रायपुर। छत्तीसगढ़ के सिंचाई विभाग में इन दिनों बड़ा खेल चल रहा है भ्रष्टाचार के गंभीर आरोप में जेल की हवा खा चुके और 18 महीने तक निलंबित रहे अफसर मैक्सी कुजूर को अब विभाग का सबसे बड़ा पद सौंपने की तैयारी की जा रही है खबर है कि विष्णुदेव साय (ज़ीरो टॉलरेंस) सरकार में मैक्सी कुजूर को प्रमुख अभियंता या ईएनसी बनाया जा सकता है यह जानकारी सामने आते ही प्रशासनिक अमले में हड़कंप मच गया है । 

हर तरफ यही सवाल उठ रहा है कि जिस अधिकारी को रमन सरकार के समय एंटी करप्शन ब्यूरो ने रंगे हाथों रिश्वत लेते पकड़ा था आखिर उसे अब सिर पर क्यों बिठाया जा रहा है
मैक्सी कुजूर फिलहाल सिंचाई विभाग के सचिव राजेश टोप्पो के ओएसडी के रूप में काम कर रहे हैं विभागीय सूत्रों की मानें तो मैक्सी कुजूर की विभाग के एक पूर्व ईएनसी से काफी करीबी है इसी रसूख और सांठगांठ के चलते अब उन्हें सिंचाई महकमे का सर्वोच्च पद देने की पूरी बिसात बिछाई जा चुकी है यह फैसला हैरान करने वाला है क्योंकि विष्णुदेव सरकार भ्रष्टाचार पर जीरो टॉलरेंस की बात करती है ऐसे में एक ऐसे अफसर को करोड़ों के बजट वाले विभाग की कमान सौंपना सरकार की नीयत पर सीधे सवाल खड़े करता है ।


मैक्सी कुजूर का विवादों से पुराना नाता 

मैक्सी कुजूर का विवादों और भ्रष्टाचार से पुराना नाता रहा है यह पूरा घूसकांड दिसंबर 2014 का है उस वक्त कुजूर राजनांदगांव जिले के छुईखदान में सिंचाई विभाग में एग्जीक्यूटिव इंजीनियर के पद पर तैनात थे वहां प्रधान पाथ बैराज का निर्माण कार्य चल रहा था आरोप था कि कुजूर ने विनीत सिंह कंस्ट्रक्शन कंपनी के कर्मचारी लक्ष्मीकांत से रुके हुए बिल पास करने के एवज में रिश्वत की मांग की थी कुजूर ने 11 लाख से ज्यादा के रनिंग बिल का कुछ प्रतिशत हिस्सा मांगा था जो करीब 54 हजार रुपये तय हुआ था।

ठेकेदार के कर्मचारी ने की थी शिकायत....

ठेकेदार के कर्मचारी ने इसकी लिखित शिकायत एंटी करप्शन ब्यूरो में कर दी इसके बाद ब्यूरो ने जाल बिछाया 30 दिसंबर 2014 को भिलाई के सिविक सेंटर के पास एक होटल के नजदीक मैक्सी कुजूर को 54 हजार रुपये की रिश्वत लेते रंगे हाथों गिरफ्तार कर लिया गया मौके पर ही उनके हाथों का रंग लाल हो गया था इसके तुरंत बाद उनके भिलाई और छुईखदान स्थित घरों पर भी छापे मारे गए गिरफ्तारी के बाद शासन ने उन पर सख्त एक्शन लिया और 30 दिसंबर को ही उन्हें सस्पेंड कर दिया गया उनका यह निलंबन 18 महीने तक चला था ।

इस गिरफ्तारी के बाद कुजूर को बचाने की बहुत कोशिशें हुईं शुरुआत में सिंचाई विभाग ने उन पर मुकदमा चलाने की अनुमति देने में खूब आनाकानी की लेकिन बाद में विधि विभाग ने कड़ा रुख अपनाते हुए इसकी मंजूरी दे दी 2015 में दुर्ग की स्पेशल एंटी करप्शन कोर्ट में उनके खिलाफ चार्जशीट पेश की गई मैक्सी कुजूर ने बिलासपुर हाईकोर्ट जाकर इस मुकदमे को रोकने की बहुत कोशिश की लेकिन 2017 में हाईकोर्ट ने उनकी याचिका खारिज कर दी और साफ कहा कि मुकदमा चलेगा
इसके बाद दुर्ग की स्पेशल कोर्ट ने मामले की सुनवाई की और 26 जून 2018 को अपना कड़ा फैसला सुनाया कोर्ट ने मैक्सी कुजूर को भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत दोषी माना और उन्हें 5 साल की कठोर कैद के साथ जुर्माने की सजा सुनाई इस सजा के बाद एक रसूखदार अफसर को जेल की सलाखों के पीछे जाना पड़ा था।

अभियोजन पक्ष यह साबित नहीं कर पाया अपराध....

हालांकि इस कहानी में एक बड़ा मोड़ 2023 में आया मैक्सी कुजूर ने निचली अदालत के फैसले को हाईकोर्ट में चुनौती दी थी 31 अगस्त 2023 को हाईकोर्ट ने उन्हें बरी कर दिया अदालत में अभियोजन पक्ष यह साबित नहीं कर पाया कि कुजूर ने रिश्वत की स्पष्ट मांग की थी इसके अलावा ट्रैप की प्रक्रिया में कई खामियां पाई गईं और मौके पर कोई पुख्ता स्वतंत्र गवाह नहीं मिला सबूतों की कमी और कानूनी दांवपेच के सहारे वे साफ बच निकले
अब यही बड़ा सवाल है कि भले ही अदालत ने सबूतों के अभाव और तकनीकी आधार पर मैक्सी कुजूर को बरी कर दिया हो लेकिन क्या उनके दामन पर लगा भ्रष्टाचार का यह दाग पूरी तरह धुल गया है क्या एक ऐसे अफसर को पूरे राज्य की सिंचाई व्यवस्था सौंपना सुरक्षित है जिस पर सरेआम घूस लेने का ठप्पा लग चुका हो विष्णुदेव सरकार को यह तय करना होगा कि वह दागी अफसरों को संरक्षण देगी या अपने सुशासन के वादे पर कायम रहेगी फिलहाल सिंचाई विभाग में इस ताजपोशी को लेकर भारी सुगबुगाहट और आक्रोश का माहौल है ।