बिलासपुर : केंद्रीय सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता राज्यमंत्री और रिपब्लिकन पार्टी ऑफ इंडिया के राष्ट्रीय अध्यक्ष रामदास अठावले ने आरक्षण को लेकर बड़ा बयान दिया है। बुधवार को बिलासपुर प्रेस क्लब में पत्रकारों से चर्चा करते हुए उन्होंने कहा कि आरक्षण खत्म करने की बात तभी हो सकती है, जब देश से जातिवाद और जातिगत भेदभाव पूरी तरह खत्म हो जाए। उन्होंने कहा कि आज भी समाज के कई हिस्सों में दलितों और आदिवासियों के साथ भेदभाव की घटनाएं सामने आती हैं। ऐसे में आरक्षण को खत्म करने की मांग उचित नहीं है।

अठावले ने कहा कि आरक्षण ऐतिहासिक रूप से वंचित वर्गों को आगे बढ़ाने और उन्हें बराबरी का अवसर देने का माध्यम है। एससी, एसटी और ओबीसी के साथ-साथ आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों के लिए आरक्षण की व्यवस्था सामाजिक संतुलन के लिए जरूरी है। उन्होंने कहा कि समाज में वास्तविक समानता आने के बाद ही आरक्षण की जरूरत पर भविष्य में विचार किया जा सकता है।

जातीय जनगणना से सामने आएगी वास्तविक तस्वीर

जातीय जनगणना के सवाल पर अठावले ने कहा कि इससे देश में अलग-अलग जातियों की वास्तविक आबादी और उनकी सामाजिक स्थिति का आंकड़ा सामने आएगा। आबादी के अनुपात में प्रतिनिधित्व देने पर भी भविष्य में चर्चा हो सकती है। उनका कहना था कि सामाजिक न्याय का मतलब किसी एक वर्ग को दूसरे के खिलाफ खड़ा करना नहीं, बल्कि सभी को बराबरी का अवसर देना है। जातिगत भेदभाव खत्म करने के लिए उन्होंने अंतरजातीय विवाह और सामाजिक मेलजोल बढ़ाने पर भी जोर दिया। अपने निजी जीवन का उदाहरण देते हुए अठावले ने बताया कि उनकी पत्नी ब्राह्मण समाज से हैं और वे स्वयं दलित समाज से आते हैं। उन्होंने कहा कि समाज में दूरी कम होगी तो समानता की राह भी मजबूत होगी।

निजी क्षेत्र में नहीं मिला रहा आरक्षण, जताई चिंता

अठावले ने निजी क्षेत्र में रोजगार बढ़ने और सरकारी नौकरियों के अवसर सीमित होने पर चिंता जताई। उन्होंने कहा कि सरकारी संस्थानों के निजी क्षेत्र में जाने के बाद आरक्षण का लाभ उसी रूप में नहीं मिल पाता। उन्होंने युवाओं से केवल सरकारी नौकरी पर निर्भर रहने के बजाय कौशल विकास, स्वरोजगार और छोटे उद्योगों की ओर बढ़ने की अपील की। महिला आरक्षण को लेकर उन्होंने कहा कि राजनीति में महिलाओं की भागीदारी बढ़ना जरूरी है। उन्होंने डॉ. भीमराव अंबेडकर के महिला अधिकारों से जुड़े प्रयासों का उल्लेख करते हुए महिलाओं को शिक्षा, संपत्ति और राजनीतिक अधिकार देने की वकालत की।

छत्तीसगढ़ में आरपीआई को मजबूत करने की तैयारी

अठावले ने छत्तीसगढ़ में अपनी पार्टी को मजबूत करने का भी ऐलान किया। उन्होंने कहा कि सतनामी, दलित, ओबीसी, ब्राह्मण, वैश्य सहित सभी समाजों को साथ लेकर संगठन का विस्तार किया जाएगा। उनका दावा है कि आने वाले समय में आरपीआई छत्तीसगढ़ में अपनी अलग राजनीतिक पहचान मजबूत कर सकती है।

भाजपा से गठबंधन पर बोलेसीट मिली तो साथ लड़ेंगे

आगामी विधानसभा चुनाव में भाजपा के साथ गठबंधन के सवाल पर अठावले ने साफ कहा कि आरपीआई एनडीए का हिस्सा है। यदि भाजपा उनकी पार्टी को सीट देती है तो गठबंधन के तहत चुनाव लड़ने पर विचार किया जाएगा। उन्होंने कहा कि भाजपा 4-5 सीटें देती है तो उस पर बात हो सकती है, जबकि पर्याप्त सीटें नहीं मिलने पर आरपीआई अपने दम पर करीब 8 से 10 सीटों पर उम्मीदवार उतारने की तैयारी कर सकती है। अठावले ने कहा कि पिछले विधानसभा चुनाव में उनकी पार्टी ने छत्तीसगढ़ में कोई सीट नहीं लड़ी थी और भाजपा के पक्ष में प्रचार किया था। अब पार्टी संगठन को मजबूत कर आगामी चुनाव में अधिक सक्रिय भूमिका निभाने की तैयारी है।

राहुल गांधी पर भी साधा निशाना

अठावले ने कहा कि राहुल गांधी को सरकार की आलोचना करने का पूरा अधिकार है, लेकिन आरोप तथ्य के आधार पर लगाए जाने चाहिए। उन्होंने दावा किया कि 2029 के लोकसभा चुनाव में भी नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में एनडीए की सरकार बनेगी।