रांची: Jharkhand में नक्सल विरोधी अभियान के बीच सुरक्षा बलों को बड़ी सफलता मिली है। राज्य के इतिहास में पहली बार 27 माओवादियों ने एक साथ आत्मसमर्पण कर मुख्यधारा में लौटने का फैसला किया है। राजधानी रांची में आयोजित कार्यक्रम के दौरान वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों और CRPF की मौजूदगी में इन उग्रवादियों ने हथियार छोड़ दिए। आत्मसमर्पण करने वालों में सारंडा और कोल्हान क्षेत्र में सक्रिय माओवादी संगठन तथा प्रतिबंधित JJMP से जुड़े सदस्य शामिल बताए जा रहे हैं। इस घटनाक्रम को नक्सल नेटवर्क के लिए बड़ा झटका माना जा रहा है।

सुरक्षा एजेंसियों के अनुसार, सरेंडर करने वाले उग्रवादियों में कई हार्डकोर नक्सली भी शामिल हैं, जिन पर लाखों रुपये का इनाम घोषित था। इन माओवादियों ने आत्मसमर्पण के दौरान INSAS राइफल, SLR, पिस्टल, वॉकी-टॉकी और भारी मात्रा में जिंदा कारतूस सुरक्षा बलों के हवाले किए। पुलिस रिकॉर्ड के मुताबिक, ये सभी हत्या, सुरक्षाबलों पर हमले, विस्फोट और लेवी वसूली समेत सैकड़ों आपराधिक मामलों में शामिल रहे हैं। लगातार चलाए जा रहे संयुक्त ऑपरेशन और दबाव के कारण नक्सल संगठन कमजोर पड़ते नजर आ रहे हैं।image-4-19

राज्य सरकार ने स्पष्ट किया है कि आत्मसमर्पण करने वाले सभी उग्रवादियों को पुनर्वास नीति के तहत आर्थिक सहायता, प्रशिक्षण और समाज में दोबारा बसाने की सुविधा दी जाएगी। अधिकारियों का कहना है कि सरकार अब सिर्फ सुरक्षा कार्रवाई ही नहीं, बल्कि विकास और पुनर्वास मॉडल के जरिए भी नक्सल प्रभावित इलाकों में स्थायी शांति स्थापित करने पर जोर दे रही है। सुरक्षा विशेषज्ञों के अनुसार, इतनी बड़ी संख्या में एक साथ हुए सरेंडर से झारखंड में नक्सली गतिविधियों पर बड़ा असर पड़ सकता है।