रायपुर। पूर्व केंद्रीय गृह मंत्री पी. चिदंबरम के वैचारिक नक्सलियों के समर्थन वाले बयान को लेकर छत्तीसगढ़ में सियासत गरमा गई है। भाजपा नेता नरेश चंद्र गुप्ता ने चिदंबरम के बयान पर पलटवार करते हुए कहा कि नक्सल हिंसा का सबसे ज्यादा असर झेल चुके छत्तीसगढ़ के लोगों के लिए ऐसा बयान पीड़ादायक है।

गुप्ता ने कहा कि छत्तीसगढ़ में नक्सली हिंसा के दौरान बड़ी संख्या में आदिवासी, ग्रामीण और सुरक्षाबल के जवान मारे गए। कई परिवारों ने अपने लोगों को खोया। ऐसे में नक्सल विचारधारा के समर्थन की बात करना उन परिवारों के दर्द को नजरअंदाज करना है।

चिदंबरम के कार्यकाल का भी उठाया सवाल

गुप्ता ने पी. चिदंबरम के केंद्रीय गृह मंत्री रहते नक्सल हिंसा की घटनाओं का जिक्र किया। उन्होंने कहा कि 2010 में दंतेवाड़ा के ताड़मेटला क्षेत्र में सीआरपीएफ के 76 जवानों की मौत हुई थी। यह देश के सबसे बड़े नक्सली हमलों में शामिल था।

उन्होंने ज्ञानेश्वरी एक्सप्रेस हादसे का भी जिक्र किया। गुप्ता ने कहा कि उस दौर में देश के कई हिस्सों में नक्सली हिंसा गंभीर चुनौती बनी हुई थी। छत्तीसगढ़ इसका सबसे बड़ा केंद्र रहा।

सत्ता में रहते नीति पर सवाल, अब बयान पर घेरा

भाजपा नेता ने कहा कि चिदंबरम जब गृह मंत्री थे, तब नक्सलवाद से निपटने की केंद्र सरकार की रणनीति पर लगातार सवाल उठते रहे। अब उनके बयान से कांग्रेस की नक्सलवाद को लेकर सोच पर सवाल खड़े हो रहे हैं।

गुप्ता ने कहा कि जिन सुरक्षाबलों ने नक्सल प्रभावित इलाकों में जान गंवाई, उनके परिवार आज भी उस दौर का दर्द झेल रहे हैं। ऐसे में नक्सल विचारधारा के समर्थन को लेकर दिया गया कोई भी बयान राजनीतिक बहस से आगे जाकर उन परिवारों के जख्मों को कुरेदता है।

उन्होंने कांग्रेस से चिदंबरम के बयान पर अपना रुख स्पष्ट करने की मांग की। साथ ही कहा कि छत्तीसगढ़ की जनता नक्सल हिंसा का समर्थन करने वाली किसी भी सोच को स्वीकार नहीं करेगी।