बिलासपुर। रेलवे में आरक्षित टिकटों की कथित दलाली के खिलाफ आरपीएफ ने कार्रवाई करते हुए करगीरोड रेलवे आरक्षण केंद्र में पदस्थ मुख्य वाणिज्य लिपिक को गिरफ्तार किया है। आरपीएफ के मुताबिक, आरोपी बिना आरक्षण मांग पत्र के यात्रियों के टिकट बनाकर कथित तौर पर एक एजेंट को देता था और इसके बदले प्रति यात्री 200 से 300 रुपये कमीशन लेता था।

मुखबिर की सूचना पर आरक्षण केंद्र में दबिश
आरपीएफ को सूचना मिली थी कि करगीरोड आरक्षण केंद्र से आरक्षित टिकटों की कथित दलाली की जा रही है। सूचना के आधार पर टीम ने कार्रवाई की। मौके पर मुख्य वाणिज्य लिपिक चंद्रप्रकाश विश्वकर्मा आरक्षित टिकट बनाते हुए मिला।

जांच के दौरान उसके पास PNR 2164155098 का 1,470 रुपये मूल्य का काउंटर टिकट मिला। इसके बाद आरपीएफ ने उसके मोबाइल फोन की जांच की तो वाट्सऐप चैट में कई टिकटों से जुड़ी जानकारी सामने आई।

मोबाइल में 14 टिकटों का रिकॉर्ड
आरपीएफ के अनुसार, मोबाइल से मिली जानकारी में कुल 14 टिकट सामने आए। इनमें 3 पुराने टिकटों की कीमत 9,280 रुपये, जबकि 11 आगामी यात्राओं के टिकटों की कीमत 65,470 रुपये बताई गई है। इस तरह कुल टिकटों का मूल्य 74,720 रुपये सामने आया।

आरपीएफ ने टिकट बनाने और उपलब्ध कराने से संबंधित वाट्सऐप चैट भी बरामद की है। चैट की 14 पेज की प्रिंट कॉपी तैयार कर उसे केस की जांच में शामिल किया गया है। मोबाइल फोन भी जब्त किया गया है।

जैतहरी के एजेंट के कहने पर टिकट बनाने का आरोप
जांच में आरपीएफ को कथित तौर पर यह जानकारी मिली कि चंद्रप्रकाश विश्वकर्मा जैतहरी निवासी एजेंट वीरेंद्र केंवट के कहने पर टिकट बनाता था। कार्रवाई के दौरान भी आरोपी LTT से गोरखपुर जाने का टिकट बनाने में लगा हुआ था।

आरपीएफ अब जब्त मोबाइल, वाट्सऐप चैट और टिकटों की जानकारी के आधार पर पूरे मामले की जांच कर रही है। जांच का फोकस इस बात पर है कि टिकटों की कथित दलाली में और कौन-कौन लोग जुड़े हैं और यह नेटवर्क कितने समय से संचालित हो रहा था।

मामले में जांच आगे बढ़ने के साथ अन्य लोगों की भूमिका भी सामने आने की संभावना जताई जा रही है।