
बिलासपुर. यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों में घिरे निलंबित आईपीएस (IPS) रतनलाल डांगी के मामले में पुलिस मुख्यालय को अंततः बिलासपुर हाईकोर्ट की सख्ती के आगे झुकना पड़ा है। मामले में पक्षपात के आरोपों और अदालत के कड़े रुख के बाद विभाग ने इस बहुचर्चित मामले में जांच अधिकारी बदल दिए हैं। पुराने अफसरों को जांच से हटाकर अब एडीजी (ADG) रैंक के अधिकारी को यह अहम जिम्मेदारी सौंपी गई है।
पहल खास: मामले की 3 बड़ी बातें
जांच टीम में बदलाव: पीड़िता की कड़ी आपत्ति और हाईकोर्ट के नोटिस के बाद पुराने जांच अधिकारियों को किनारे कर दिया गया है।
नई टीम का गठन: अब ADG रैंक के अफसर दीपांशु काबरा नए जांच अधिकारी (IO) होंगे, जबकि IG प्रशांत कुमार अग्रवाल को प्रस्तुतकर्ता अधिकारी बनाया गया है।
गंभीर आरोप: निलंबित IPS पर पुलिस महकमे की ही महिला ने अश्लील वीडियो कॉल करने और पति को झूठे केस में फंसाने की धमकी देने का आरोप लगाया है।
पुराने जांच अधिकारियों पर पीड़िता ने क्यों उठाया था सवाल?
शुरुआती जाँच के दौरान पुलिस मुख्यालय ने इस संवेदनशील मामले की जांच आईजी आनंद छाबड़ा और डीआईजी मिलना कुर्रे को सौंपी थी। लेकिन पीड़िता ने हाईकोर्ट में याचिका लगाकर इन दोनों अधिकारियो पर अविश्वास जताया था। महिला का तर्क था कि आईजी आनंद छाबड़ा और आरोपी डांगी सामान रैंक के अधिकारी है। इसके अलावा, छाबड़ा के खिलाफ महादेव सट्टा ऐप का केस पहले से ही कोर्ट में लंबित है।
वहीं, डीआईजी मिलना कुर्रे रैंक के हिसाब से डांगी से जूनियर हैं। पीड़िता का सीधा आरोप था कि ये दोनों अधिकारी डांगी को बचाने की कवायद में जुटे हैं और जांच को जानबूझकर भटका रहे हैं। पीड़िता ने किसी महिला आईएएस (IAS) अफसर से पूरे मामले की निष्पक्ष पड़ताल कराने की मांग की थी।
जानें क्या है पूरा मामला
राज्य सरकार ने मार्च 2026 में रतनलाल डांगी को सस्पेंड किया था। शिकायत के अनुसार, डांगी ने महिला को वीडियो कॉल कर अश्लील हरकतें कीं और वॉट्सऐप पर लगातार गंदे मैसेज भेजे। जब महिला ने इसका कड़ा विरोध किया, तो डांगी ने उसके पति का तबादला नक्सल प्रभावित इलाके में करवाने की धमकी दी। साथ ही, पति को झूठे केस में फंसाकर पूरे परिवार को बर्बाद करने की धमकियां भी दी गईं।
आरोप है कि शुरुआत में विभाग ने इस शिकायत को दबाने की भरपूर कोशिश की, लेकिन पानी सिर से ऊपर जाने पर मजबूरी में निलंबन की कार्रवाई करनी पड़ी। इसके बावजूद, सस्पेंशन के 90 दिन गुजरने के बाद भी महकमे ने डांगी के खिलाफ कोई चार्जशीट पेश नहीं की। विभाग की इसी हीलाहवाली और लापरवाही से तंग आकर पीड़िता ने न्याय के लिए हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया।
कोर्ट की फटकार के बाद महकमे में मचा हड़कंप
पिछली सुनवाई में हाईकोर्ट ने पुलिस के काम करने के तरीके को आड़े हाथों लेते हुए गृह विभाग और पुलिस मुख्यालय को नोटिस थमाया था। तय समय के भीतर शपथ पत्र के साथ जवाब तलब किया गया था। कोर्ट की इस फटकार के बाद महकमे में हड़कंप मच गया। अपनी किरकिरी टालने के लिए पुलिस मुख्यालय ने अब कोर्ट में जवाब दाखिल कर दावा किया है कि प्रारंभिक जांच पूरी कर ली गई है। डीजीपी दफ्तर ने गृह सचिव को नया मसौदा भेजकर नई जांच टीम (दीपांशु काबरा और प्रशांत अग्रवाल) का खाका तैयार कर लिया है। अब अगले हफ्ते हाईकोर्ट में होने वाली सुनवाई पर सबकी निगाहें टिकी हैं।