मानसून के मौसम में बुखार, बदन दर्द, उल्टी, कमजोरी या पेट खराब होने जैसी समस्याएं बढ़ जाती हैं। ऐसे लक्षण सामने आने पर अक्सर डेंगू की आशंका होने लगती है। आमतौर पर डेंगू को तेज बुखार, सिरदर्द और मांसपेशियों या जोड़ों में दर्द से जोड़कर देखा जाता है, लेकिन हर संक्रमित व्यक्ति में एक जैसे लक्षण दिखाई दें, यह जरूरी नहीं है।

कुछ लोगों में डेंगू का संक्रमण बेहद हल्के लक्षणों के साथ हो सकता है, जबकि कुछ मामलों में लक्षण असामान्य रूप में भी सामने आ सकते हैं। इसलिए केवल बुखार की मौजूदगी या गैर-मौजूदगी के आधार पर डेंगू को पूरी तरह खारिज करना सही नहीं माना जाता।

क्या बिना बुखार के डेंगू हो सकता है?
डेंगू संक्रमण का सबसे आम लक्षण बुखार है, लेकिन हर व्यक्ति में बीमारी एक जैसी नहीं होती। कुछ संक्रमित लोगों में बहुत हल्के लक्षण हो सकते हैं या कोई स्पष्ट लक्षण भी नहीं दिख सकता। कुछ मामलों में बुखार प्रमुख लक्षण नहीं होता और मरीज कमजोरी, शरीर दर्द या पेट से जुड़ी परेशानियों की शिकायत कर सकता है।

हालांकि, सिर्फ कमजोरी, उल्टी या पेट दर्द होने का मतलब डेंगू होना नहीं है। इन लक्षणों के कई अन्य कारण भी हो सकते हैं। यदि आपके इलाके में डेंगू के मामले बढ़ रहे हैं और अचानक ऐसे लक्षण दिखाई देते हैं, तो डॉक्टर से सलाह लेना बेहतर है।

क्या है एटिपिकल डेंगू?
जब डेंगू संक्रमण में सामान्य लक्षणों के बजाय असामान्य या अलग तरह के लक्षण प्रमुखता से दिखाई देते हैं, तो इसे आम बोलचाल में एटिपिकल डेंगू कहा जाता है। ऐसे मामलों में मरीज को पेट से जुड़ी समस्याएं अधिक परेशान कर सकती हैं।

संभावित लक्षणों में शामिल हैं:

  • लगातार उल्टी या मतली
  • पेट में दर्द
  • दस्त या पाचन संबंधी परेशानी
  • अत्यधिक कमजोरी या थकान
  • सिरदर्द
  • आंखों के आसपास या आंखों के पीछे दर्द
  • मांसपेशियों और जोड़ों में दर्द
  • भूख कम लगना
  • त्वचा पर लाल चकत्ते या दाने

दुर्लभ और गंभीर परिस्थितियों में डेंगू शरीर के महत्वपूर्ण अंगों को भी प्रभावित कर सकता है। इसलिए असामान्य लक्षणों को हल्के में नहीं लेना चाहिए।

बुखार उतरने के बाद भी क्यों जरूरी है सावधानी?
डेंगू को लेकर एक आम गलतफहमी है कि बुखार कम होते ही मरीज खतरे से बाहर आ जाता है। वास्तव में बीमारी के कुछ मामलों में बुखार कम होने के आसपास का समय भी महत्वपूर्ण हो सकता है। इसी अवधि में गंभीर डेंगू के संकेत विकसित हो सकते हैं। इसलिए मरीज का बुखार कम होने के बाद भी उसकी स्थिति पर नजर रखना जरूरी है। शरीर में पानी की कमी, कमजोरी, रक्तस्राव या अन्य गंभीर लक्षण दिखाई देने पर तुरंत चिकित्सकीय सहायता लेनी चाहिए।

ये लक्षण दिखें तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें
डेंगू की आशंका के दौरान कुछ चेतावनी संकेतों को बिल्कुल नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। जैसे:

  • तेज या लगातार पेट दर्द
  • बार-बार उल्टी
  • सांस लेने में परेशानी
  • नाक या मसूड़ों से खून आना
  • उल्टी या मल में खून आना
  • अत्यधिक बेचैनी या असामान्य सुस्ती
  • अचानक कमजोरी बढ़ना
  • शरीर में पानी की कमी के संकेत

ऐसे लक्षण गंभीर बीमारी की ओर इशारा कर सकते हैं और इनमें तत्काल चिकित्सकीय मूल्यांकन जरूरी हो सकता है।

केवल प्लेटलेट्स देखकर डेंगू की गंभीरता तय नहीं होती
डेंगू के दौरान प्लेटलेट्स की संख्या कम हो सकती है, लेकिन केवल प्लेटलेट काउंट देखकर बीमारी की गंभीरता तय करना सही तरीका नहीं है। डॉक्टर मरीज के लक्षण, ब्लड टेस्ट, रक्तस्राव के संकेत, पानी की स्थिति और अन्य चिकित्सकीय मानकों को देखकर बीमारी का आकलन करते हैं। इसलिए रिपोर्ट में प्लेटलेट्स कम देखकर खुद से दवा लेना या घबराना उचित नहीं है। इसी तरह सामान्य प्लेटलेट्स होने पर भी गंभीर लक्षणों को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए।

डेंगू की आशंका हो तो क्या करें?
अगर आपके आसपास डेंगू के मामले सामने आ रहे हैं और आपको अचानक कमजोरी, उल्टी, शरीर में दर्द, पेट की परेशानी या त्वचा पर दाने जैसे लक्षण महसूस होते हैं, तो डॉक्टर से सलाह लें। जरूरत पड़ने पर चिकित्सक उचित जांच की सलाह दे सकते हैं।

डेंगू में पर्याप्त तरल पदार्थ लेना महत्वपूर्ण हो सकता है, लेकिन इलाज और दवाओं का चुनाव डॉक्टर की सलाह के अनुसार ही करना चाहिए। किसी भी दवा को, खासकर दर्द या बुखार की दवा को, खुद से लेने से पहले चिकित्सकीय सलाह लेना बेहतर है।

डेंगू का सबसे आम लक्षण बुखार जरूर है, लेकिन हर संक्रमित व्यक्ति में एक जैसे लक्षण दिखाई दें, यह जरूरी नहीं। कुछ मामलों में लक्षण बेहद हल्के या असामान्य हो सकते हैं। खासकर डेंगू के प्रकोप वाले मौसम में लगातार कमजोरी, उल्टी, पेट दर्द, शरीर दर्द या रक्तस्राव जैसे लक्षणों को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए।

डिस्क्लेमर: यह लेख केवल सामान्य स्वास्थ्य जानकारी के उद्देश्य से है। लक्षणों के आधार पर डेंगू की पुष्टि नहीं की जा सकती। डेंगू की जांच और उपचार के लिए योग्य डॉक्टर की सलाह और आवश्यक चिकित्सकीय जांच जरूरी है। गंभीर लक्षण होने पर तुरंत चिकित्सा सहायता लें।