बिलासपुर : छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट ने न्यायिक सेवा में अधिकारियों की वरिष्ठता को लेकर महत्वपूर्ण फैसला सुनाया है। जस्टिस राकेश मोहन पांडेय की सिंगल बेंच ने स्पष्ट किया कि न्यायिक अधिकारी की वरिष्ठता भर्ती का विज्ञापन जारी होने की तारीख से नहीं, बल्कि सेवा में वास्तविक नियुक्ति की तारीख से तय होगी।

ग्रेडेशन लिस्ट को कोर्ट ने माना गलत

मामला अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश वंदना दीपक देवांगन की वरिष्ठता से जुड़ा था। उन्होंने हाई कोर्ट प्रशासन की ओर से जारी वरिष्ठता सूची को चुनौती दी थी। उनका तर्क था कि नियुक्ति पहले होने के बावजूद उन्हें बाद में नियुक्त हुए अधिकारियों से नीचे रखा गया।

याचिकाकर्ता की नियुक्ति पहले हुई थी

याचिकाकर्ता की ओर से अधिवक्ता रोहित शर्मा ने कोर्ट को बताया कि 2006 के नियमों के तहत आपसी वरिष्ठता नियुक्ति की तारीख और योग्यता सूची में स्थिति के आधार पर तय होनी चाहिए। वंदना देवांगन की नियुक्ति 26 जून 2014 को हुई थी, जबकि संबंधित निजी प्रतिवादियों की नियुक्ति 30 अक्टूबर 2014 को हुई। इसके बावजूद वरिष्ठता सूची में उन्हें निजी प्रतिवादियों से नीचे रखा गया था। इसको लेकर उन्होंने कई बार अभ्यावेदन भी दिए, लेकिन समाधान नहीं होने पर वर्ष 2021 में हाई कोर्ट में याचिका दायर की।

प्रशासन ने दिया विज्ञापन पहले जारी होने का तर्क

हाई कोर्ट प्रशासन की ओर से कहा गया कि संबंधित निजी प्रतिवादियों के लिए भर्ती का विज्ञापन पहले जारी हुआ था। प्रशासनिक कारणों से उनकी नियुक्ति बाद में हुई, इसलिए केवल नियुक्ति की तारीख के आधार पर उन्हें कनिष्ठ नहीं माना जाना चाहिए।

अदालत ने वरिष्ठता सूची संशोधित करने कहा

कोर्ट ने प्रशासन के इस तर्क को स्वीकार नहीं किया। सिंगल बेंच ने कहा कि वरिष्ठता के निर्धारण में भर्ती विज्ञापन की तारीख निर्णायक नहीं हो सकती। इसके लिए सेवा में वास्तविक नियुक्ति की तारीख महत्वपूर्ण होगी। अदालत ने याचिका स्वीकार करते हुए हाई कोर्ट प्रशासन को वरिष्ठता यानी ग्रेडेशन लिस्ट में आवश्यक संशोधन करने का निर्देश दिया है। फैसला न्यायिक सेवा में वरिष्ठता निर्धारण के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है।