जल संसाधन विभाग भ्रष्टाचार • 1.4 मीटर की जगह सिर्फ 0.35 मीटर गहरा फ्लोर बनाया

बिलासपुर। जिले के कोटा स्थित जल संसाधन विभाग के बहुचर्चित चांटापारा-टू एनीकट कम काजवे निर्माण घोटाले में भ्रष्टाचार और उसे दबाने का सबसे बड़ा सबूत सामने आया है। वर्ष 2015 से 2020 के बीच चार बार क्षतिग्रस्त हुए इस एनीकट में 1.4 मीटर की जगह महज 0.35 मीटर गहरा फ्लोर बनाया गया। मामले में तत्कालीन सहायक अभियंता और एफआईआर में नामजद मुख्य आरोपी आई.ए. सिद्दीकी को बचाने के लिए विभाग ने विधानसभा में गलत जानकारी पेश की। चौंकाने वाली बात यह है कि जिस कार्यालय में घोटाले के मूल दस्तावेज और ठेकेदार के बिल रखे थे, शासन ने मुख्य आरोपी सिद्दीकी को वहीं कार्यपालन अभियंता बनाकर बैठा दिया।

4 बार क्षतिग्रस्त, फिर भी लीपापोती

विभागीय दस्तावेजों के मुताबिक चांटापारा एनीकट पहली बार वर्ष 2015 में क्षतिग्रस्त हुआ। कोटा के कार्यपालन अभियंता के 31 दिसंबर 2015 के पत्र (क्रमांक 4266) में आरडी 20 से 60 मीटर के बीच बाडीवाल और सिस्टर्न फ्लोर में भारी क्षति दर्ज है। वर्ष 2016 में एनीकट फिर ढह गया। 15 मार्च 2017 के पत्राचार में खुलासा हुआ कि मौके पर एण्डसील सिस्टर्न फ्लोर की गहराई 1.4 मीटर के बजाय सिर्फ 0.35 मीटर पाई गई, जिसके बाद इसे पूर्णतया अनुपयोगी करार दिया गया। 6 अप्रैल 2017 को मुख्य अभियंता की रिपोर्ट में सामने आया कि नदी का तल 2.60 मीटर नीचे चला गया है और बेड प्रोटेक्शन का काम नहीं हुआ है।

जब ये रिपोर्ट आईं, तब आई.ए. सिद्दीकी 23 नवंबर 2016 से 9 सितंबर 2017 तक कोटा उपसंभाग-2 के अनुविभागीय अधिकारी (एसडीओ) थे और पत्रों की प्रतिलिपि उन्हें भेजी गई थी। इसके बावजूद 2019 और 2020 में एनीकट तीसरी और चौथी बार क्षतिग्रस्त हुआ। 27 नवंबर 2020 के निरीक्षण में अधिकारियों ने स्पष्ट लिखा कि संरचना ठीक नहीं हुई है और इसमें आगे पैसा लगाना शासन का नुकसान है।

आदेशों में विरोधाभास: बिना गड़बड़ी दो अफसरों पर गिरी गाज

मामले को रफा-दफा करने के लिए विभाग ने विरोधाभासी आदेश निकाले। 25 फरवरी 2019 को शासन ने जांच के बाद कहा कि प्रत्यक्ष वित्तीय क्षति नहीं हुई है। लेकिन इसी आदेश में लापरवाही का हवाला देकर जी.के. फतनानी और कमलेश्वर सिंह की एक-एक वेतनवृद्धि रोक दी गई। शिकायतकर्ता लक्ष्मीकांत निर्णेजक ने सवाल उठाया है कि जब आर्थिक क्षति नहीं हुई तो दो अधिकारियों को सजा क्यों दी गई और एफआईआर में नामजद मुख्य आरोपी आई.ए. सिद्दीकी को क्यों छोड़ दिया गया? बाद में 15 जनवरी 2021 को शासन ने खुद स्वीकार किया कि निर्माण में भारी भ्रष्टाचार हुआ है और शासन को नुकसान पहुंचा है।

आरोपी को ही बना दिया दस्तावेजों का रखवाला

शासन ने 2 फरवरी 2021 को भ्रष्टाचार से जुड़े 10 बिंदुओं पर जानकारी मांगी थी। इसके मूल रिकॉर्ड और ठेकेदार के बिल कोटा संभाग में रखे थे। विभाग ने 30 सितंबर 2022 को एफआईआर में नामजद आरोपी सिद्दीकी को उसी कोटा संभाग का कार्यपालन अभियंता नियुक्त कर दिया। दागी अफसर 3 जनवरी 2025 तक इस पद पर काबिज रहे। इस दौरान शासन रिमाइंडर भेजता रहा, लेकिन 10 बिंदुओं का जवाब कार्यालय से बाहर नहीं गया।

अलग-अलग मंच, अलग-अलग जवाब: विधानसभा अध्यक्ष से शिकायत

शिकायत के अनुसार, विभाग ने विधानसभा में गलत जानकारी प्रस्तुत की, जिससे जांच की गंभीरता कम हुई और सिद्दीकी समेत अन्य आरोपियों को लाभ मिला। वहीं, महालेखाकार को कई वर्षों के स्मरण पत्रों के बाद दिए उत्तर में विभाग ने माना कि एनीकट में क्षति हुई है और मरम्मत की जरूरत है। शिकायतकर्ता ने मांग की है कि विधानसभा में असत्य उत्तर देने वाले अधिकारियों के विरुद्ध कार्रवाई के लिए प्रकरण विधानसभा अध्यक्ष को भेजा जाए और प्रधान महालेखाकार से एनीकट के निर्माण व भुगतानों की विशेष लेखा परीक्षा कराई जाए।

काजवे शब्द उड़ाकर किया गया फर्जीवाड़ा

प्रोजेक्ट की शुरुआत 17 सितंबर 2009 को हुई थी। प्रशासकीय स्वीकृति 'चांटापारा-टू एनीकट कम काजवे' के नाम से जारी हुई थी। तकनीकी स्वीकृति के दौरान दस्तावेजों में हेराफेरी कर 'काजवे' शब्द हटा दिया गया। मौके पर सिर्फ एनीकट बना और काजवे के लाखों रुपये का गोलमाल कर दिया गया।बिना मूल दस्तावेजों के खात्मा, सुप्रीम कोर्ट के नियम ताक पर रखकर प्रमोशन

      दस्तावेज दबाने का सीधा फायदा आरोपी को मिला। एंटी करप्शन ब्यूरो (एसीबी) ने 25 जनवरी 2019 को 19 बिंदुओं पर जानकारी मांगी और 6 रिमाइंडर भेजे। विभाग ने दस्तावेज नहीं दिए। ब्यूरो ने धारा 91 का उपयोग नहीं किया और 26 मई 2023 को बिना मूल दस्तावेजों के न्यायालय में क्लोजर (खात्मा) रिपोर्ट पेश कर दी। रिपोर्ट पेश होने के एक महीने बाद 28 जून 2023 को सिद्दीकी को पदोन्नत कर दिया गया। विभागीय समिति ने सुप्रीम कोर्ट के 'के.वी. जानकीरमन प्रकरण' के सीलबंद लिफाफा नियम की अनदेखी की। वर्तमान में वही अफसर मुख्य अभियंता के प्रभार पर कार्यरत है। शिकायतकर्ता ने अब दागी अफसर की पदोन्नति निरस्त कर तत्काल निलंबन की मांग की है।