
बिलासपुर/कोटा। जल संसाधन विभाग के बहुचर्चित 'चांटापारा-II एनीकट कम काजवे' घोटाले में जांच एजेंसियों और विभागीय सिंडिकेट की सच्चाई परत दर परत सामने आ रही है। जिस तत्कालीन सहायक अभियंता आई.ए. सिद्दीकी पर धोखाधड़ी, कूटरचना और भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम (अपराध क्रमांक 15/2018) के तहत एफआईआर दर्ज थी, विभाग ने उसे उसी कोटा संभाग का कार्यपालन अभियंता बना दिया, जहां इस घोटाले के सभी मूल दस्तावेज रखे हुए थे। हैरानी की बात यह है कि आरोपी के पदस्थ रहते हुए ही एंटी करप्शन ब्यूरो (एसीबी) ने 26 मई 2023 को अदालत में सबूतों के अभाव वाली क्लोजर रिपोर्ट (खात्मा) पेश कर दी। इसके ठीक एक महीने बाद उसे प्रमोशन दे दिया गया। वर्तमान में यह अफसर शासन की विशेष मेहरबानी से मुख्य अभियंता (चीफ इंजीनियर) के प्रभार पर बैठा है। इस पूरे खेल ने विभाग की कार्यप्रणाली और एसीबी की जांच पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
दागी को वहीं बैठाया, जहां दबाए जा सकते थे साक्ष्य
एफआईआर में नामजद होने के बावजूद 30 सितंबर 2022 को श्री सिद्दीकी को जल संसाधन संभाग कोटा का कार्यपालन अभियंता नियुक्त कर दिया गया। वे 3 जनवरी 2025 तक इसी कुर्सी पर जमे रहे। विभागीय नियम के तहत एनीकट निर्माण से जुड़े सभी मूल अभिलेख, माप पुस्तिका (एमबी), ठेकेदार के देयक (बिल), निरीक्षण प्रतिवेदन और पत्राचार जैसे सभी अहम दस्तावेज इसी संभाग कार्यालय में सुरक्षित रहते हैं। शिकायतकर्ता लक्ष्मीकांत निर्णेजक ने आरोप लगाया है कि इस पदस्थापना का मुख्य उद्देश्य सबूतों को खुर्द-बुर्द करना था। आरोपी के हाथों में कार्यालय की कमान आते ही जरूरी अभिलेख गायब कर दिए गए और जानकारियां दबाई गईं। इसी कार्यकाल के बीच 26 मई 2023 को एसीबी का खात्मा प्रतिवेदन (क्र. 1/2023) न्यायालय में आरोपी के अनुकूल तैयार होकर प्रस्तुत हो गया। बिना मूल दस्तावेजों के तैयार की गई इस क्लोजर रिपोर्ट ने भ्रष्टाचार को संस्थागत संरक्षण देने की पोल खोल दी है।
एसीबी के 19 सवालों पर विभाग ने साधी चुप्पी, 6 रिमाइंडर फाइलों में ....
घोटाले में लीपापोती करने के लिए विभाग ने एसीबी की जांच में पूरी तरह लापरवाही की । 25 जनवरी 2019 को एसीबी ने विभाग से प्रशासकीय स्वीकृति, निविदा, टेस्ट रिपोर्ट और अंतिम बिल समेत 19 अलग-अलग बिंदुओं के रिकार्ड मांगे थे। मामले की गंभीरता को भांपते हुए एसीबी ने विभाग को 6 बार रिमाइंडर भी भेजा मगर इसके बावजूद विभाग ने चुप्पी नहीं तोड़ी और न ही कोई जानकारी साझा की। गौरतलब है कि जब 4 अक्टूबर 2024 को कोर्ट में तत्कालीन विवेचक और रिटायर एसपी एस.पी. करोसिया ने इस बात को स्वीकार किया कि विभाग ने अग्रिम जांच के लिए आवश्यक जानकारी उपलब्ध नहीं कराई। चौंकाने वाली बात यह है कि एसीबी ने सीआरपीसी की धारा 91 के तहत दस्तावेज जब्त करने के अपने कानूनी अधिकार का इस्तेमाल किए बिना ही केस बंद कर दिया। जांच एजेंसी की यह कार्यप्रणाली खुद एक बड़े घोटाले की ओर इशारा कर रही है।
सुप्रीम कोर्ट के आदेश की उड़ी धज्जियां, सह-आरोपियों की वेतनवृद्धि रोकी और मुख्य आरोपी को प्रमोशन
विभागीय पदोन्नति समिति (डीपीसी) की बैठक में आरोपी को दी गई सतर्कता निकासी (विजिलेंस क्लीयरेंस) नियमों के बिलकुल विपरीत है। सुप्रीम कोर्ट ने 'के.वी. जानकीरमन प्रकरण (1991)' में साफ निर्देश दिए हैं कि आपराधिक या विभागीय जांच लंबित होने पर संबंधित अधिकारी का प्रमोशन 'सीलबंद लिफाफा प्रक्रिया' (Sealed Cover Procedure) के तहत रखा जाना चाहिए। इन निर्देशों को दरकिनार करते हुए 28 जून 2023 को सिद्दीकी को कार्यपालन अभियंता और फिर 25 फरवरी 2026 को अधीक्षण अभियंता (एसई) बना दिया गया। चौंकाने वाला तथ्य यह है कि इसी मामले में शामिल दो अन्य अधिकारियों की वेतनवृद्धि रोक दी गई है, जबकि मुख्य आरोपी को प्रमोशन की सीढ़ियां चढ़ाई गईं। यह सीधे तौर पर संविधान के अनुच्छेद 14 (समानता के अधिकार) का खुला उल्लंघन है।
फाइलों से ऐसे गायब किया गया 'काजवे'
यह पूरा फर्जीवाड़ा 17 सितंबर 2009 को शुरू हुआ था। सरकारी दस्तावेजों में प्रशासकीय स्वीकृति "चांटापारा-II एनीकट कम काजवे" के नाम से ली गई थी। योजना के तहत ऐसी संरचना बननी थी जिससे पानी भी रुके और ग्रामीण उस पर से आवाजाही भी कर सकें। लेकिन तकनीकी स्वीकृति के वक्त फाइलों में ऐसा खेल हुआ कि 'काजवे' शब्द ही गायब कर दिया गया। मौके पर सिर्फ एक साधारण एनीकट का निर्माण हुआ और काजवे के नाम पर स्वीकृत लाखों रुपये की भारी-भरकम राशि ठिकाने लगा दी गई। खात्मा रिपोर्ट में भी कूटरचना की इन धाराओं पर एसीबी ने कोई जांच नहीं की।
तारीखों में दर्ज मेहरबानी का खेल
- 01 सितंबर 2018: आरोपी अफसर पर एफआईआर दर्ज हुई।
- 25 जनवरी 2019: एसीबी ने 19 बिंदुओं पर जानकारी मांगी, 6 रिमाइंडर भेजे गए।
- 30 सितंबर 2022: आरोपी सिद्दीकी कोटा के ईई बने, जांच फाइलें उनके ही नियंत्रण में आईं।
- 26 मई 2023: मूल दस्तावेजों के बिना एसीबी ने कोर्ट में खात्मा रिपोर्ट पेश कर दी।
- 28 जून 2023: खात्मा पेश होने के महज एक महीने बाद सिद्दीकी का ईई पद पर प्रमोशन हुआ।
- 25 फरवरी 2026: खात्मा स्वीकार होने के बाद अधीक्षण अभियंता बने, अब मुख्य अभियंता का प्रभार।
मूल अभिलेख सीलबंद करने और निलंबन की उठी मांग
इस बड़े खुलासे के बाद अब शिकायतकर्ता ने शासन से मांग की है कि दागी अफसर की दोनों पदोन्नतियां और मुख्य अभियंता का प्रभार तत्काल प्रभाव से निरस्त कर उन्हें निलंबित किया जाए। साथ ही, किस नियम के तहत एफआईआर में नामजद आरोपी को उसी संभाग में पदस्थ किया गया, उन उच्चाधिकारियों की भूमिका की भी उच्च स्तरीय जांच हो। परिवादी ने बचे हुए सभी मूल अभिलेखों को तत्काल जब्त कर सीलबंद करने की अपील की है