
रायपुर.। छत्तीसगढ़ मेडिकल सर्विसेज कॉर्पोरेशन (CGMSC) में एक ऐसा गड़बड़झाला सामने आया है, जिसे सुनकर किसी का भी सिर चकरा जाए। यहां नियम-कायदे कोई मायने नहीं रखते, अफसरों की अपनी अलग ही दुनिया चल रही है। पिछले 5 सालों में 1136 करोड़ रुपए कहां और कैसे खर्च हुए, इसका कोई साफ-साफ हिसाब ही नहीं है। हद तो तब हो गई जब सरकारी अस्पताल की इमारतें बनाने के लिए मिले पैसों से धड़ल्ले से मशीनें और उपकरण खरीद लिए गए। अब जब अस्पताल की बिल्डिंग ही नहीं बनेगी, तो ये उपकरण क्या हवा में लटकाए जाएंगे?
प्राइवेट बैंकों में सड़ते रहे 261 करोड़
ऑडिट और जांच में अफसरों की बड़ी पोल खुली है। जो पैसा आम जनता के इलाज और सुविधाओं पर खर्च होना था, उसे बैंक खातों में डंप कर दिया गया। 2021 से 2025 के बीच 261 करोड़ रुपए की भारी-भरकम रकम 26 बैंक खातों में पड़ी-पड़ी सड़ती रही। मजे की बात ये है कि इनमें से 16 खाते तो प्राइवेट बैंकों के हैं। जांच में साफ कहा गया है कि अगर ये पैसा समय पर खर्च किया जाता, तो मरीजों को बहुत अच्छी सुविधाएं मिल सकती थीं, लेकिन अफसरों को पैसा खातों में रखने में ज्यादा मजा आ रहा था।
बिना पूछे 120 करोड़ इधर से उधर
CGMSC के अफसरों ने बड़े अधिकारियों की परमिशन के बिना ही मनमानी की सारी हदें पार कर दीं। 4 साल के अंदर 120 करोड़ 66 लाख रुपए से ज्यादा की रकम निर्माण मद (बिल्डिंग बनाने) से उठाकर चुपचाप उपकरण और सामान्य खाते में डाल दी। इसके अलावा 22 करोड़ 33 लाख रुपए का सीधा पेमेंट भी दूसरे मदों में कर दिया गया। ऑडिट टीम ने जब इसके कागज मांगे, तो वो भी नहीं दिए गए।
2021-22 में 1.46 करोड़ ट्रांसफर।
2022-23 में 31.57 करोड़ शिफ्ट।
2023-24 में सीधे 65.11 करोड़ उपकरणों के लिए भेज दिए।
2024-25 में भी 22.50 करोड़ डायवर्ट कर दिए गए।
वेतन और भत्तों पर दोनों हाथों से लुटाई रकम
सबसे बड़ा मजाक तो वेतन और ऑफिस के खर्चों में हुआ है। पांच अफसरों की टीम ने जब टैली की लेजर बुक देखी, तो आंखें फटी रह गईं। बीते 5 सालों में वेतन और भत्ते के लिए कुल 48 करोड़ रुपए का बजट मिला था, लेकिन अफसरों ने बजट से 5 गुना ज्यादा पैसा खर्च करते हुए 254 करोड़ रुपए उड़ा दिए!
जरा इस जादू को देखिए:
2021-22 में मिले सिर्फ 89.44 लाख, और खर्च कर डाले 53.66 करोड़!
2022-23 में मिले 68.24 लाख, उड़ा दिए 57.04 करोड़!
2023-24 में मिले 1.62 करोड़, और खर्च दिखा दिया 87.54 करोड़!
मतलब तय बजट से 205 करोड़ रुपए ज्यादा सिर्फ भत्तों और सैलरी के नाम पर स्वाहा कर दिए गए। ऐसा लगता है कि कॉर्पोरेशन में नोट छापने की मशीन लगी हुई थी।
साहब ने अभी रिपोर्ट ही नहीं पढ़ी है
इतने बड़े खेल और ऑडिट की आपत्तियों के बारे में जब CGMSC के एमडी रितेश अग्रवाल से बात की गई, तो उनका जवाब भी बड़ा सीधा और रटा-रटाया था। उन्होंने कहा, CGMSC प्रबंधन ने ही ऑडिट करवाया है। अभी मैंने रिपोर्ट नहीं पढ़ी है। मतलब, करोड़ों रुपए इधर से उधर हो गए, भत्तों पर खजाना लुट गया, लेकिन साहब ने अभी तक रिपोर्ट ही नहीं देखी है!