडेंस) में आ गए। उन्होंने सीधे न्यायाधीश महोदय को एक आधिकारिक ईमेल ठोक दिया। मेल का मजमून कुछ यूं था- "आपके यहां से जारी होने वाले सभी समन सीधे मुझे भेज दें, मैं खुद तामील करवा लूंगा।" अंदरखाने की खबर यह है कि साहब का यह कदम न्यायपालिका की मदद कम और अपने नीचे वाले अधिकारियों (विशेषकर एसपी रैंक) को यह दिखाने की कोशिश ज्यादा थी कि महकमे के असली 'बॉस' वही हैं।

 

जज साहब का मास्टरस्ट्रोक और 'ठोक के भाव' में समन

 

लेकिन आईजी साहब शायद भूल गए कि उनका पाला एक बेहद अनुभवी और सख्त न्यायाधीश से पड़ा था। जज साहब ने भी इस 'ईगो' वाले मेल का जवाब कानूनी प्रक्रिया के तहत अपने ही शानदार अंदाज में दिया। कुछ ही दिनों बाद, जब न्यायाधीश महोदय के कार्यालय से संभाग के विभिन्न थानों के लिए 'ठोक के भाव' में समनों का अंबार सीधा आईजी दफ्तर पहुंचने लगा, तो आईजी साहब की हालत पतली हो गई। दफ्तर में समनों का ऐसा बंडल लगा कि उसे संभालना और तामील कराना साहब के लिए गले की फांस बन गया।

 

मिन्नतें हुईं फेल, अब 'आप ही करवाइए'

 

जब पसीना छूटा तो आईजी महोदय को अपनी गलती का अहसास हुआ। आनन-फानन में वे फिर एक बार न्यायाधीश की शरण में पहुंचे। इस बार साहब के सुर पूरी तरह बदले हुए थे। उन्होंने मिन्नतें करते हुए जज साहब से गुजारिश की कि, "हुजूर, कृपया इन समनों को जिले के एसपी को ही भेजा जाए।" लेकिन जज साहब ने जो जवाब दिया, उसने आईजी साहब की बोलती बंद कर दी। न्यायाधीश महोदय ने स्पष्ट कह दिया, नहीं, आपने खुद कहा था, इसलिए अब इसे आप ही तामील करवा दीजिए।अब हालत यह है कि आईजी साहब बुरी तरह फंस चुके हैं। अपने नीचे वाले अधिकारी को नीचा दिखाने के प्रयास में वे खुद ही अपने बिछाए जाल में उलझ गए हैं। न

संभाग के पुलिस महकमे में यह वाकया इन दिनों जमकर चटकारे लेकर सुनाया जा रहा है और हर कोई यही कह रहा है- 'ओवर-कॉन्फिडेंस सेहत के लिए हानिकारक है।'