
बिलासपुर : जिले के ग्रामीण क्षेत्रों से गुजर रही हाईटेंशन ट्रांसमिशन लाइनों से खेतों में विद्युत प्रभाव और ग्रामीणों की सुरक्षा से जुड़े मामले में बिलासपुर हाई कोर्ट ने केंद्र सरकार को कड़ी फटकार लगाई है। चीफ जस्टिस रमेश सिन्हा और जस्टिस रविंद्र कुमार अग्रवाल की डिवीजन बेंच ने केंद्रीय विद्युत प्राधिकरण की कमेटी की रिपोर्ट लगातार लंबित रहने पर केंद्र सरकार पर 10 हजार रुपये का जुर्माना लगाया है। कोर्ट ने स्पष्ट कर दिया है कि रिपोर्ट पेश करने के लिए अब और समय नहीं दिया जाएगा। मामले की अगली सुनवाई 8 अक्टूबर 2026 को होगी। कोर्ट ने निर्देश दिया है कि इस तारीख से पहले कमेटी की रिपोर्ट हर हाल में रिकॉर्ड पर पेश की जाए।
आठ से दस गांवों में हाईटेंशन लाइनें
मामला बिलासपुर-रतनपुर राष्ट्रीय राजमार्ग के आसपास के करीब आठ से दस गांवों का है। इन गांवों में खेतों के ऊपर से 400 से 800 केवी तक की हाईटेंशन ट्रांसमिशन लाइनें गुजर रही हैं। ग्रामीणों ने शिकायत की थी कि बिजली लाइनों के कारण खेतों में काम करने के दौरान परेशानी होती है और आसपास विद्युत प्रभाव महसूस किया जाता है। ग्रामीणों का दावा है कि बड़ी संख्या में खेत और कृषि भूमि ट्रांसमिशन टावरों तथा लाइनों से प्रभावित हैं। सुरक्षा को लेकर भी ग्रामीणों में चिंता बनी हुई है। केंद्रीय विद्युत प्राधिकरण की रिपोर्ट में अमटारा, कछार, लोफंदी, मोहतराई, लछनपुर, नवागांव, मदनपुर और भरारी गांवों से हाईटेंशन लाइनों के गुजरने की जानकारी सामने आई थी।
तकनीकी जांच के दिए थे निर्देश
ग्रामीणों की शिकायतों को गंभीरता से लेते हुए हाई कोर्ट ने 15 जुलाई 2024 को केंद्र सरकार के मुख्य विद्युत निरीक्षक और संबंधित प्राधिकरण को प्रभावित क्षेत्रों का निरीक्षण करने के निर्देश दिए थे। कोर्ट ने यह भी कहा था कि ट्रांसमिशन लाइनों के नीचे आने वाली कृषि भूमि के मालिकों को किसी प्रकार की असुविधा या परेशानी नहीं होनी चाहिए। तकनीकी जांच में यह पता लगाने को कहा गया था कि बिजली लाइनों के कारण कहीं विद्युत प्रेरण (इंडक्शन) या अन्य तकनीकी समस्या तो नहीं हो रही है। यदि कोई समस्या सामने आती है तो उसके समाधान के लिए जरूरी उपाय भी सुझाने के निर्देश दिए गए थे।
रिपोर्ट के बाद भी नहीं हुआ समाधान
केंद्रीय विद्युत प्राधिकरण ने निरीक्षण के बाद 9 सितंबर 2024 को कमेटी की रिपोर्ट पेश की थी। इसके बाद बिजली कंपनियों ने रिपोर्ट तैयार करने में इस्तेमाल किए गए तकनीकी मानकों और दस्तावेजों की जानकारी मांगी। हाई कोर्ट ने संबंधित तकनीकी मानक और दस्तावेज रिकॉर्ड पर रखने के निर्देश दिए। इसके बाद 25 अक्टूबर 2024 को उपचारात्मक उपायों यानी समस्या के समाधान के लिए आवश्यक कदम सुझाने वाली कमेटी गठित की गई। लेकिन इसके बाद भी रिपोर्ट कोर्ट में पेश नहीं हो सकी।
मिले कई अवसर, फिर भी रिपोर्ट नहीं
रिपोर्ट पेश करने के लिए केंद्र सरकार को कोर्ट की ओर से कई अवसर दिए गए। 20 अगस्त 2024 को तीन सप्ताह, इसके बाद 26 नवंबर 2024, 23 जनवरी 2025, 4 मार्च 2025 और 20 मार्च 2025 को भी समय दिया गया। 20 मार्च 2025 को चार सप्ताह का अंतिम अवसर दिया गया था। इसके बावजूद 1 सितंबर 2026 तक कमेटी की रिपोर्ट कोर्ट के रिकॉर्ड पर नहीं आ सकी।
अब और नहीं मिलेगा समय
हाई कोर्ट ने नाराजगी जताते हुए कहा कि केंद्र सरकार को पहले ही कई अवसर दिए जा चुके हैं। बार-बार समय मिलने के बावजूद रिपोर्ट पेश नहीं की गई। इसी वजह से कोर्ट ने अब 10 हजार रुपये का जुर्माना लगाया और केंद्र सरकार को अंतिम अवसर दिया है। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि 8 अक्टूबर 2026 की अगली सुनवाई से पहले 25 अक्टूबर 2024 को गठित कमेटी की उपचारात्मक उपायों से संबंधित रिपोर्ट अनिवार्य रूप से पेश करनी होगी। अब रिपोर्ट के लिए कोई अतिरिक्त समय नहीं दिया जाएगा।