बिलासपुर : छोटे पर्सनल लोन का झांसा देकर दस्तावेज और ओटीपी हासिल करने के बाद लाखों रुपये के अतिरिक्त लोन स्वीकृत कराने के दो चौंकाने वाले मामले छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट में सामने आए हैं l दोनों मामलों में आरोप है कि डायरेक्ट सेलिंग एजेंटों ने याचिकाकर्ताओं की सहमति के बिना अलग-अलग बैंकों और वित्तीय कंपनियों से कुल 1 करोड़ 41 लाख 51 हजार 680 रुपये के पर्सनल लोन स्वीकृत करा लिए । हैरानी की बात यह है कि इन लोन की राशि का बड़ा हिस्सा याचिकाकर्ताओं के खातों में नहीं पहुंचा, लेकिन उनकी जिम्मेदारी में लाखों रुपये का कर्ज दर्ज हो गया ।

मामलों की सुनवाई करते हुए हाई कोर्ट ने संबंधित बैंकों और रिकवरी एजेंटों को फिलहाल याचिकाकर्ताओं के खिलाफ किसी भी प्रकार की दंडात्मक कार्रवाई नहीं करने का निर्देश दिया है । एक मामले में कोर्ट ने बैंक ऑफ बड़ौदा, अंबिकापुर शाखा के मैनेजर को 1 सितंबर 2026 को व्यक्तिगत रूप से उपस्थित होकर जवाब देने का निर्देश दिया है कि उचित सिबिल स्कोर और ऋण पात्रता की जांच किए बिना लोन कैसे स्वीकृत और वितरित किया गया ।

5.40 लाख के लोन की जरूरत थी, 46.20 लाख का कर्ज चढ़ा

सीआईएमएस में स्टाफ नर्स के पद पर कार्यरत वर्षा बेक ने अधिवक्ता अनिरुद्ध सिंह के माध्यम से हाई कोर्ट में याचिका दायर की है । याचिका के मुताबिक अप्रैल 2023 में स्पैश एडवाइजर प्राइवेट लिमिटेड के डायरेक्ट सेलिंग एजेंट मनोज कुमार भगत ने फोन कर पर्सनल लोन दिलाने की पेशकश की थी । वर्षा बेक केवल आदित्य बिड़ला कैपिटल से 5.40 लाख रुपये का लोन लेने के लिए सहमत हुई थीं । लोन प्रक्रिया के नाम पर एजेंट ने आधार कार्ड, पैन कार्ड, सैलरी स्लिप समेत अन्य दस्तावेज वाट्सएप के जरिए हासिल किए और ओटीपी भी साझा कराया गया ।

याचिका में आरोप है कि इसके बाद उनकी सहमति के बिना विभिन्न बैंकों और वित्तीय संस्थाओं से करीब 46.20 लाख रुपये के कई पर्सनल लोन स्वीकृत करा दिए गए । आरोप है कि आपत्ति करने पर एजेंट ने लोन की 50 प्रतिशत राशि अपने खातों में ट्रांसफर करने और ईएमआई खुद चुकाने का भरोसा दिया । कुछ महीनों तक ईएमआई का भुगतान करने के बाद किस्तें बंद कर दी गई । इसके बाद रिकवरी एजेंटों द्वारा याचिकाकर्ता और उसके परिवार को कथित रूप से परेशान और सार्वजनिक रूप से अपमानित किए जाने का आरोप लगाया गया है ।

बैंक मैनेजर से कोर्ट ने मांगा जवाब

मामले की सुनवाई जस्टिस ए के प्रसाद की सिंगल बेंच में हुई । कोर्ट ने बैंक ऑफ बड़ौदा, अंबिकापुर शाखा के मैनेजर को व्यक्तिगत रूप से उपस्थित होकर यह बताने का निर्देश दिया है कि सिबिल स्कोर और ऋण पात्रता की पर्याप्त जांच के बिना लोन किस प्रक्रिया के तहत स्वीकृत और वितरित किया गया । मामले की अगली सुनवाई दो सप्ताह बाद होगी ।

पांच लाख के लोन की जगह 95.31 लाख का कर्ज

दूसरा मामला आयुर्वेदिक कॉलेज, बिलासपुर में पदस्थ कर्मचारी हरि लाल पोया से जुड़ा है । उन्होंने भी अधिवक्ता अनिरुद्ध सिंह के माध्यम से हाई कोर्ट में याचिका दायर की है । याचिका के अनुसार सितंबर 2023 में स्पैश एडवाइजर प्राइवेट लिमिटेड की डायरेक्ट सेलिंग एजेंट पूजा यादव ने फोन कर पर्सनल लोन दिलाने की पेशकश की थी । हरि लाल पोया ने केवल चोला मंडलम इन्वेस्टमेंट एंड फाइनेंस कंपनी लिमिटेड से 5 लाख रुपये का लोन लेने की सहमति दी थी । आरोप है कि दस्तावेज और ओटीपी हासिल करने के बाद उनकी जानकारी या सहमति के बिना चोला मंडलम, आदित्य बिड़ला कैपिटल, एक्सिस बैंक, आईसीआईसीआई बैंक, यस बैंक और फिनबल टेक्नोलॉजीज से कुल 95 लाख 31 हजार 680 रुपये के कई पर्सनल लोन स्वीकृत करा दिए गए ।

याचिकाकर्ता का आरोप है कि एजेंट ने लोन की 50 प्रतिशत राशि अपने खातों में ट्रांसफर करने को कहा और ईएमआई चुकाने का भरोसा दिलाया । कुछ महीनों तक किस्तों का भुगतान करने के बाद ईएमआई बंद कर दी गई । इसके बाद रिकवरी एजेंटों द्वारा याचिकाकर्ता और उनके परिवार को कथित रूप से परेशान और अपमानित किया गया ।

दस्तावेज और ओटीपी बने मुसीबत

दोनों मामलों में सामने आया पैटर्न लगभग एक जैसा है । याचिकाकर्ताओं को सीमित राशि का लोन दिलाने का भरोसा दिया गया । इसके बाद आधार, पैन, सैलरी स्लिप जैसे दस्तावेज और ओटीपी लिए गए । आरोप है कि इन्हीं जानकारियों का इस्तेमाल कर उनकी जानकारी के बिना कई वित्तीय संस्थाओं से अतिरिक्त लोन स्वीकृत करा दिए गए ।

अब दोनों याचिकाकर्ताओं पर कुल 1.41 करोड़ रुपये से अधिक के कर्ज का दावा सामने आने के बाद मामला हाई कोर्ट पहुंचा है । कोर्ट के अंतरिम आदेश से फिलहाल याचिकाकर्ताओं को रिकवरी और दंडात्मक कार्रवाई से राहत मिली है । साथ ही बैंकिंग प्रक्रिया और लोन स्वीकृति में हुई कथित अनियमितताओं पर भी कोर्ट की नजर है ।