इंदौर। आमतौर पर किसी घर में भगवान गणेश की एक-दो प्रतिमाएं नजर आती हैं, लेकिन इंदौर में एक ऐसा घर है जहां प्रवेश करते ही हर तरफ गणपति के अलग-अलग रूप दिखाई देते हैं। बंगाली चौराहे के पास रहने वाले CA राजकुमार शाह ने करीब दो दशक में गणेश प्रतिमाओं का ऐसा अनोखा संसार तैयार किया है, जिसमें 5 हजार से ज्यादा प्रतिमाएं शामिल हैं। घर के दरवाजे से लेकर कमरों और हॉल तक बप्पा के इतने रूप नजर आते हैं कि हर प्रतिमा अपने आप में एक अलग कहानी सुनाती है।

बप्पा के ऐसे रूप, जिन्हें देखकर ठहर जाएंगी नजरें
इस अनोखे कलेक्शन की खासियत सिर्फ इसकी संख्या नहीं, बल्कि गणपति के रूपों में दिखाई देने वाली कल्पनाशीलता है। कहीं गणेशजी किताब हाथ में लिए नजर आते हैं तो कहीं वकील की पोशाक में। कुछ प्रतिमाओं में वे क्रिकेट खेलते दिखाई देते हैं, तो किसी में लैपटॉप पर काम करते हुए। कहीं बप्पा नृत्य कर रहे हैं, कहीं शतरंज की बिसात के सामने बैठे हैं और कई प्रतिमाओं में उन्हें अलग-अलग वाद्य यंत्र बजाते हुए दिखाया गया है। आकार, रंग, मुद्रा और चेहरे के भाव में इतनी विविधता है कि एक जैसी दो प्रतिमाएं ढूंढना भी मुश्किल हो जाता है। यही विविधता राजकुमार के संग्रह को सामान्य धार्मिक संग्रह से अलग बनाती है।इंदौर में राजकुमार शाह के घर मौजूद गणेश प्रतिमाओं का कलेक्शन। - Dainik Bhaskar

ग्रीटिंग कार्ड से शुरू हुआ शौक, फिर बना हजारों प्रतिमाओं का संसार
राजकुमार शाह का यह जुनून अचानक शुरू नहीं हुआ था। शुरुआत गणेशजी की तस्वीरों वाले ग्रीटिंग कार्ड जमा करने से हुई। धीरे-धीरे यह रुचि प्रतिमाओं तक पहुंची और 2003 के आसपास उन्होंने अलग-अलग जगहों से गणेश प्रतिमाएं जुटाना शुरू किया। इसके बाद यात्राओं, मेलों, बाजारों और अलग-अलग शहरों से गुजरते हुए जब भी उन्हें गणपति का कोई अनोखा रूप दिखाई देता, उसे अपने संग्रह में शामिल करने की कोशिश करते। देखते ही देखते वर्षों का यह शौक 5 हजार से अधिक प्रतिमाओं के विशाल संग्रह में बदल गया।दो दशक में तैयार हुआ 5 हजार से ज्यादा गणेश प्रतिमाओं का कलेक्शन।

सब्जी और नारियल से लेकर सोने तक के गणपति
राजकुमार के संग्रह में गणेश प्रतिमाओं की दुनिया भी उतनी ही रंग-बिरंगी है जितनी उनकी संख्या। मिट्टी, लकड़ी, सिरेमिक और विभिन्न धातुओं से बनी प्रतिमाओं के साथ यहां सब्जियों और नारियल से तैयार किए गए गणपति भी देखने को मिलते हैं। कलेक्शन में पीपल के पत्ते पर बनाए गए सोने के गणेश और अमेरिकन डायमंड से सजी कलाकृतियां भी मौजूद हैं। कुछ प्रतिमाएं पूरी तरह पारंपरिक शैली में हैं, जबकि कुछ आधुनिक कल्पना का खूबसूरत उदाहरण हैं। इन्हीं में कहीं बप्पा क्रिकेट खेलते हैं तो कहीं आधुनिक तकनीक के साथ नजर आते हैं।5 हजार से ज्यादा प्रतिमाओं में गणेशजी के अलग-अलग रूप।

महाराष्ट्र से लेकर इंडोनेशिया और थाईलैंड तक की झलक
राजकुमार की यात्राएं भी उनके इस संग्रह को लगातार नया रूप देती रही हैं। देश के अलग-अलग राज्यों से जुटाई गई प्रतिमाओं के साथ उनके पास इंडोनेशिया, मलेशिया और थाईलैंड से लाई गई गणेश प्रतिमाएं भी हैं। महाराष्ट्र की प्रतिमाओं का संग्रह विशेष रूप से बड़ा है। इसके अलावा अलग-अलग कलाकारों द्वारा हाथ से तैयार की गई कई अनूठी कलाकृतियां भी इस घर का हिस्सा हैं। अलग-अलग देशों और संस्कृतियों में भगवान गणेश को किस तरह चित्रित किया गया है, इसकी झलक भी इस संग्रह में दिखाई देती है।किताब, लैपटॉप और वाद्य यंत्रों वाले गणेश के अलग-अलग रूप।

रोज 3-4 घंटे सिर्फ बप्पा की देखभाल में
इतनी बड़ी संख्या में प्रतिमाओं को संभालना अपने आप में बड़ी जिम्मेदारी है। राजकुमार की पत्नी सीमा शाह के मुताबिक, संग्रह की प्रतिमाओं की नियमित सफाई की जाती है और इसमें रोज करीब 3 से 4 घंटे लग जाते हैं। हालांकि, परिवार के लिए यह कोई बोझ नहीं बल्कि बप्पा के प्रति जुड़ाव और श्रद्धा का हिस्सा है।राजकुमार शाह के घर में सहेजी गईं गणेश प्रतिमाएं।

अब दोस्तों के लिए भी तय है ‘गणपति वाला गिफ्ट’
राजकुमार के इस अनोखे शौक से उनके दोस्त और रिश्तेदार भी अच्छी तरह परिचित हैं। यही वजह है कि जन्मदिन या किसी खास अवसर पर उन्हें सामान्य उपहारों के बजाय अक्सर गणेश प्रतिमा ही मिलती है। विदेश से लौटने वाले परिचित भी उनके लिए कोई अनोखी गणेश प्रतिमा लेकर आते हैं। राजकुमार बताते हैं कि कई बार हर बुधवार उनके संग्रह में एक नई प्रतिमा जुड़ जाती है। कोरोना काल में संग्रह बढ़ने की रफ्तार कुछ कम जरूर हुई, लेकिन नए और अनोखे गणपति तलाशने का सिलसिला बंद नहीं हुआ।अलग-अलग जगहों और कलाकारों से जुटाई गई गणेश प्रतिमाएं।

हर मूर्ति सिर्फ प्रतिमा नहीं, एक याद है
राजकुमार शाह के लिए इन हजारों प्रतिमाओं की असली कीमत उनकी संख्या में नहीं, बल्कि उनसे जुड़ी यादों में है। कोई प्रतिमा किसी यात्रा की निशानी है, किसी के पीछे किसी कलाकार की कहानी है तो किसी के साथ कोई निजी स्मृति जुड़ी हुई है। शायद यही वजह है कि 2003 में शुरू हुआ यह सफर आज भी थमा नहीं है। 5 हजार से ज्यादा गणपति घर में होने के बावजूद राजकुमार की नजर आज भी अगले अनोखे बप्पा की तलाश में रहती है। उनके लिए यह सिर्फ कलेक्शन नहीं, बल्कि भगवान गणेश के अलग-अलग रूपों, कला और यादों को संजोकर रखने की एक लंबी यात्रा है।