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रायपुर। संस्कार और शुचिता का दावा करने वाली सियासत के गलियारों से एक ऐसी सड़ांध उठी है जिसने पूरी व्यवस्था को नंगा कर दिया है. इंदौर के बहुचर्चित हनीट्रैप 2026 मामले में क्राइम ब्रांच ने एक बड़ा और सनसनीखेज खुलासा करते हुए सागर की भाजपा नेत्री रेशू चौधरी को धर दबोचा है. रेशू कोई मामूली कार्यकर्ता नहीं बल्कि हनीट्रैप की मास्टरमाइंड श्वेता विजय जैन की वह खास शागिर्द है जिसने सत्ता और रसूख के नशे में चूर नेताओं अफसरों और कारोबारियों को अपने हुस्न और खुफिया कैमरों के जाल में फंसाकर जमकर ब्लैकमेल किया. शायद इसे ही आजकल राजनीति में आत्मनिर्भर बनने का सबसे तेज और आधुनिक शॉर्टकट माना जाता है.
इस पूरे गंदे खेल का भंडाफोड़ तब हुआ जब शराब कारोबारी हितेंद्र सिंह चौहान उर्फ चिंटू ठाकुर ने ब्लैकमेलिंग और धमकाने की पुलिस में शिकायत दर्ज कराई. इसके बाद जब क्राइम ब्रांच ने रेशू को दबोचा तो ऐसे राज बाहर आए कि भोपाल से लेकर दिल्ली तक कई सफेदपोशों की धड़कनें रुक सी गई हैं. जांच में साफ हो गया है कि 2019 के कुख्यात हनीट्रैप कांड के बाद श्वेता जैन ने जेल की सलाखों के पीछे ही अपने नए नेटवर्क की बुनियाद रख दी थी. अलका दीक्षित से श्वेता की दोस्ती जेल में ही हुई और फिर कोर्ट पेशी के दौरान श्वेता ने महत्वाकांक्षी रेशू चौधरी को इस सिंडिकेट का सबसे अहम मोहरा बना दिया.
रेशू चौधरी का प्रोफाइल किसी शातिर फिल्मी अपराधी से कम नहीं है. डीसीपी क्राइम राजेश त्रिपाठी के मुताबिक 32 साल की यह नेत्री विदेश से पढ़ाई कर चुकी है और तलाकशुदा है. अपनी हाईप्रोफाइल लाइफस्टाइल और फर्राटेदार अंग्रेजी के दम पर वह किसी भी बड़े नेता या अफसर का भरोसा चुटकियों में जीत लेती थी. भाजपा से जुड़ने के बाद पार्टी और सरकारी कामकाज का चोला ओढ़कर उसने बड़े दरबारों में बेखौफ एंट्री ली. जब शिकार पूरी तरह जाल में फंस जाता तो खुफिया कैमरों से बेडरूम के राज रिकॉर्ड कर लिए जाते थे और फिर शुरू होता था मोटी रकम ऐंठने का नंगा नाच.
इस ब्लैकमेलिंग नेटवर्क के तार सिर्फ मध्य प्रदेश तक सीमित नहीं हैं. छत्तीसगढ़ में तैनात एक डीआईजी स्तर का पुलिस अधिकारी भी इस हुस्न के जाल में बुरी तरह फंस चुका है. बताया जा रहा है कि इंदौर के एक लग्जरी होटल में रेशू ने उस वर्दी वाले अफसर का बकायदा वीडियो तैयार कर लिया था. इसके अलावा निमाड़ और दिल्ली के कई विधायक और जनप्रतिनिधि भी इस गैंग के रडार पर थे. हद तो तब हो गई जब एक विधायक का आपत्तिजनक वीडियो बाकायदा एक कांग्रेस नेता तक पहुंचा दिया गया ताकि राजनीतिक सौदेबाजी की जा सके.
रेशू और श्वेता की तमाम रणनीतियां भोपाल में बैठकर तय होती थीं. अब क्राइम ब्रांच साइबर और फोरेंसिक एक्सपर्ट्स की मदद से रेशू के मोबाइल व्हाट्सएप चैट और तमाम डिलीट किए गए ऑडियो वीडियो रिकवर करने में जुटी है. मामले की गंभीरता का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि इंटेलिजेंस शाखा में पदस्थ प्रधान आरक्षक विनोद शर्मा से भी कड़ी पूछताछ की जा रही है क्योंकि उसके पास भी इस गैंग के बनाए गए वीडियो फॉरवर्ड किए गए थे. रक्षक ही जब इस गंदे खेल का हिस्सा बन जाएं और राजनीतिक संरक्षण में यह डर्टी पिक्चर बेखौफ चलती रहे तो समझ लेना चाहिए कि सिस्टम पूरी तरह सड़ चुका है.
पुलिस ने आरोपियों पर साजिश की धाराएं बढ़ा दी हैं और अब उन तमाम रसूखदारों की नींद उड़ी हुई है जिनके चेहरे इन डिजिटल फाइलों में कैद हैं. आज जिन नेताओं को जनता अपना नुमाइंदा समझकर चुनती है वही बंद कमरों में अपनी कमजोरियों का सौदा कर रहे हैं. रेशू चौधरी जैसी महिलाएं राजनीतिक चोले का इस्तेमाल सिर्फ सत्ता की दलाली और ऐशो आराम के लिए कर रही हैं. यह मामला बताता है कि कैसे खाकी और खादी दोनों ही वासना के दलदल में गले तक डूबे हुए हैं. आने वाले दिनों में जब फोरेंसिक रिपोर्ट सामने आएगी तो कई बड़े चेहरों से नकाब नोचे जाएंगे और तब पता चलेगा कि जनता के रहनुमा असल में कितने दागदार हैं.